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इन्साफ जो मिल जाय तो दावत की बात कर  

मुंसिफ के सामने न रियायत की बात कर

 

तूने किया है जो भी हमें कुछ गिला नहीं

ऐ यार अब तो दिल से मुहब्बत की बात कर

 

गर खैर चाहता है तो बच्चों को भी पढ़ा

आलिम के सामने न जहालत की बात कर

 

अपने ही छोड़ देते तो गैरों से क्या गिला

सब हैं यहाँ ज़हीन सलामत की बात कर

 

'अम्बर' भी आज प्यार की धरती पे आ बसा 

जुल्मो सितम को भूल के जन्नत की बात कर

--अम्बरीष श्रीवास्तव  

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Comment

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Comment by Er. Ambarish Srivastava on September 12, 2012 at 8:22pm

आदरणीय अशोक जी,

इस शेअर सहित पूरी ग़ज़ल को पढ़ने, मजा लेने व तारीफ़ करने के लिए हमारी और से दिली शुक्रिया क़ुबूल फरमाएं ! 

Comment by कुमार गौरव अजीतेन्दु on September 12, 2012 at 8:11pm

आदरणीय अग्रज........सुन्दर रचना के लिये अनुज की बधाई स्वीकार की जाए........

Comment by Ashok Kumar Raktale on September 12, 2012 at 7:51pm

'अम्बर' भी आज प्यार की धरती पे आ बसा 

जुल्मो सितम को भूल के जन्नत की बात कर

बहुत सुन्दर गजल आ. अम्बरीश जी पढ़कर मजा आया.हार्दिक बधाई स्वीकारें.

Comment by Er. Ambarish Srivastava on September 12, 2012 at 6:47pm

आदरेया रेखा जी, इस ग़ज़ल की तारीफ़ करने  के लिए तहे दिल से शुक्रिया क़ुबूल फरमाएं .....

Comment by Rekha Joshi on September 12, 2012 at 5:41pm

तूने किया है जो भी हमें कुछ गिला नहीं

ऐ यार अब तो दिल से मुहब्बत की बात कर,उम्दा गजल आदरणीय अम्बरीश जी हार्दिक बधाई 

Comment by Er. Ambarish Srivastava on September 12, 2012 at 4:02pm

धन्यवाद मित्र  राजेश जी !

Comment by राजेश 'मृदु' on September 12, 2012 at 3:58pm

बड़ी सुंदर और नर्म-नर्म सी गज़ल है, हार्दिक बधाई आपको 

Comment by Er. Ambarish Srivastava on September 12, 2012 at 1:52pm

बहुत-बहुत दिली शुक्रिया आदरणीय सौरभ जी !

Comment by Er. Ambarish Srivastava on September 12, 2012 at 1:51pm

ग़ज़ल की सराहना के लिए हार्दिक धन्यवाद भाई कपूर रस्तोगी जी !


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on September 12, 2012 at 1:31pm

पूरी ग़ज़ल सफल है आदरणीय.. .

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