For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

एक ग़ज़ल..भारती की शान हिंदी (हिंदी दिवस पखवाड़े पर)

हैं अनेकों धर्म भाषा, ...एक हिंदुस्तान है l
मातृभाषा हिन्द की, हिंदी हमारी जान है ll
--
देश की संस्कृति रिवाजों पर हमें भी गर्व हो l
भारती की शान हिंदी, . विश्व में पहचान है ll
--
नृत्य शंभू ने किया, डमरू बजा, ॐ नाद का l
देववाणी के सृजन से ..विश्व का कल्यान है ll
--
पाणिनी ने दी व्यवस्था व्याकरण की विश्व को l
हम सनातन छंद रचते ...गीत लय मय गान है ll
--
सूर तुलसी जायसी, ......भूषण कवि केशव हुए l
चंद मीरा पन्त दिनकर, काव्य मय रसखान है ll
--
भार मात्रा व्यंजनों में, शब्द सब उत्तम गढ़े l
रस अलंकारों सजी .भाषा सुलभ गुणखान है ll
--
शब्द भण्डारों भरी यह विश्व की सिरमौर जो l
आंग्लता से हो प्रभावित. खो रही सम्मान है ll
--
मातृ भाषा, देश पर, जिसको नहीं हो गर्व वह l
पशु नराधम के सरीखी .....देश की संतान है ll
**हरिवल्लभ शर्मा दि.०२.०९.२०१४ 
(मौलिक एवं अप्रकाशित)

Views: 837

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by harivallabh sharma on September 14, 2014 at 1:13am

आदरणीया Maheshwari Kaneri जी , हार्दिक आभार आपने मातृभाषा हिंदी के सम्मान में ग़ज़ल के प्रयास को सराहा ..सादर नमन.

Comment by Maheshwari Kaneri on September 13, 2014 at 1:07pm

बहुत सुन्दर भाव पूर्ण , ग़ज़ल...बधाइयाँ आपको |

Comment by harivallabh sharma on September 5, 2014 at 12:28am

आदरणीय गिरिराज भंडारी साहब बहुत उत्साहवर्धक टीप हेतु हार्दिक आभार आपका.


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on September 4, 2014 at 5:18pm

आदरणीय बहुत सुन्दर भाव पूर्ण , ग़ज़ल कही है , हिन्दी की शान में , अच्छा सन्देश है , बधाइयाँ आपको |

Comment by harivallabh sharma on September 4, 2014 at 1:49pm

आदरणीय डॉ.गोपाल नारायण श्रीवास्तव साहब आपकी उत्साहित करती प्रतिक्रिया हेतु हार्दिक आभार आपका.

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on September 4, 2014 at 1:42pm

शर्मा जी

अच्छी प्रस्तुति के लिए आपको धन्यवाद   

देश की संस्कृति रिवाजों पर हमें भी गर्व हो l
भारती की शान हिंदी, . विश्व में पहचान है ll

Comment by harivallabh sharma on September 4, 2014 at 1:22pm

आद. सूबे सिंह ससुजान जी बहुत आभार आपने रचना को मन दिया .

Comment by harivallabh sharma on September 4, 2014 at 1:20pm

आदरणीय Dr. Vijay Shanker जी आपकी स्नेहिल टीप हेतु आपका हार्दिक आभार.

Comment by सूबे सिंह सुजान on September 3, 2014 at 10:30pm

बधाई , आपने हिन्दी के सम्मान में व हिन्दी के लिये प्रेरित करने की दिशा में बहुत अच्छा लिखा है।

Comment by Dr. Vijai Shanker on September 3, 2014 at 7:59pm
सुन्दर , सरल, स्मरणीय , रचना के लिए बधाई आदरणीय हरिबल्लभ शर्मा जी .

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Admin replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"स्वागतम"
10 hours ago
Admin posted discussions
11 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा सप्तक. . . . घूस

दोहा सप्तक. . . . . घूसबिना कमीशन आजकल, कब होता है काम ।कैसा भी हो काम अब, घूस हुई है आम ।।घास घूस…See More
Wednesday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा सप्तक. . . . प्यार

दोहा सप्तक. . . . प्यारप्यार, प्यार से माँगता, केवल निश्छल प्यार ।आपस का विश्वास ही, इसका है आधार…See More
Monday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"आ. भाई चेतन जी, उत्साहवर्धन व स्नेह के लिए आभार।"
Sunday
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय "
Sunday
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"आ.लक्ष्मणसिह धानी, 'मुसाफिर' साहब  खूबसूरत विषयान्तर ग़ज़ल हुई  ! हार्दिक …"
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"आ. भाई चेतन जी, सादर अभिवादन। प्रदत्त विषय पर सुंदर मुक्तक हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। प्रदत्त विषय पर सुंदर दोहे हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। प्रदत्त विषय पर सुंदर गजल हुई है। हार्दिक बधाई।"
Feb 15
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"ग़ज़ल   बह्र ए मीर लगता था दिन रात सुनेगा सब के दिल की बात सुनेगा अपने जैसा लगता था…"
Feb 14
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

हरकत हमें तो वैद की रखती तनाव में -लक्ष्मण धामी 'मुसफिर'

बदला ही राजनीति के अब है स्वभाव में आये कमी कहाँ  से  कहो  फिर दुराव में।१। * अवसर समानता का कहे…See More
Feb 14

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service