For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

एक बार वो लड़की बनकर तो देखे.....

तेरे सपनो की कोई औकात नहीं 
मेरे सपने हैं बहुत बड़े
मुझसे जब यह बात कही उसने 
मेरे दिल ने बस एक बात कही......

एक बार वो लड़की बनकर तो देखे
खुद- ब- खुद समझ जायेगा मेरी मज़बूरी को
क्यों इतने छोटे हैं मेरे सपने
वो भी समझ जायेगा इस सच्चाई को
एक बार वो ........................

बचपन से ही मैंने सीखा
जो मुझको दुनिया ने सिखाया
माँ ने सिखाया, पापा ने सिखाया
मेरे बड़े भाई ने सिखाया,
तू लड़की है,
लड़की बन कर रह तू
घर के काम में ध्यान लगा
सपनो की धारा में न बह तू
एक बार वो लड़की सा सुनकर तो देखे
खुद- ब - खुद समझ जायेगा मेरी मज़बूरी को
एक बार वो .......................

जब भी मैंने बढ़ना चाहा
आगे बढकर पढ़ना चाहा
कदमो में मेरे डाली बेड़ी 
मैं लड़की हूँ , बस इसलिए न खेली ??????

उड़ना नहीं सीखा मैंने
मेरे पंखो की भी खता नहीं
उड़ने से पहले ही पंख गवां बैठी
लड़की होने की मुझे सजा मिली
एक बार वो लड़की -सा हो कर तो देखे
खुद- ब - खुद समझ जायेगा मेरी मज़बूरी को !!

Views: 519

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Ashok Kumar Raktale on April 22, 2013 at 8:09pm

आदरणीया सोनम जी. सच है हमारे समाज में लड़कियों के पैरों में बेडी पड़ी रहती है. कोई पुरुष इसको न समझे तो फिर ऐसे भाव आना स्वाभाविक है. सुन्दर भावपूर्ण रचना. बधाई स्वीकारें.


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on April 17, 2013 at 8:15pm

सोनम जी हालांकि आपने बहुत कुछ सच्चाई बयाँ  की है किन्तु अब वक़्त के धारे के साथ बहना है इतनी बंदिशों मजबूरियों के बाद भी आज लड़की ने अपनी काबिलियत का परिचय दिया है एक छोटा सा उदाहरण ---घर का काम करके भी पढ़ाई में लड़कों से ज्यादा नंबर लाती है उनसे कहिये लड़की बनकर ऐसा करके तो दिखाइये माँ बनकर सबको संभालती हैं बाहर नौकरी भी करती हैं ये सब करके दिखाइये । शायद आपकी पोस्ट पहली बार ही पढ़ी है अच्छा लिखा है आपने लिखती रहिये शुभकामनायें |

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on April 17, 2013 at 6:52pm

आदरणीया सोनम जी, ’कदमो में मेरे डाली बेड़ी
मैं लड़की हूँ ए बस इसलिए न खेली ?????
उड़ना नहीं सीखा मैंने’ अतिसुन्दर । बधाई स्वीकारें। सादर,

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on April 17, 2013 at 2:16pm

जब भी मैंने बढ़ना चाहा
आगे बढकर पढ़ना चाहा
कदमो में मेरे डाली बेड़ी 
मैं लड़की हूँ , बस इसलिए न खेली ??????

उड़ना नहीं सीखा मैंने
मेरे पंखो की भी खता नहीं
उड़ने से पहले ही पंख गवां बैठी
लड़की होने की मुझे सजा मिली
एक बार वो लड़की -सा हो कर तो देखे
खुद- ब - खुद समझ जायेगा मेरी मज़बूरी को !!

