For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

आज नायक भी यहाँ पर - ग़ज़ल ( लक्ष्मण धामी ' मुसाफिर' )

2122 2122 2122 212

************************
अजनवी  सी  सभ्यता के बीज बोकर रह गए
सोचकर अपना, किसी का बोझ ढोकर रह गए

***
वक्त  सोने  के  जगा करते हैं देखो यार हम
जागने  के  वक्त लेकिन रोज सोकर रह गए

***
लोरियाँ माँ की, कहानी  नानियों की, साथ ही
चाँद तारे , फूल, तितली लफ़्ज होकर रह गए

***
कसमसाकर  दिल जो खोले है पुरानी पोटली
याद कर बचपन  को यारो नैन रोकर रह गए

***
मानता हूँ , है  हसोड़ों  की जरूरत, दुख मगर
आज नायक भी यहाँ पर हो के जोकर रह गए

***
राजनेता  खा  रहे  बादाम-विश्की  मुफ्त  में
मोल को जनता के हिस्से सिर्फ चोकर रह गए

***
पीठ  पीछे  तो गरजते  खूब  तुम ‘नापाक वो’
सामना  होते  ही  लेकिन पाँव धोकर रह गए

***

रचना - 15 दिसम्बर 14
मौलिक और अप्रकाशित

Views: 688

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Hari Prakash Dubey on January 8, 2015 at 8:10pm

कसमसाकर  दिल जो खोले है पुरानी पोटली

याद कर बचपन  को यारो नैन रोकर रह गए.........आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सम्पूर्ण रचना सुन्दर है , बधाई आपको !


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on January 8, 2015 at 8:01pm

आदरणीय लक्ष्मण धामी जी , शे र दर शे र बेहतरीन हर अशआर के लिये दिल से  दाद कुबूल करें । सफल और सुन्दर गज़ल के लिये भी बहुत बहुत बधाई  ।

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on January 8, 2015 at 7:50pm

अच्छी रचना है i सादर i

Comment by somesh kumar on January 8, 2015 at 4:14pm

हर शे'र लाजवाब निकला /

लोरियाँ माँ की, कहानी  नानियों की, साथ ही
चाँद तारे , फूल, तितली लफ़्ज होकर रह गए

मानता हूँ , है  हसोड़ों  की जरूरत, दुख मगर
आज नायक भी यहाँ पर हो के जोकर रह गए

इन दो शे'रों पर विशेष बधाई 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on January 8, 2015 at 1:57pm

लोरियाँ माँ की, कहानी  नानियों की, साथ ही
चाँद तारे , फूल, तितली लफ़्ज होकर रह गए  -- आदरणीय लक्ष्मण भाई , इस शे र के लिये ढेरों दाद स्वीकार करें । गज़ल के लिये भी बहुत बधाइयाँ ।

Comment by Sushil Sarna on January 8, 2015 at 12:39pm

मानता हूँ , है हसोड़ों की जरूरत, दुख मगर
आज नायक भी यहाँ पर हो के जोकर रह गए
…वाह बहुत खूबसूरत अशआर .... इस सुंदर ग़ज़ल की प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई आदरणीय धामी जी।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on January 8, 2015 at 12:29pm

आदरणीय भाई विजय शंकर जी ,ग़ज़ल का अनुमोदन करने के लिए  हार्दिक धन्यवाद  l .

Comment by Dr. Vijai Shanker on January 8, 2015 at 12:14pm
" आज नायक भी यहाँ पर हो के जोकर रह गए "
सुन्दर प्रस्तुति, आदरणीय लक्षमण धामी जी , बधाई, सादर।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

जगदानन्द झा 'मनु' added 2 discussions to the group मैथिली साहित्य
Monday
Shyam Narain Verma commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"नमस्ते जी, बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति, हार्दिक बधाई l सादर"
Aug 6

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"  आदरणीय अशोक भाईजी, श्रावण मास का आज प्रथम सोमवार है. ऐसे पवित्र दिवस पर आप द्वारा प्रस्तुत…"
Aug 3

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on रोहित डोबरियाल "मल्हार"'s blog post दास्तां
"आदरणीय रोहित डोबरियाल "मल्हार" जी, आपकी भावुक प्रस्तुतीकरण का स्वागत है.  आप…"
Aug 3

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on vijay nikore's blog post सांकल मन के द्वार पर
"  निर्निमेष आँखों की प्रतीक्षा उत्कट तीव्रता के साथ शाब्दिक हुई है, आदरणीय विजय निकोर…"
Aug 3

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"वाह वाह वाह .. सावन की कजरी का आधुनिक रूप गुदगुदा गया, आदरणीय आशीष जी.  सही भी है, प्रकृति के…"
Aug 3
आशीष यादव replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय श्री अशोक कुमार जी इस कजरी पर टिप्पणी के लिए आपको बहुत बहुत धन्यवाद।  आज के परिवेश…"
Jul 27
Ashok Kumar Raktale replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय आशीष यादव जी सादर, सावन की सुंदर और मधुर  फुहारों में यह कजरी की प्रस्तुति  बहुत…"
Jul 27
vijay nikore posted a blog post

सांकल मन के द्वार पर

सांकल मन के द्वार परजब-जब जहाँ कहीं फूल खिलेयाद तुझे किया था हमने ...कहती थी न ..."क्या...तुम्हारे…See More
Jul 27
आशीष यादव added a discussion to the group भोजपुरी साहित्य
Thumbnail

कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी)

काहें सावन में देला अइसे शॉक पिया कइके हमके ब्लाॅक पिया ना …….. मनवा तोहके पुकारे नैना फोनवा…See More
Jul 26
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

हरिगीतिका छंद

  हरि नाम लो हरि नाम लो हरि, नाम लो  हरि नाम लो।यह नाम  ही  है  सत्य  मानव,  भोर लो नित शाम…See More
Jul 24
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी जी सादर,  चौपाइयों की इस प्रस्तुति पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हृदय से…"
Jul 24

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service