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झबरीली मूंछों वाले लोगों को देख कर मेरा भी कटीली मूँछ रखने का मन हो आया.... अब आप देखें तो मेरी बेटी झलक की ओर से किसी मूंछों वाले के लिए कही गयी नयी बात क्या होगी...

मूँछों के झोंटे ::: ©

ताऊ जी ताऊ जी.....
मेले प्याले-प्याले ताऊ जी..
मेले छुई-मुई छे बचपन को..
लटका कल अपनी मूंछों में..
त्लिप्ती दिया कलो झोंटे देकल..
अनुपम छुन्दल हवादाल झूला..
सदृश्य अनुराग मेली खिखिलाहट..
देगी आनंद तुमको मेरे ताऊ जी..
कुम्हला ना जाये मेला बचपन..
बाँध छको तो बाँध लो मूंछों में..
अपने प्याल भले झूले का बंधन.. हा हा आहा.. ©

जोगेन्द्र सिंह Jogendra Singh ( 18 November 2010 )
.

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Comment by Jogendra Singh जोगेन्द्र सिंह on November 21, 2010 at 6:45pm
धन्यवाद गणेश जी.....

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on November 21, 2010 at 5:41pm
आपकी कल्पना जबरदस्त है भाई |
Comment by Jogendra Singh जोगेन्द्र सिंह on November 20, 2010 at 12:11am
@ रवि कुमार जी ,,,
बहुत-बहुत आभार आपका.........
Comment by Rash Bihari Ravi on November 19, 2010 at 4:16pm
khubsurat

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