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आज फुर्सत मे जो बैठा तो ध्यान आया है
हमने क्या खो दिया है और क्या बनाया है

वार हर बार तो होते ही रहे पीछे से
जब किसी दोस्त ने हमको गले लगाया है

कोई आवाज नही राख कोई शोला भी
ज़िन्दगी तूने हमे खूब क्या जलाया है

कोई तो एब हमारा ही रहा होगा ही
हमने हरबार जो रूठों को फिर मनाया है

मौत भी खाक 'ऋषी' रोकेगी मेरा रस्ता
मुझको मॉं बाप के आशीष ने बनाया है

अनुराग सिंह "ऋषी"

मौलिक व अप्रकाशित

Views: 669

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Comment by Anurag Singh "rishi" on December 30, 2014 at 5:02pm
विलम्ब हेतु माफी चाहुंगा आदरनीय गुरूजनों मै यथा सम्भव कोशिस करके त्रुटि रहित गज़ल पुन: पूर्ण करूंगा

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on December 25, 2014 at 12:26am

 ज़िन्दगी तूने हमे खूब क्या जलाया है,\ जब किसी दोस्त ने हमको गले लगाया है, \ मुझको मॉं बाप के आशीष ने बनाया है \ इन पंक्तियों में 2122-212-212- 1222 का वज्न है आपको यदि उचित लगी तो इसी वज्न में पूरी रचना बदल सकते है. भाव अच्छे है . सादर 

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on December 24, 2014 at 1:18pm

अनुराग जी

आपको भाव पर दाद मिली है शिल्प् पर  नहीं i आ० बागी जी का प्रश्न गौर करे  i  सादर i

Comment by harivallabh sharma on December 24, 2014 at 12:11am

सुन्दर भाव हैं आपके..आदरणीय 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on December 23, 2014 at 9:21pm

अच्छी भावाभिव्यक्ति है आदरणीय अनुराग जी 


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on December 23, 2014 at 9:20pm

अनुराग जी, वजन क्या लिया है ?

Comment by Anurag Singh "rishi" on December 23, 2014 at 8:37pm
आभार सोमेश सर आपका
Comment by somesh kumar on December 23, 2014 at 7:47pm

वार हर बार तो होते ही रहे पीछे से
जब किसी दोस्त ने हमको गले लगाया है

कोई तो एब हमारा ही रहा होगा ही
हमने हरबार जो रूठों को फिर मनाया है

Comment by Anurag Singh "rishi" on December 23, 2014 at 6:54pm
बहुत बहुत आभार आपका आदरणीय सर
Comment by Hari Prakash Dubey on December 23, 2014 at 5:48pm

आज फुर्सत मे जो बैठा तो ध्यान आया है
हमने क्या खो दिया है और क्या बनाया है......सुन्दर प्रस्तुति अनुराग सिंह "ऋषी" जी, बधाई आपको !

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