For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

सबने कहा गलत है राह |

मानव जब दानव बन जाता , खो देता आचार विचार |
घूमता है जानवर जैसे , कुछ भी समझाये  परिवार |
जान की परवाह ना करता , भूल जाता भरा  संसार |
पाप का घडा जब  भरता है , कोई ना मिले मददगार |
रात में जब लोग  सो जाते , डकैत करते अत्याचार |
थाना पुलिस खोज ना पाते , हर दिन मचता हाहाकार |
सर्दी से बाहर ना निकलें  , कोई ना मिले  मददगार |
थाने  आया तेज दरोगा , देख देख  होता लाचार | 
शाम देहाती वेश बनाय , जब देखने चला बाज़ार |
भीड़ में जब घूमते निकला , युवती देखा नयन  पसार |
आकर  सारा मांस खरीदी , चली मानो लगे  बीमार  | 
लगा दरोगा उसके पीछे , देखें हम उसका घर बार | 
युवती बस्ती में जा पँहुची , दरवाजा खोली घर आय |
उसके पड़ोस में जा ठहरा , बोला रात रहेंगें भाय | 
दूर जाना है बहन के घर ,  बस सोने दो खाट बिछाय | 
बाहर सोया नजर लगाये , देखें कब वो बाहर जाय | 
सब सॊये जब घर से निकली , हाथ  लिए सारा सामान | 
दोनों हाथ थैला लटकाये , थाली में सारा पकवान |
देख शौच को चला दरोगा , लोटा ले  बना मेहमान |
गन्ने खेत बीच  जब  घूसी , बबूल पेड़ चढ़ा बलवान |
चांदनी रात लगे  सुहावन ,  देखा  सब सोचा विस्तार |
लगी परोसन सबको भोजन , खाने आये पाँव  पसार |
देख बीस पच्चीस मर्द को , उतर चला झट पट  बटवार | 
फोन किया सारे थानों को , माँग लाया   पुलिस रखवार |
सुबह  आ घेरे गन्ना खेत , भागने को  बचा ना राह |
कितने पुलिस हो गए घायल , सब डकैत मरे  बेपनाह |
पाया दरोगा  कामयाबी ,  मरे डकैतों की ले आह | 
वर्मा देख रोया या हँसा   , सबने कहा गलत है राह | 
श्याम नारायण वर्मा 
(मौलिक व अप्रकाशित)

Views: 315

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Ashok Kumar Raktale on May 31, 2013 at 11:08pm

आदरणीय श्याम नारायण वर्मा जी सादर, सुन्दर रचना काव्यमय कहानी की प्रस्तुति सादर बधाई स्वीकारें,

Comment by Neeraj Nishchal on May 27, 2013 at 1:51pm

बहुत बहुत खूबसूरत रचना 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sushil Sarna posted a blog post

दोहा सप्तक. . . . प्यार

दोहा सप्तक. . . . प्यारप्यार, प्यार से माँगता, केवल निश्छल प्यार ।आपस का विश्वास ही, इसका है आधार…See More
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"आ. भाई चेतन जी, उत्साहवर्धन व स्नेह के लिए आभार।"
Sunday
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय "
Sunday
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"आ.लक्ष्मणसिह धानी, 'मुसाफिर' साहब  खूबसूरत विषयान्तर ग़ज़ल हुई  ! हार्दिक …"
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"आ. भाई चेतन जी, सादर अभिवादन। प्रदत्त विषय पर सुंदर मुक्तक हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। प्रदत्त विषय पर सुंदर दोहे हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। प्रदत्त विषय पर सुंदर गजल हुई है। हार्दिक बधाई।"
Sunday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"ग़ज़ल   बह्र ए मीर लगता था दिन रात सुनेगा सब के दिल की बात सुनेगा अपने जैसा लगता था…"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

हरकत हमें तो वैद की रखती तनाव में -लक्ष्मण धामी 'मुसफिर'

बदला ही राजनीति के अब है स्वभाव में आये कमी कहाँ  से  कहो  फिर दुराव में।१। * अवसर समानता का कहे…See More
Saturday
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
" दोहा मुक्तक :  हिम्मत यदि करके कहूँ, उनसे दिल की बात  कि आज चौदह फरवरी, करो प्यार…"
Saturday
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"दोहा एकादश. . . . . दिल दिल से दिल की कीजिये, दिल वाली वो बात । बीत न जाए व्यर्थ के, संवादों में…"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"गजल*****करता है कौन दिल से भला दिल की बात अबबनती कहाँ है दिल की दवा दिल की बात अब।१।*इक दौर वो…"
Saturday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service