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दिल में मेरे कैद कैसे हो गए कान्हा

तुम हमारे बस हमारे हो गए कान्हा
इश्क वाले तुख्म दिल में बो गए कान्हा

तुम जिसे रखने को 'पा' भी कम पड़ी दुनिया
दिल में मेरे कैद कैसे हो गए कान्हा

याद तुझको जो कभी शैतान भी कर ले
पाप उस शैतान के सब धो गए कान्हा

जब तुम्हारे नूर से रोशन है दुनिया ये
पत्थरों में फिर बसे क्यूँ खो गए कान्हा

आशिकी का पाठ सिखला के जमाने को
तान मुरली की सुना के लो गए कान्हा

है तेरे क़दमों प जन्नत नूर आँखों में
ख्वाब में चेहरा दिखा के वो गए कान्हा

बस तुझे पाने के खातिर मिट गए लेकिन
फिर न आये लौट कर तुम जो गए कान्हा

"दीप" दीवाना हुआ है दीद पाने को  
चश्म भी अब जुश्तुजू ले रो गए कान्हा  


संदीप पटेल "दीप"

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Comment by Ashok Kumar Raktale on August 14, 2012 at 8:23am

बस तुझे पाने के खातिर मिट गए लेकिन
फिर न आये लौट कर तुम जो गए कान्हा
वाह बहुत सुन्दर संदीप जी.

Comment by Rekha Joshi on August 10, 2012 at 10:50am

जब तुम्हारे नूर से रोशन है दुनिया ये 
पत्थरों में फिर बसे क्यूँ खो गए कान्हा ,अति सुंदर रचना संदीप जी ,बहुत बहुत बधाई 

Comment by Ashish Srivastava on August 9, 2012 at 1:24pm

बस तुझे पाने के खातिर मिट गए लेकिन 
फिर न आये लौट कर तुम जो गए कान्हा 

Bahut sundar rachna , badhai ho mitra

 

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