For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

नहीं मालूम उसे बीमारी क्या है...

मेरे बदन में ये खुमारी क्या है
लो हम आ गए हैं तैयारी क्या है,

अच्छा खासा कारोबार मिट गया
दुकानदार से पूछो उधारी क्या है,

हम आपसे भी सलीके से निभा लेते
ये बताओ अपनी रिश्तेदारी क्या है,

तुम भी यार किससे सवाल करते हो
बेईमानों से पूछा है ईमानदारी क्या है,

वो रोज दवा लेने अस्पताल जाता है
नहीं मालूम उसे बीमारी क्या है।।
— मौलिक व अप्रकाशित
— अतुल

Views: 447

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by savitamishra on July 30, 2014 at 2:35pm

बहुत बढ़िया


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on July 22, 2014 at 12:36am

आप अपनी ऐसी प्रस्तुतियों को यदि ग़ज़ल की संज्ञा देना चाहते हैं तो उसके मिसरों का वज़न दे दिया करें. साथ ही, अन्य ग़ज़लकारों की प्रस्तुतियों को भी देखें, पढ़ें.

शुभेच्छाएँ ..

Comment by Meena Pathak on July 20, 2014 at 6:16pm

बहुत खूब ...बधाई 

Comment by Santlal Karun on July 20, 2014 at 7:51am

आदरणीय अतुल जी,

अच्छी ग़ज़ल प्रस्तुति नवीन भावों के साथ; साधुवाद एवं सद्भावनाएँ !

Comment by वेदिका on July 18, 2014 at 11:52am
अच्छी रचना है। हार्दिक बधाई!
Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on July 17, 2014 at 11:58pm

अच्छा खासा कारोबार मिट गया
दुकानदार से पूछो उधारी क्या है,.......वाह! बहुत बढ़िया. बधाई आदरणीय अतुल जी

Comment by Zaif on July 17, 2014 at 6:05pm
Wah janab !!
Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on July 17, 2014 at 4:00pm

अतुल जी

अति सुन्दर i

हम आपसे भी सलीके से निभा लेते
ये बताओ अपनी रिश्तेदारी क्या है,

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

amita tiwari and आशीष यादव are now friends
10 hours ago
amita tiwari commented on amita tiwari's blog post प्यादे मान लिये जाते हैं मात्र एक संख्या भर
"मान्यवर  सौरभ पांडे जी , सार्थक और विस्तृत टिप्पणी के लिए आभार."
10 hours ago
amita tiwari commented on amita tiwari's blog post भ्रम सिर्फ बारी का है
"आशीष यादव जी , मेरा संदेश आप तक पहुंचा ,प्रयास सफल हो गया .धन्यवाद.पर्यावरण को जितनी चुनौतियां आज…"
10 hours ago
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post हरकत हमें तो वैद की रखती तनाव में -लक्ष्मण धामी 'मुसफिर'
"आदरणीय धामी जी सारगर्भित ग़ज़ल कही है...बहुत बहुत बधाई "
16 hours ago
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . संयोग शृंगार
"आदरणीय सुशील जी बड़े सुन्दर दोहे सृजित हुए...हार्दिक बधाई "
16 hours ago
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"प्रबंधन समिति से आग्रह है कि इस पोस्ट का लिंक उस ब्लॉक में डाल दें जिसमें कैलंडर डाला जाता है। हो…"
17 hours ago
आशीष यादव posted a blog post

गन्ने की खोई

पाँच सालों की उम्र,एक लोहे के कोल्हू में दबी हुई है।दो चमकदार धूर्त पत्थर (आंखें) हमें घुमा रहे…See More
20 hours ago
आशीष यादव commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . . घूस
"आदरणीय श्री सुशील जी नमस्कार।  बहुत अच्छे दोहे रचे गए हैं।  हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए।"
21 hours ago
आशीष यादव commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"एक बेहतरीन ग़ज़ल रचा है आपने। बिलकुल सामयिक।  इस बढ़िया रचना पर बधाई स्वीकार कीजिए।"
21 hours ago
आशीष यादव commented on amita tiwari's blog post भ्रम सिर्फ बारी का है
"सदियों से मनुष्य प्रकृति का शोषण करता रहा है, जिसे विकास समझता रहा है वह विनास की एक एक सीढ़ी…"
21 hours ago
आशीष यादव commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . .अधर
"वाह। "
21 hours ago
आशीष यादव commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .विविध
"आदरणीय श्री सुशील जी नमस्कार।  बहुत बढ़िया दोहों की रचना हुई है।  बधाई स्वीकार कीजिए।"
21 hours ago

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service