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ग़ज़ल
2122  2122  2122  212
याद करे दुनिया तुझे ऐसी निशानी छोड़ जा,
जोश भर दे जो सभी में वो जवानी छोड़ जा।

नाम पर तेरे कभी कोई उदासी हो नहीं,
प्यार से भरपूर कुछ यादें सुहानी छोड़ जा।

देश की खातिर लुटाओ जान अपनी शान से,
हर किसी की आँख में दो बूँद पानी छोड़ जा।

हो भरोसा हर किसी को तेरी बातों पर सदा,
देश हित की प्रेरणा दे वो बयानी छोड़ जा।

मौत आतीे है सभी को देख ‘‘मेठानी’’ यहां,
गर्व हो अपनाें को कुछ ऐसी कहानी छोड़ जा।

( मौलिक एवं अप्रकाशित )
- दयाराम मेठानी

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Comment

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Comment by Dr Ashutosh Mishra on January 19, 2015 at 1:17pm

आदरणीय इस सुंदर ग़ज़ल के लिए हार्दिक बधाई सादर 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on January 19, 2015 at 11:57am

आदरणीयदया राम भाई , बहुत बढिया गज़ल कही है , आपको हार्दिक बधाई गज़ल के लिये ।

याद करे दुनि/ या तुझे ऐ/ सी निशानी / छोड़ जा --- ये मिसरा बेबह्र है , कृपया देख लीजियेगा ।

21122          2122       2122          212 

Comment by somesh kumar on January 18, 2015 at 11:44pm

सुंदर गज़ल ,आदरणीय 

Comment by Alok Mittal on January 17, 2015 at 4:01pm

बहुत सुंदर लाजवाब ग़ज़ल

Comment by Rahul Dangi Panchal on January 17, 2015 at 11:19am
उम्दा
Comment by Dayaram Methani on January 16, 2015 at 10:49am

उत्साह बढ़ाने के लिये बहुत बहुत  धन्यवाद उमेश कटारिया जी।

Comment by umesh katara on January 16, 2015 at 10:29am

वाह वाह वाह क्या बात है 

याद करे दुनिया तुझे ऐसी निशानी छोड़ जा, 
जोश भर दे जो सभी में वो जवानी छोड़ जा।

Comment by Dayaram Methani on January 15, 2015 at 11:22pm

आदरणीय मिथलेश वामनकर जी, सुझाव के लिये आभारी हूं। जोश भर दे- दो मिसरों में आ गया है इसे संशाोधित करुंगा। 

Comment by Dayaram Methani on January 15, 2015 at 11:18pm

बहुत बहुत आभार हरिप्रकाश दुबे जी एवं आशुतोष मिश्रा जी।

Comment by Hari Prakash Dubey on January 15, 2015 at 7:48pm

मौत आतीे है सभी को देख ‘‘मेठानी’’ यहां,

गर्व हो अपनाें को कुछ ऐसी कहानी छोड़ जा।.........सुन्दर रचना पर हार्दिक बधाई आदरणीय दयाराम मैठानी साहब सादर !

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