For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

22, 22, 22, 22,
1)कितनी बातें करते हो तुम
ख़ाली बातें करते हो तुम

2)तुमको कोई मरज़ है क्या बस
अपनी बातें करते हो तुम

3) सीधा बंदा हूँ क्यों मुझसे
उल्टी बातें करते हो तुम

4)छुप कर मिलने क्यों आऊँ मैं
ख़ाली बातें करते हो तुम

5)होने लगता है कुछ दिल में
जब भी बातें करते हो तुम

6) चाँद सितारों से क्या अब भी
मेरी बातें करते हो तुम

7)काम नहीं करते हो उतना
जितनी बातें करते हो तुम

8)चैन मिलेगा कैसे तुमको
गुज़री बातें करते हो तुम

मौलिक अप्रकाशित 

Views: 474

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Md. Anis arman on December 12, 2021 at 8:45pm

जनाब लक्ष्मण धामी मुसाफ़िर साहब ग़ज़ल तक आने के लिए बहुत बहुत शुक्रिया, हार्दिक आभार 

Comment by Md. Anis arman on December 12, 2021 at 8:44pm

जनाब जवाहर लाल सिंह जी ग़ज़ल तक आने के लिए बहुत बहुत शुक्रिया, हार्दिक आभार 

Comment by Md. Anis arman on December 12, 2021 at 8:44pm

जनाब समर कबीर साहब देर से जवाब देने के किए मुआफ़ी चाहता हूँ, ग़ज़ल तक आने और अपनी प्रतिक्रिया देने के लिए बहुत बहुत शुक्रिया, आपके बताए अनुसार सुधार कर लेता हूँ 

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on October 27, 2021 at 7:05am

आ. भाई अनीस जी, सादर अभिवादन । बहुत खूब गजल हुई है। हार्दिक बधाई।

Comment by JAWAHAR LAL SINGH on October 19, 2021 at 9:11pm

7)काम नहीं करते हो उतना
जितनी बातें करते हो तुम

8)चैन मिलेगा कैसे तुमको
गुज़री बातें करते हो तुम

आदरणीय अनीस अरमान जी, मुझे उपर्युक्त  पंक्तियाँ बहुत अच्छी लगी .. बधाई स्वीकारें!

Comment by Samar kabeer on October 11, 2021 at 7:00am

जनाब अनीस `अरमान` जी आदाब, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास हुआ है , बधाई स्वीकार करें I 

व्छु`प कर मिलने क्यों आऊँ मैं
ख़ाली बातें करते हो तुम`

इस शे`र के सानी मिसरे में उचित लगे तो `ख़ाली` की जगह `कैसी` कर सकते हैं I 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . क्रोध
"आदरणीय सौरभ पाण्डेय जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय जी"
17 minutes ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . .
"आदरणीय सौरभ पाण्डेय जी सृजन के भावों को आत्मीय मान देने का दिल से आभार"
19 minutes ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा त्रयी. . . . सन्तान
"आदरणीय सौरभ पाण्डेय जी सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार ।"
20 minutes ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . क्रोध
"क्रोध बैर का मूल है, क्रोध घृणा की आग ।क्रोध अनल के कब मिटे, अन्तर्मन से दाग वाह वाह…"
Feb 15

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल...मैं नहीं हूँ
"रोचक रदीफ लेकर निभाना चाहा है आपने बृजेश जी. कुछॆक मिसरा-ए-सानी को छोड़ दें तो आप सफल भी रहे…"
Feb 15

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . .
"शीत को केन्द्र में अख कर अच्छे दोहे निकाले हैं आपने, आदरणीय सुशील सरना जी.  हार्दिक…"
Feb 14

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की -कुछ थे अधूरे काम सो आना पड़ा हमें.
"फिर अपनी ख़ाक ही से न उगने लगे कहींसो हम जो मर गए तो जलाना पड़ा हमें. क्या-क्या सोच लेते हैं, आप भी…"
Feb 14

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा त्रयी. . . . सन्तान
"अत्यंत ही गहन, प्रासंगिक और सार्थक दोहों के लिए हार्दिक बधाइयाँ, आदरणीय सुशील सरना जी. "
Feb 14
Admin posted a discussion

"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-164

परम आत्मीय स्वजन,ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरे के 164 वें अंक में आपका हार्दिक स्वागत है | इस बार का…See More
Feb 14
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on मनोज अहसास's blog post अहसास की ग़ज़ल:मनोज अहसास
"आ. भाई मनेज जी, अभिवादन। अच्छी गजल हुई है। हार्दिक बधाई।"
Feb 14
मनोज अहसास commented on मनोज अहसास's blog post अहसास की ग़ज़ल:मनोज अहसास
"बहुत बहुत आभार आदरणीय वर्मा जी सादर"
Feb 14
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-160
"आ. भाई अजय जी, सादर अभिवादन। दोहों पर उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए आभार।"
Feb 11

© 2024   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service