For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

मेरी माँ है सबसे सुन्दर
फूल सरीखी माँ
श्रृद्धा ,त्याग ,तपस्या की
मूरत मेरी माँ
चन्दन और कुमकुम सी
लगती मेरी माँ
बाधाओं से कभी न हारे
ऐसी मेरी माँ
पूजा की घन्टी सी हरदम
बजती मेरी माँ
गीता,वेद,पुराणों में भी
मिलती मेरी माँ
मौलिक व अप्रकाशित

Views: 539

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on April 22, 2014 at 8:19am

आ० प्रज्ञा जी 

माँ की पावनता को समर्पित सुन्दर भाव चित्र ... पर इस अभिव्यक्त मूल भावना को अभी काव्य में ढलना है.. मंच की अन्य रचनाओं को भी अवश्य ही पढ़ती चलें.. स्वाध्याय स्वतः ही समयानुसार रचनाओं में आवश्यक अवयव उपलब्ध कराता है 

श्रद्धा सही शब्द है 'श्रृद्धा' नहीं ....इसे भी सुधार लें 

इस प्रयास पर मेरी हार्दिक शुभकामनाएं 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on April 15, 2014 at 10:33am

माँ के प्रति आपकी इस भावना को नमन बाकि आ० शरदिंदु जी की बात का मैं भी समर्थन करती हूँ |


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by sharadindu mukerji on April 15, 2014 at 12:18am

आदरणीया, माँ के प्रति आपकी निश्छल भावनाओं का मैं सम्मान करता हूँ और आपके इस प्रयास के लिए साधुवाद देता हूँ....लेकिन...हालाँकि काव्य रचना पर किसीको शिक्षित करने की धृष्टता नहीं कर सकता...यह प्रस्तुति रचनाकार से और समय मांगती है यदि इसे बाल कविता के स्तर से उठकर गम्भीर कविता की धारा में अपना स्थान बनाना है. सादर शुभकामनाएँ. 

Comment by SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR on April 14, 2014 at 7:29pm

प्रज्ञा जी बहुत ही प्यारा भाव काश सब संतान आप सा ही माँ के लिए सोचें और मान दें
सुन्दर
भ्रमर ५

Comment by coontee mukerji on April 13, 2014 at 3:36pm

वास्तव में इस सृष्टि का सब से सुंदर प्राणी माँ ही होती है.....आपने माँ को इतना बड़ा स्थान देकर अपनी लेखनी को बहुत बड़ी मान दे दी है.

साधुवाद.

Comment by Anurag Singh "rishi" on April 13, 2014 at 12:41pm

वाह बेहद सुन्दर कविता माँ पर कही गयी पंक्तियों की तारीफ कर सके ऐसे शब्द कम से कम हमारे पास नही बस नमन है माँ को

Comment by Pragya Srivastava on April 12, 2014 at 9:57pm
धन्यवाद,श्याम नारायण जी
Comment by Pragya Srivastava on April 12, 2014 at 9:55pm
धन्यवाद, मीना पाठक जी
Comment by Meena Pathak on April 12, 2014 at 8:31pm

सुन्दर भाव ... माँ को प्रणाम 

Comment by Shyam Narain Verma on April 12, 2014 at 10:53am
सुंदर भाव लिए, उत्तम रचना के लिए बधाई ....

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity


सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ
"  आपका हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी ’मुसाफिर’ जी   "
2 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा एकादश. . . . . पतंग
"आदरणीय सुशील सरनाजी, पतंग को लगायत दोहावलि के लिए हार्दिक बधाई  सुघड़ हाथ में डोर तो,…"
2 hours ago
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय रवि भसीन 'शहीद' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला ग़ज़ल तक आए और हौसला…"
6 hours ago
Sushil Sarna posted blog posts
21 hours ago
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय Jaihind Raipuri जी,  अच्छी ग़ज़ल हुई। बधाई स्वीकार करें। /आयी तन्हाई शब ए…"
22 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on रामबली गुप्ता's blog post कर्मवीर
"कर्मवीरों के ऊपर आपकी छांदसिक अभिव्यक्ति का स्वागत है, आदरणीय रामबली गुप्त जी.  मनहरण…"
yesterday
Jaihind Raipuri posted a blog post

ग़ज़ल

2122    1212    22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत मेंक्या से क्या हो गए महब्बत में मैं ख़यालों में आ गया उस…See More
yesterday
Jaihind Raipuri commented on Admin's group आंचलिक साहित्य
"कुंडलिया छत्तीसगढ़ी छत्तीसगढ़ी ह भाखा, सरल ऐकर बिधान सहजता से बोल सके, लइका अऊ सियान लइका अऊ…"
yesterday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . रिश्ते
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय "
Monday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

तब मनुज देवता हो गया जान लो,- लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२१२/२१२/२१२/२१२**अर्थ जो प्रेम का पढ़ सके आदमीएक उन्नत समय गढ़ सके आदमी।१।*आदमीयत जहाँ खूब महफूज होएक…See More
Monday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . रिश्ते
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। सुंदर दोहै हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
Monday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . . रिश्ते

दोहा पंचक. . . . रिश्तेमिलते हैं  ऐसे गले , जैसे हों मजबूर ।निभा रहे संबंध सब , जैसे हो दस्तूर…See More
Sunday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service