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हम पाखी जिन बाग वनों के //गज़ल//कल्पना रामानी

हम पाखी जिन बाग वनों के, हरें वहाँ से शूल।

चन्दन सी जो खुशबू बाँटें, उपजाएँ वे फूल।

 

सावन साधें, हिमगिरि काटें, बाँधें बसंत को,

हर मौसम को कर दें मिलकर, हम अपने अनुकूल।

छूटे ना पतवार हाथ से, नाव लाख डोले,

तूफानों से लें टक्कर बन, तने हुए मस्तूल।

 

आशाओं की खाद डालकर, श्रम-अंकुर रोपें,

और निराशा की जड़ को ही, कर दें नष्ट समूल।

 

प्रेम, त्याग हथियार बनाकर, मन से मन जीतें,

अमन चैन का हाथ न छोड़ें, कायम रहें उसूल।

 

हम भावी इतिहास रचयिता, भाव न ये भूलें।

बने देश यह एक नगीना, यही सोच हो मूल।

 

बलिदानों के बल पर कल था, हासिल किया जिसे,

खंडित हो अब वो स्वतन्त्रता, करें न ऐसी भूल।

मौलिक व अप्रकाशित

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सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on August 20, 2014 at 8:58am

बहुत खूबसूरत भाव आपकी ग़ज़ल के आदरणीया कल्पना जी 

हार्दिक बधाई 

Comment by कल्पना रामानी on August 19, 2014 at 9:37am

आदरणीय जितेंद्र गीतजी,  विजय शंकरजी,  गोपाल नारायणजी,  श्याम नरेनजी,   विजय निकोरे जी, जवाहर लाल सिंहजी,  प्रिय सविता मिश्रा, सीमा हरी शर्मा जी आप सबका  प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणियों के लिए हार्दिक आभार

Comment by JAWAHAR LAL SINGH on August 18, 2014 at 7:58pm

बलिदानों के बल पर कल था, हासिल किया जिसे,

खंडित हो अब वो स्वतन्त्रता, करें न ऐसी भूल।

सीख देती हुई रचना आदरणीया!

Comment by vijay nikore on August 18, 2014 at 3:25am

प्रेरित करती इस गज़ल के लिए बहुत बधाई, आदरणीया कल्पना जी।

Comment by seemahari sharma on August 17, 2014 at 3:47pm
बहुत ही प्रेरक गजल प्रत्येक शेर एक रास्ता दिखलाता हुआ बधाई आदरणीय कल्पना जी सुंदर गजल के लिए
Comment by savitamishra on August 16, 2014 at 7:31pm

सुंदर रचना दी _/\_

Comment by Shyam Narain Verma on August 16, 2014 at 4:48pm
" सुन्दर भावों से सजी इस गज़ल के लिए आपको बहुत बधाई ...... "
Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on August 16, 2014 at 3:26pm

आदरणीया

आपके इस सन्देश को लोग आत्मसात करें यही कामना है i

सादर i

Comment by Dr. Vijai Shanker on August 16, 2014 at 2:10pm
आदरणीय कल्पना रामानी जी , मनोबल को बढ़ाती , बहुत सुन्दर रचना , बधाई .
Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on August 16, 2014 at 11:23am

स्वतंत्रता-दिवस के राष्ट्रिय पर्व पर बहुत ही सुंदर गजल कही आपने आदरणीया कल्पना जी. हार्दिक बधाई स्वीकार करें

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