For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

मैं तक़रीबन बीस साल बाद विदेश से अपने शहर लौटा था। बाज़ार में घूमते हुए सहसा मेरी नज़रें सब्ज़ी का ठेला लगाए एक वृद्ध पर जा टिकीं। बहुत कोशिश के बावजूद भी मैं उसको पहचान नहीं पा रहा था। लेकिन न जाने बार-बार ऐसा क्यों लग रहा था कि मैं उसे अच्छी तरह से जानता हूँ। मेरी उत्सुकता उससे भी छुपी न रही। उसके चेहरे पर आई अचानक मुस्कान से मैं समझ गया था कि उसने मुझे पहचान लिया था। काफ़ी देर की ज़हनी कशमकश के बाद जब मैंने उसे पहचाना तो मेरे पाँव के नीचे से मानो ज़मीन खिसक गई। जब मैं विदेश गया था तो इसकी एक बहुत बड़ी आटा मिल हुआ करती थी। नौकर-चाकर आगे-पीछे घूमा करते थे। धर्म-कर्म, दान-पुण्य में सबसे अग्रणी इस दानवीर पुरुष को मैं ताऊ जी कहकर बुलाया करता था। वही आटा मिल का मालिक और आज सब्ज़ी का ठेला लगाने पर मजबूर? 
मुझसे रहा नहीं गया और मैं उसके पास जा पहुँचा और बहुत मुश्किल से रुँधे गले से पूछा, “ताऊ जी, ये सब कैसे हो गया?”
भरी आँखें लिए मेरे कंधे पर हाथ रख रुँधे गले से उसने उत्तर दिया, “बच्चे बड़े हो गए हैं, बेटे।”

Views: 1439

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on April 16, 2012 at 9:36pm

मैं पढ़ गया था. इस लघुकथा पर, जहाँ तक मुझे याद है, अपनी आपसी लम्बी टेलिफोनिक चर्चा भी हुई थी. लघुकथा के विन्यास पर भी हम देर तक चर्चा करते रहे थे.

लेकिन हम इस जगह पर अपनी टिप्पणी चस्पां नहीं कर पाये थे. आदरणीय योगराजभाई साहब, आज विनम्रता से आपकी इस प्रस्तुति पर अपने शब्द रख रहा हूँ ताकि सनद रहे.

Comment by MAHIMA SHREE on April 16, 2012 at 9:17pm
आदरणीय सर ,
सादर नमस्कार ,
अभी मैंने आपकी "संतान " पढ़ी . अंदर तक हिला दिया .सच जीवन की ये कैसी विडम्बना है , बच्चो के बड़े होते और माँ बाप के उम्र ढलते ही परस्थितिया बदल जाती है ..बेहद मर्मस्पर्शी और कटु सत्य / समय बदल जाता है पर हर काल में माँ बाप के साथ यही हाल होता है |
  
सच लघु होकर भी कथा कितनी गहरी बात कह जाती है ..
साधुवाद
 
Comment by डॉ. नमन दत्त on May 21, 2011 at 8:11am
क्या बात हैं योगराज जी...बेहद मार्मिक कटु सत्य को छुआ है आपने...साधुवाद स्वीकारें...
Comment by Bhasker Agrawal on December 5, 2010 at 8:27am
"बच्चे बड़े हो गए हैं बेटे !"...touching!
Comment by Lata R.Ojha on December 3, 2010 at 1:23pm
sach mein...aboojh hai ye jeewan ka khel...jinki ungli pakad ke chalna seekhte hain baad mein unka sahaara banna kyon bhool jaate hain log..
Comment by Dr. Umeshwar Shrivastava on November 22, 2010 at 9:22pm
योगी भाई ! कुछ दिनों पहले मैंने कवि-सम्मेलन में एक कविता सुनी थी-

‘पहले हम अपने माता-पिता के साथ रहते थे,
अब माता-पिता हमारे साथ रहते हैं।’

सुनकर बड़ी पीड़ा हुई थी। ‘‘बच्चे बड़े हो गए हैं बेटा’’ ने उस पीड़ा की याद पुनः दिला दी ।
Comment by Neelam Upadhyaya on November 22, 2010 at 11:27am
मात्र पाँच शब्दों में पूरी दुनियादारी समा गई । इसके लिए ' वाह !' लिए और कोई शब्द नही सूझ रहा । योगी जी को बहुत साधुवाद ।