सत्य है, 

बधाई 

Comment by vijay nikore on April 17, 2013 at 1:18pm

सोनम जी:

 

इस विषय पर जितना लिखा जाए कम है। हम सभी को मिल कर नारी का उत्थान करना है।

शायद आपने मेरी कविता "नारी का मन" पढ़ी होगी ... नारी के मन पर क्या बीतती है, उसमें यह

दृष्टांत किया था।

 

आपकी रचना के भाव सत्य से भरपूर हैं।

बधाई। लिखते रहिए।

 

सादर,

विजय निकोर

Comment by Shyam Narain Verma on April 17, 2013 at 12:01pm
बहुत बहुत बधाई इस सुन्दर रचना के लिए .................
Comment by ram shiromani pathak on April 17, 2013 at 11:59am

बहुत सुन्दर रचना बन पड़ी है बहन सोनम जी !! हार्दिक बधाई 

Comment by Yogi Saraswat on April 17, 2013 at 11:50am

आगे बढकर पढना चाहा
कदमो में मेरे डाली बेडी
मैं लड़की हूँ , बस इसलिए न खेली ??????

उड़ना नहीं सीखा मैंने
मेरे पंखो की भी खता नहीं
उड़ने से पहले ही पंख गवां बैठी
लड़की होने की मुझे सजा मिली
एक बार वो लड़की -सा हो कर तो देखे
खुद- ब - खुद समझ जायेगा मेरी मज़बूरी को !!

सोनम जी , यहाँ आपसे असहमत हूँ ! जहां चाह वहां राह ! बात मानने की है की लड़कियों के लिए सब कुछ आसान नहीं होता लेकिन बहुत लड़कियां ऐसी भी हैं जिन्होंने इस चुनौती को स्वीकार किया है और अपने नाम और काम को बुलंदियों तक पहुँचाया है !

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Awanish Dhar Dvivedi posted a blog post

माँ

माँ यह शब्द नहींं केवलइस जग की माँ से काया है। हम सबकी खातिर अतिपावन माँ के आँचल की छाया है।१।माँ…See More
17 hours ago
Dayaram Methani replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"अगर आप यों घबरा कर मैदान छोड़ देंगे तो जिन्होने एक जुट होकर षड़यन्त्र किया है वे अपनी जीत मानेंगे।…"
20 hours ago
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"अब, जबकि यह लगभग स्पष्ट हो ही चुका है कि OBO की आगे चलने की संभावना नगण्य है और प्रबंधन इसे ऑफलाइन…"
Monday
amita tiwari posted a blog post

बहुत सोचती हैं क्यों ये औरतें

बहुत सोचती हैं क्यों ये औरतें बेगुनाही और इन्साफ की बात क्यों सोचती हैं ये औरतें चुपचाप अहिल्या बन…See More
Friday
amita tiwari commented on amita tiwari's blog post गर्भनाल कब कट पाती है किसी की
" मान्य,सौरभ पांडे जीआशीष यादव जी , , ह्रदय से आभारी हूँ. स्नेह बनाए रखियगा | सौरभ जी ने एक…"
Thursday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on amita tiwari's blog post बहुत सोचती हैं क्यों ये औरतें
"आदरणीया अमिताजी, तार्किकता को शाब्दिक कर तटस्थ सवालों की तर्ज में बाँधा जाना प्रस्तुति को रुचिकर…"
Thursday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post हरकत हमें तो वैद की रखती तनाव में -लक्ष्मण धामी 'मुसफिर'
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी, आपकी प्रस्तुति निखर कर सामने आयी है. सभी शेर के कथ्य सशक्त हैं और बरबस…"
Thursday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"आदरणीय नीलेश भाई, आपका स्वागत है.     करेला हो अथवा नीम, लाख कड़वे सही, लेकिन रुधिर…"
May 14
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"आदरणीय बाग़ी जी एवं कार्यकारिणी के सभी सदस्यगण !बहुत दुखद है कि स्थिथि बंद करने तक आ गयी है. आगे…"
May 13

सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"आदरणीय अजय गुप्ता जी, आपकी भावनाओं और मंच के प्रति आपके जुड़ाव को शब्द-शब्द में महसूस किया जा सकता…"
May 13
amita tiwari and आशीष यादव are now friends
May 11
amita tiwari commented on amita tiwari's blog post प्यादे मान लिये जाते हैं मात्र एक संख्या भर
"मान्यवर  सौरभ पांडे जी , सार्थक और विस्तृत टिप्पणी के लिए आभार."
May 11

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service