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कास मैं होता कुत्ता

कास मैं होता कुत्ता अयरा गैरा नहीं एलसिसियन ,
अयरे गैरे रोड पर मरे परे मिलते हैं ,
खाने के लिए रोटी नहीं मिलती ओ भी सुखी .
दूध मलाई मांस का टुकरा तो खाता,
अगर होता मैं एलसिसियन कुत्ता ,
चलने के लिए सायकल नहीं मिलती ओ भी टुट्टी,
कर के पिछले सिट पर आराम से जाता ,
अगर होता मैं एलसिसियन कुत्ता ,
सोने के लिए टाट नहीं मिलती ओ भी फट्टी,
मखमली गद्दे पर आराम से सोता ,
अगर होता मैं एलसिसियन कुत्ता ,
ये प्रभु इ गलती को फिर मत दुहराना ,
अगले जनम मोहे कुत्ता बनाना ,
अयरे गैरे रोड पर मरे परे मिलते हैं ,

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Comment

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Comment by PREETAM TIWARY(PREET) on May 11, 2010 at 10:37am
waah guru jee bahut badhiya.....aapki ye khasiyat hai ki aap likhte hain halke me lekin wo bhaari ho jata hai naa jane kaise....lekin bahut badhiay likha hai aapne.....yograj bhaiya ne bahut hi sahi likha hai ki...'' सिंग तां पहलां ही नहीं सी - पूंछ वी कटवा लई,
आदमी ने आदमी बनके गंवाया बहुत कुछ ! "
bahut bahut dhanyabaad guru jee humlogo ke beech ye share karne ke liye....

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on May 11, 2010 at 9:38am
Guru jee, bahut badhiya , aap halkey phulkey andaj mey bahut kuch kah jatey hai, badhiya likhey hai,
Yograj bhai ka diya gaya aek ref. line bhi kafi badhiya hai,
'' सिंग तां पहलां ही नहीं सी - पूंछ वी कटवा लई,
आदमी ने आदमी बनके गंवाया बहुत कुछ ! "
Thanks Guru jee

प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on May 10, 2010 at 4:30pm
बहुत पीड़ा है गुरु जी आपकी पंक्तियों में, आप सही कह रहे हैं बंगले में पलने वाला कुत्ता भी ग़रीब के बच्चे से बेहतर है ! 80 के दशक में हमारे एक मित्र हुआ करते थे श्री मदन मदहोश, पंजाबी भाषा में बहुत आ'ला दर्जे कि शायरी किया करते थे ! आपकी कविता पढ़ कर बरबस उनका एक शेयर ज़ेहन में उभर आया :

'' सिंग तां पहलां ही नहीं सी - पूंछ वी कटवा लई,
आदमी ने आदमी बनके गंवाया बहुत कुछ ! "

अर्थात, इंसान के सींग तो पहले से ही नहीं थे वक़्त के साथ साथ उसकी पूंछ भी ग़ायब हो गयी ! इस लिए आदमी ने आदमी बन कर पाया कुछ भी नहीं बल्कि बहुत कुछ खोया ही है! आपकी कविता भी इंसान कम होती कद्र कि तरफ ही इशारा करती है ! इतनी गंभीर व्यंगय के लिए मेरी बधाई स्वीकार कीजिए !
Comment by Admin on May 10, 2010 at 4:08pm
ये प्रभु इ गलती को फिर मत दुहराना ,
अगले जनम मोहे कुत्ता बनाना

"आमीन" हा हा हा हा हा हा , बहुत बढ़िया व्यंगात्मक कविता है ,

कृपया ध्यान दे...

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