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on November 21, 2010 at 5:25pm
आदरणीय संपादक जी, आप OBO के लघु कथा विशेषज्ञ हो गये है, क्या बेहतरीन कहानी है, मैं जब इस लघु कथा को पढ़ रहा था तो अंतिम तक पढ़ते गया और सोचते गया कि अरे इस मे खास क्या है , कुछ लिखा ही नहीं और कहानी ख़त्म होने को है किन्तु ज्योही मैने यह पढ़ा कि "बच्चे बड़े हो गए हैं बेटे !" उछल पड़ा कि अरे पूरी लघु कथा तो बस इसी मे समाई है | वाकई जबरदस्त है | जितनी भी तारीफ़ किया जाय कम है | शिर्फ़ एक शब्द .....
अतुलनीय
Comment by Jogendra Singh जोगेन्द्र सिंह on November 21, 2010 at 4:32pm
योगी भईया ,,,
"बच्चे बड़े हो गए हैं बेटे !" इस एक वाक्य में सारा कलयुग समां गया है... लोग आपने भीतर को दर्शाने के लिए जाने कितना कुछ कह लेते हैं मगर कुछ बातें होती हैं जो एक वाक्य से भी दर्शायी जा सकती हैं..... पहले से जनता हूँ यह सब फिर भी नए सिरे से बुरा लगा.....
.
Comment by jogeshwar garg on November 21, 2010 at 1:32pm
युवाओं के लिए अवश्य पढ़ने लायक एक अति लघु कथा.

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

amita tiwari posted a blog post

बहुत सोचती हैं क्यों ये औरतें

बहुत सोचती हैं क्यों ये औरतें बेगुनाही और इन्साफ की बात क्यों सोचती हैं ये औरतें चुपचाप अहिल्या बन…See More
yesterday
amita tiwari commented on amita tiwari's blog post गर्भनाल कब कट पाती है किसी की
" मान्य,सौरभ पांडे जीआशीष यादव जी , , ह्रदय से आभारी हूँ. स्नेह बनाए रखियगा | सौरभ जी ने एक…"
Thursday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on amita tiwari's blog post बहुत सोचती हैं क्यों ये औरतें
"आदरणीया अमिताजी, तार्किकता को शाब्दिक कर तटस्थ सवालों की तर्ज में बाँधा जाना प्रस्तुति को रुचिकर…"
Thursday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post हरकत हमें तो वैद की रखती तनाव में -लक्ष्मण धामी 'मुसफिर'
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी, आपकी प्रस्तुति निखर कर सामने आयी है. सभी शेर के कथ्य सशक्त हैं और बरबस…"
Thursday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"आदरणीय नीलेश भाई, आपका स्वागत है.     करेला हो अथवा नीम, लाख कड़वे सही, लेकिन रुधिर…"
Thursday
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"आदरणीय बाग़ी जी एवं कार्यकारिणी के सभी सदस्यगण !बहुत दुखद है कि स्थिथि बंद करने तक आ गयी है. आगे…"
Wednesday

सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"आदरणीय अजय गुप्ता जी, आपकी भावनाओं और मंच के प्रति आपके जुड़ाव को शब्द-शब्द में महसूस किया जा सकता…"
Tuesday
amita tiwari and आशीष यादव are now friends
Monday
amita tiwari commented on amita tiwari's blog post प्यादे मान लिये जाते हैं मात्र एक संख्या भर
"मान्यवर  सौरभ पांडे जी , सार्थक और विस्तृत टिप्पणी के लिए आभार."
Monday
amita tiwari commented on amita tiwari's blog post भ्रम सिर्फ बारी का है
"आशीष यादव जी , मेरा संदेश आप तक पहुंचा ,प्रयास सफल हो गया .धन्यवाद.पर्यावरण को जितनी चुनौतियां आज…"
Monday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post हरकत हमें तो वैद की रखती तनाव में -लक्ष्मण धामी 'मुसफिर'
"आदरणीय धामी जी सारगर्भित ग़ज़ल कही है...बहुत बहुत बधाई "
Monday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . संयोग शृंगार
"आदरणीय सुशील जी बड़े सुन्दर दोहे सृजित हुए...हार्दिक बधाई "
Monday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service