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क्यों घूंघट में है सच?
क्योंकि तुमने प्रयास नहीं किया
कभी इस और ध्यान नहीं दिया.
उलझे रहे जीवन के उहापोह में
परायों के दोष अपनों के मोह में.
अगर तुमने हिम्मत दिखाई होती
कभी अपनी अंतरात्मा जगाई होती.
देखा होता उठाकर तुमने घूंघट,
ख़ुशी भरा होता आँगन खचाखच.

डॉ.विजय प्रकाश शर्मा.
मौलिक और अप्रकाशित

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Comment by Dr. Vijai Shanker on June 22, 2014 at 6:48pm
What a coincidence , it was only yesterday , I wrote somewhere else ,
What is truth .?
How does it prevail ?
Or does it always remain in veil .
You , too, said the same thing . You went further , and said , क्योंकि तुमने प्रयास नहीं किया .
A couple of weeks back , I had written something like that ,

झूठ बहुत सस्ता है चला के रखा ,
सच बहुत कीमती है छुपा के रखा है |
झूठ को खुल्लमखुल्ला चला के रखा है ,
सच पे हजार पहरों को लगा के रखा है |
There I said it that we do it as a matter of policy . We all know the truth , but we do not accept it or use it and put in veil and guards .
Even our great P M , Mr. Narendra Modi very explicitly said it in parliament about our state of affair , quoting Duryodhan .
Thanks & regards .
Comment by Meena Pathak on June 22, 2014 at 5:56pm

बहुत सुन्दर .सादर बधाई 

Comment by Dr.Vijay Prakash Sharma on June 22, 2014 at 3:48pm

आपकी सराहना से मैं धन्य हुआ.बहुत- बहुत आभार,राजेश कुमारी जी.


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on June 22, 2014 at 3:31pm

कोशिश करें तो खुशियाँ कहीं ढूंढनी नहीं पड़ती खुद हमारे दिल में है यही सब भाव आपकी रचना प्रकट कर रही है ,बहुत सुन्दर सार्थक अभिव्यक्ति ,बधाई आपको आ० विजय प्रकाश शर्मा जी .

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