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गजल : तुम्हारे प्यार का सिर पर अगर आंचल नहीं होगा//शकील जमशेदपुरी//

बह्र : 1222/1222/1222/1222

तुम्हारे प्यार का सिर पर अगर आंचल नहीं होगा
मेरे जीवन में खुशियों का तो फिर बादल नहीं होगा

यकीनन कुछ न कुछ तो बात है तेरी अदाओं में
ये दिल यूं ही तुम्हारे प्यार में पागल नहीं होगा

तुम्हें कुछ दे न पाऊंगा मगर धोखा नहीं दूंगा
मेरी सोहबत में आ जाओ यहां पर छल नहीं होगा

कलम खूं में डुबोकर मैं गजल के शेर लिखता हूं
सियाही से लिखूंगा तो कोई घायल नहीं होगा

तेरी आंखों में काजल और आंसू दोनों फबते हैं
मुसीबत यह है रो दोगी तो फिर काजल नहीं होगा

तू मेरा दोस्त है लेकिन बताकर फायदा क्या है
मुहब्बत का ये मसला है ये तुझसे हल नहीं होगा

मेरे अशआर में होंगी यकीनन खूबियां कुछ तो
जमाना मेरी गजलों का यूं ही कायल नहीं होगा

-शकील जमशेदपुरी
_________________________

*मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment by Sarita Bhatia on May 19, 2014 at 6:21pm

वाह एक से बढ़कर एक अशआर 

तू मेरा दोस्त है लेकिन बताकर फायदा क्या है
मुहब्बत का ये मसला है ये तुझसे हल नहीं होगा .......

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on May 19, 2014 at 8:41am

बहुत खुबसूरत गजल कही आदरणीय शकील साहब

तू मेरा दोस्त है लेकिन बताकर फायदा क्या है
मुहब्बत का ये मसला है ये तुझसे हल नहीं होगा ............ बहुत खूब, दिली बधाइयाँ स्वीकारें

Comment by Ram Awadh VIshwakarma on May 17, 2014 at 9:16pm

तेरी आंखों में काजल और आंसू दोनों फबते हैं
मुसीबत यह है रो दोगी तो फिर काजल नहीं होगा sandar badhai

Comment by शकील समर on May 17, 2014 at 4:55pm

Anita Maurya जी बहुत-बहुत आभार।

Comment by शकील समर on May 17, 2014 at 4:55pm

शुक्रिया laxman dhami जी इस हौसला अफजाई के लिए।

Comment by Mukesh Verma "Chiragh" on May 17, 2014 at 4:55pm

आदरणीय शकील जी
खूबसूरत ग़ज़ल पर ढेरों दाद

Comment by शकील समर on May 17, 2014 at 4:54pm

शुक्रिया आदरणीया coontee mukerji जी। स्नेह बनाए रखें।

Comment by Anita Maurya on May 17, 2014 at 2:54pm

Bahut khubsurat Gazal.. 

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on May 17, 2014 at 10:49am

तुम्हारे प्यार का सिर पर अगर आंचल नहीं होगा
मेरे जीवन में खुशियों का तो फिर बादल नहीं होगा....क्या गजब की सचाई है


तुम्हें कुछ दे न पाऊंगा मगर धोखा नहीं दूंगा
मेरी सोहबत में आ जाओ यहां पर छल नहीं होगा ................बहुत खूब


तेरी आंखों में काजल और आंसू दोनों फबते हैं
मुसीबत यह है रो दोगी तो फिर काजल नहीं होगा ...... क्या खूब दुधारी तलवार चलाई है

कोटि कोटि बधाई स्वीकारे आदरणीय भाई शकील जमशेदपूरी जी .

Comment by coontee mukerji on May 16, 2014 at 11:50pm

कलम खूं में डुबोकर मैं गजल के शेर लिखता हूं
सियाही से लिखूंगा तो कोई घायल नहीं होगा.....बहुत खूब....दाद कूबूल करें.सादर.

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