For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

मिट्टी के घरोंदे टूट गये .......

मिट्टी के घरोंदे टूट गये
इंटो के महल बनाने मे
हम भूल गये संस्कृति अपनी
खुद को आधुनिक बनाने मे
पापा का प्यार न याद रहा
माँ की ममता भी भूल गये
ये बच्चे जो मशगुल हुए
खुद की पहचान बनाने में
जो प्यार मेरा सच्चा होता
दो पल में ही लौट आते वो
वो समझे नहीं जज्बात मेरे
मैंने उम्र गवां दी समझाने में
जिन्हें अपना अपना कहते थे
वो एक पल में पराया कर गये
हम याद नही करते उनको मगर
तकलीफ बड़ी है भुलाने में
जो दोस्त मेरे होते थे
वो दोस्त भी सारे बदल गये
विश्वाश भी अब तो डरता हैं
प्यार किसी से जताने में  
है लाख बुरे हम ठहरे
लेकिन दिल तो अपना सच्चा है
है वक़्त अभी भी लौट आओ
कही देर बहुत न हो जाये
हमे इतना आजमाने में  
हवा चमन की बदल गयी
पेडो के रूप भी बदल गये
गलती कर बैठा है शायद माली
इस बार बीज लगाने में .....!!!!!!!!!!!!!!

Views: 585

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by vijay nikore on April 16, 2013 at 2:58pm

सोनम जी:

 

आपकी रचना में भाव अच्छे लगे।

 

सादर,

विजय निकोर

Comment by Sonam Saini on April 16, 2013 at 1:55pm

आप सभी आदरणीय जनों को सादर नमस्कार
राम सिरोमनि जी रचना को पसंद करने के लिए बहुत आभार , परवीन मैम आपने अपना कीमती समय दिया
बहुत बहुत शुक्रिया ...... :) हम्म दुनिया ख़तम नही होती किसी के न आने पर मगर कुछ लोग जिन्दगी में ऐसे होते हैं
जिनके न आने पर जिन्दगी के मायने बदल जाते हैं , आदरणीय अशोक कुमार सर जी लय का ध्यान ही नही रहा लिखते समय
आपने मार्गदर्शन किया बहुत बहुत आभार व धन्यवाद सर जी ..... योगी सर रिश्तो के मतलब बदल गये हैं , सब बदल जाता है तो
ये भी बदल गये ... बहुत बहुत धन्यवाद 


Comment by Yogi Saraswat on April 13, 2013 at 10:36am
बहुत सही लिखा आपने सोनम जी , अधिनिकता के चलते हम अपने और गैरों में फर्क नहीं कर पा रहे हैं ! आप रिश्तों पर बहुत सुन्दर लिखती हैं !
Comment by Ashok Kumar Raktale on April 12, 2013 at 8:39am

आदरणीया सोनम जी सुन्दर अभिव्यक्ति, कुछ गाकर लिखा होता तो अटकाव भी ख़त्म होते

मिट्टी के घरोंदे टूट गये
इंटो के महल बनाने मे
हम भूल गये संस्कृति अपनी
खुद को आधुनिक बनाने मे  "आधुनिकता अपनाने में,"

Comment by Parveen Malik on April 10, 2013 at 8:31pm

हम्म बहुत ही सटीक बात है आधुनिकता के चलते अपनी संस्कृति को भूल गए ...

इतनी मायूसी अछि नहीं उनके चले जाने पर 

दुनिया ख़तम नहीं होती किसी के ना आने पर ...

Comment by ram shiromani pathak on April 9, 2013 at 7:33pm

पापा का प्यार न याद रहा 
माँ की ममता भी भूल गये 
ये बच्चे जो मशगुल हुए 
खुद की पहचान बनाने में

बहोत ही सुन्दर रचना है !हार्दिक बधाई 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Awanish Dhar Dvivedi posted a blog post

माँ

माँ यह शब्द नहींं केवलइस जग की माँ से काया है। हम सबकी खातिर अतिपावन माँ के आँचल की छाया है।१।माँ…See More
yesterday
Dayaram Methani replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"अगर आप यों घबरा कर मैदान छोड़ देंगे तो जिन्होने एक जुट होकर षड़यन्त्र किया है वे अपनी जीत मानेंगे।…"
yesterday
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"अब, जबकि यह लगभग स्पष्ट हो ही चुका है कि OBO की आगे चलने की संभावना नगण्य है और प्रबंधन इसे ऑफलाइन…"
Monday
amita tiwari posted a blog post

बहुत सोचती हैं क्यों ये औरतें

बहुत सोचती हैं क्यों ये औरतें बेगुनाही और इन्साफ की बात क्यों सोचती हैं ये औरतें चुपचाप अहिल्या बन…See More
Friday
amita tiwari commented on amita tiwari's blog post गर्भनाल कब कट पाती है किसी की
" मान्य,सौरभ पांडे जीआशीष यादव जी , , ह्रदय से आभारी हूँ. स्नेह बनाए रखियगा | सौरभ जी ने एक…"
May 14

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on amita tiwari's blog post बहुत सोचती हैं क्यों ये औरतें
"आदरणीया अमिताजी, तार्किकता को शाब्दिक कर तटस्थ सवालों की तर्ज में बाँधा जाना प्रस्तुति को रुचिकर…"
May 14

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post हरकत हमें तो वैद की रखती तनाव में -लक्ष्मण धामी 'मुसफिर'
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी, आपकी प्रस्तुति निखर कर सामने आयी है. सभी शेर के कथ्य सशक्त हैं और बरबस…"
May 14

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"आदरणीय नीलेश भाई, आपका स्वागत है.     करेला हो अथवा नीम, लाख कड़वे सही, लेकिन रुधिर…"
May 14
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"आदरणीय बाग़ी जी एवं कार्यकारिणी के सभी सदस्यगण !बहुत दुखद है कि स्थिथि बंद करने तक आ गयी है. आगे…"
May 13

सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"आदरणीय अजय गुप्ता जी, आपकी भावनाओं और मंच के प्रति आपके जुड़ाव को शब्द-शब्द में महसूस किया जा सकता…"
May 13
amita tiwari and आशीष यादव are now friends
May 11
amita tiwari commented on amita tiwari's blog post प्यादे मान लिये जाते हैं मात्र एक संख्या भर
"मान्यवर  सौरभ पांडे जी , सार्थक और विस्तृत टिप्पणी के लिए आभार."
May 11

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service