For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

कैसी तकदीर ले के दुनियां में हम आए हैं
ज़ख्म-ए-दिल पे ही तो  इल्ज़ाम  उनके खाए हैं
कैसी तकदीर ले के दुनियां -------------
हम गुनहगार नहीं फिर भी गुनहगार सही
क्या कहें किससे कितनें धोखे हमनें खाए हैं
ज़ख्म-ए-दिल पे ही तो  इल्ज़ाम  उनके खाए हैं
कैसी तकदीर ले के दुनियां -------------
वक़्त-ओ-हालात  मुकद्दर ही बदल देते हैं
हम तो अपनों के ही सताए हैं 
ज़ख्म-ए-दिल पे ही तो  इल्ज़ाम  उनके खाए हैं
कैसी तकदीर ले के दुनियां -------------
दीपक 'कुल्लुवी' को परखने की भूल न  करना
हँसते हँसते हमनें खंज़र दिल पे खाए हैं
ज़ख्म-ए-दिल पे ही तो  इल्ज़ाम उनके खाए हैं
कैसी तकदीर ले के दुनियां -------------

दीपक कुल्लुवी

Views: 197

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by CA (Dr.)SHAILENDRA SINGH 'MRIDU' on April 30, 2012 at 12:49pm
हम गुनहगार नहीं फिर भी गुनहगार सही
क्या कहें किससे कितनें धोखे हमनें खाए हैं
खूबसूरत कृतित्व पर  बधाई स्वीकार करें
Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on April 29, 2012 at 2:00pm

aadarniy deepak ji, saadar.

bahut khoob. दीपक 'कुल्लुवी' को परखने की भूल न  करना

हँसते हँसते हमनें खंज़र दिल पे खाए हैं
ज़ख्म-ए-दिल पे ही तो  इल्ज़ाम उनके खाए हैं
कैसी तकदीर ले के दुनियां -------------

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

अमीरुद्दीन 'अमीर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-136
"आदरणीय निलेश शेवगाँवकर जी आदाब, ग़ज़ल पर आपकी आमद, सुख़न नवाज़ी और हौसला अफ़ज़ाई का तह-ए-दिल से…"
24 minutes ago
Rachna Bhatia commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल-ज़माने को बताना चाहे
"आदरणीय नीलेश शेवगांवकर जी, ग़ज़ल तक आने के लिए बेहद शुक्रिय:। आदरणीय, क़रीब यार में वस्ल करने की…"
29 minutes ago
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-136
"सारा जीवन जिनकी इक हाँ की ख़ातिर बर्बाद किया क़िस्मत का ये खेल तो देखो मक़तल में इरशाद…"
59 minutes ago
Usha Awasthi shared their blog post on Facebook
2 hours ago
Anil Kumar Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-136
"22 22 22 22 22 22 22 2 एक हमीं ने दुनिया तेरा वीराना आबाद कियालेकिन नफ़रत की आँधी ने ख़ूब इसे बरबाद…"
2 hours ago
Nilesh Shevgaonkar commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post शठ लोग अब पहनकर चोला ये गेरुआ सा - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. लक्ष्मण जी,अच्छी ग़ज़ल हुई है.. बधाई..आँखों के आँसुओं कहना ठीक नहीं है.. आँसू आँखों ही के होते…"
2 hours ago
Nilesh Shevgaonkar commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल-ज़माने को बताना चाहे
"आ. रचना जी,अच्छी ग़ज़ल हुई है . बधाई  दिल करीब और करीब यार के आना चाहे यहाँ करीब यार में मिसरा…"
2 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-136
"//इस शेर में मैं मात्राओं के क्रम को समझ नहीं पा रहा कृपया मार्गदर्शन करें। 'हमने अपना…"
2 hours ago
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-136
"टिप्पणी में एक मुख्य बिंदु छूट गया अत: पुन: हाज़िर हुआ हूँ .. //इस बह्र में 1212 को 222 लेने की छूट…"
3 hours ago
Nilesh Shevgaonkar commented on Anjuman Mansury 'Arzoo''s blog post ग़ज़ल - फिर ख़ुद को अपने ही अंदर दफ़्न किया
"आ. समर सर,यह छन्द ही हिन्दी का है..और यदि हिन्दी का छन्द लय नहीं तोड़ रहा २१२१ लेने से तो उर्दू अथवा…"
3 hours ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-136
"जनाब लक्ष्मण धामी 'मुसाफ़िर' जी आदाब ' तरही मिसरे पर ग़ज़ल का अच्छा प्रयास हुआ है .…"
3 hours ago
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-136
"तन्हा बैठा, बोतल खोली और ख़ुद से संवाद किया मैं जब मरने वाला था किस किस ने मुझ को याद किया. . सर पे…"
3 hours ago

© 2021   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service