For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

सारे शहर में उग गए मशरूम जमी पर

२२१२     १२१२    २२१    १२२ 

दम भूख से हैं तोड़ते मासूम जमीं पर 

पीकर शराब मस्ती में तू झूम जमी पर

 

बच्चे मनाते फुलझड़ी बिन रो के दिवाली 

पीकर तुझे लगे मची है धूम जमी पर 

अम्बार फरजी डिग्रियों के तूने लगाए 

लटका के अब गले में इन्हें घूम जमी पर 

दो बूँद अश्क जो गिरे आँखों से यूं तेरी 

सारे शहर में उग गए मशरूम जमी पर 

सड़कों पे गर पिया तो पोलिश का भी है पंगा 

बनवा ले झुरमुटों में ही कोई रूम जमी पर 

दिन ढलते शाम होते ही  अद्धा तू  गटक ले 

जन्नत है कैसी हो तुझे मालूम जमी पर 

मासूम लाडले तेरे भटकेंगे गली में 

हो वक़्त से पहले ही न मरहूम  जमी पर 

मौलिक व अप्रकाशित 

Views: 922

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on December 10, 2013 at 7:41pm

अभ्यास के लिए अच्छा है.  संप्रेषनीयता पर भी ध्यान दें. वर्ना शेर के मिसरों में राबिता की कमी दिखेगी.

शुभेच्छाएँ


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on December 6, 2013 at 3:57pm

क्या मेरी टिप्प्णी दृष्टिगोचर नहीं हो रही ?


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on December 6, 2013 at 3:01pm

आदरणीय बागी जी के कमेन्ट को लगता है कोई पीने वाला ले उड़ा :):):):)


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on December 6, 2013 at 3:00pm

दम भूख से हैं तोड़ते मासूम जमीं पर 

पीकर शराब मस्ती में तू झूम जमी पर----पीने वालों पर अच्छा व्यंग किया है आशुतोष जी 

 

बच्चे मनाते फुलझड़ी बिन रो के दिवाली 

पीकर तुझे लगे मची है धूम जमी पर ----इस शेर को कई दफ़े पढ़ा पर समझ नहीं पाई 

अम्बार फरजी डिग्रियों के तूने लगाए 

लटका के अब गले में इन्हें घूम जमी पर -----काम नहीं बने तो गले में डाल कर ही घूमेगा 

दो बूँद अश्क जो गिरे आँखों से यूं तेरी 

सारे शहर में उग गए मशरूम जमी पर ----अश्कों से मशरूम उगे तो वाह वाह बीज की जरूरत ही नहीं :))))))

सड़कों पे गर पिया तो पोलिश का भी है पंगा 

बनवा ले झुरमुटों में ही कोई रूम जमी पर -----पोलिश ????झुरमुट तो जमीं पर हो होते हैं न ??

दिन ढलते शाम होते ही  अद्धा तू  गटक ले 

जन्नत है कैसी हो तुझे मालूम जमी पर ----जी सही कहा नालियों में जन्नत मिलती है फिर उन्हें 

मासूम लाडले तेरे भटकेंगे गली में 

हो वक़्त से पहले ही न मरहूम  जमी पर --भाव उन्नत है बह्र गड़बड़ा रही है 

बधाई ....इस ग़ज़ल को पढ़कर पीने वाले पीना भूल जायेंगे....:):):) 

Comment by ram shiromani pathak on December 6, 2013 at 1:16am

बढ़िया ग़ज़ल आदरणीय डॉ. आशुतोष जी........बधाई आपको

दम भूख से हैं तोड़ते मासूम जमीं पर ............ प्रयोग समझ नहीं पाया मै आदरणीय ... सादर 

पीकर शराब मस्ती में तू झूम जमी पर////// सुझाव है क्या?

कृपा कर मार्गदर्शन करें। । सादर

Comment by अरुन 'अनन्त' on December 5, 2013 at 4:29pm

आदरणीय आशुतोष सर बढ़िया ग़ज़ल कही है दाद कुबूल फरमाएं

Comment by Neeraj Nishchal on December 5, 2013 at 12:25pm

बहुत ही खूबसूरत और उम्दा ग़ज़ल
बहुत बहुत बधाई आदरणीय आशुतोष जी

Comment by Dr Ashutosh Mishra on December 5, 2013 at 8:42am

आदरणीय राम शिरोमणि जी ..हौसला अफजाई के लिए हार्दिक धन्यवाद .सादर 

Comment by Dr Ashutosh Mishra on December 5, 2013 at 8:42am

आदरणीया कुंती जी ..आपका प्रोत्साहन मुझे नूतन लिखने की प्रेरणा देता है ,,सादर धन्यवाद के साथ 

Comment by Dr Ashutosh Mishra on December 5, 2013 at 8:40am

आदरणीय गिरिराज भाईसाब ..प्रोत्साहन के लिए तहे दिल शुक्रिया ...सादर 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Admin replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"स्वागतम"
3 hours ago
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीया रिचा यादव जी नमस्कार बहुत शुक्रिया हौसला अफ़ज़ाई का "
3 hours ago
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"क्या गिला गर किसी को भूल गया इश्क़ में जो ख़ुदी को भूल गया अम्न का ख़्वाब देखा तो था पर क्या करुँ रात…"
3 hours ago
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीय तिलक राज कपूर जी नमस्कार बहुत- बहुत धन्यवाद आपका आपने समय निकाला ग़ज़ल तक आए और ऐसी बेहतरीन…"
4 hours ago
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीय अजय गुप्ता 'अजेय' जी नमस्कार बहुत धन्यवाद आपका आपने समय दिया आपने सहीह फ़रमाया गुणी…"
4 hours ago
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसाफ़िर' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला ग़ज़ल तक…"
4 hours ago
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"अम्न का ख़्वाब देखा तो था पर क्या करुँ रात ही को भूल गया "
4 hours ago
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"इस सुझाव को विशेष रूप से रूहानी नज़रिये से भी देखेंहुस्न मुझ पर सवार होने सेशेष सारी कमी को भूल…"
6 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आ. भाई दयाराम जी, अभिवादन व आभार।"
8 hours ago
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"हार्दिक आभार आदरणीय "
9 hours ago
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीय दयाराम जी नमस्कार  बहुत शुक्रिया आपका  सादर "
10 hours ago
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीय तिलक जी सादर अभिवादन  बहुत बहुत धन्यवाद आपका  बहुत अच्छे सुझाव हैं ग़ज़लमें निखार…"
10 hours ago

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service