For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

बह्र - 1212/1122/1212/22


किसी का इश्क जो हमको खुशी नहीं देता
तो यार हमको कभी बेरुखी नहीं देता

ये मामला-ए-तिज़ारत है गऱ जो समझो तो
नहीं तो हमको वो यूं बेबसी नहीं देता

बनाना दोस्त जहॉं मे तो याद ये रखना
हर एक दीप यहॉं रोशनी नहीं देता

हमारा मुल्क पढ़ाता जरूर है सबको
ये और बात सही नौकरी नही देता

जो हो सके तो लगा लेता हूं मै सीने से
मै खाली हॉंथ मे सिक्के कभी नही देता

मेरी निगाह मे इंसान हो नहीं सकता
लबों को दूसरे अपनी हंसी नही देता

न जाने कैसे ये इंसानियत बची मौला
किसी का टूटना मुझको खुशी नहीं देता

बड़े नसीब से मिलता है हुनर शेरों का
कोई किसी को यहॉं शायरी नहीं देता

तुझे जो मिलता है होता है तेरा खुद बोया
खुदा किसी को कभी शायरी नहीं देता

हमारे गर्क से तुमको सुकून मिल जाए
ये वो दुवा है जो सबको "ऋषी" नहीं देता

अनुराग सिंह "ऋषी"

मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 534

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on January 26, 2015 at 11:55am

आदरणीय अनुराग जी सुन्दर ग़ज़ल हेतु हार्दिक बधाई 

Comment by Anurag Singh "rishi" on January 26, 2015 at 11:32am
आदरणीय गिरिराज सर आपकी सलाह वाकई श्रेष्ठ है सुधार करता हूं
सादर
Comment by Anurag Singh "rishi" on January 26, 2015 at 11:27am
आप सभी आदरणीयों को दिली आभार व्यक्त करता हूं आशीष बनाए रखें
सादर

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on January 26, 2015 at 10:43am

आदरणीय अनुराग भाई , बहुत अच्छी गज़ल कही है , दिली बधाइयाँ कुबूल करें ।

ये मामला-ए-तिज़ारत है गऱ जो समझो तो         ------  गर और जो एक साथ सही लगा क्या ?

ये मामला-ए-तिज़ारत है तुम अगऱ समझो -------  क्या ये सही लगेगा ?


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on January 26, 2015 at 8:58am

बढ़िया ग़ज़ल है अनुराग जी बधाई स्वीकार करें

Comment by somesh kumar on January 25, 2015 at 7:55am

बनाना दोस्त जहॉं मे तो याद ये रखना
हर एक दीप यहॉं रोशनी नहीं देता

हमारा मुल्क पढ़ाता जरूर है सबको
ये और बात सही नौकरी नही देता-दोनों शे'रों पर बधाई

इस मंच से जोड़ने पर ये शे'र सही नहीं लग रहा व्यापकता में बेशक सही हो

बड़े नसीब से मिलता है हुनर शेरों का
कोई किसी को यहॉं शायरी नहीं देता 

Comment by Hari Prakash Dubey on January 24, 2015 at 7:21pm

आदरणीय अनुराग सिंह "ऋषी" जी , सुन्दर रचना  .........हमारा मुल्क पढ़ाता जरूर है सबको
ये और बात सही नौकरी नही देता.......बधाई आपको !

Comment by Rahul Dangi Panchal on January 24, 2015 at 6:36pm
सुन्दर गजल भाई जी !

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . . संयोग शृंगार

दोहा पंचक. . . .संयोग शृंगारअभिसारों के वेग में, बंध हुए निर्बंध । मौन सभी खंडित हुए, शेष रही…See More
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२१/२१२१/१२२१/२१२ ****** घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये उघड़े  शरीर  आप  ही  सम्मान  हो गये।१। *…See More
Saturday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
Friday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"क्षमा कीजियेगा 'मुसाफ़िर' जी "
Thursday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसफ़िर' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला आपकी…"
Thursday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। सुंदर गजल हुई है। भाई रवि जी की सलाह से यह और निखर गयी है । हार्दिक…"
Thursday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
Wednesday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"ग़ज़ल 2122   1212  22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत में क्या से क्या हो गए महब्बत में मैं…"
Wednesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ
"  आपका हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी ’मुसाफिर’ जी   "
Wednesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा एकादश. . . . . पतंग
"आदरणीय सुशील सरनाजी, पतंग को लगायत दोहावलि के लिए हार्दिक बधाई  सुघड़ हाथ में डोर तो,…"
Wednesday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय रवि भसीन 'शहीद' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला ग़ज़ल तक आए और हौसला…"
Wednesday
Sushil Sarna posted blog posts
Feb 3

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service