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Md. Anis arman
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सालिक गणवीर commented on Md. Anis arman's blog post ग़ज़ल
"भाई अनीस अरमान जी आदाब बहुत उम्दः ग़ज़ल कही है आपने. बधाइयाँँ स्वीकार करें."
15 hours ago
Md. Anis arman posted a blog post

ग़ज़ल

12122, 121221)वो मिलने आता मगर बिज़ी थामैं मिलने जाता मगर बिज़ी था2)था इश्क़ तुझसे मुझे भी यारा तुझे बताता मगर बिज़ी था3)वो कह रहा था मदद को तेरी ज़रूर आता मगर बिज़ी था4)मैं दूसरों की तरह जहाँ में बहुत कमाता मगर बिज़ी था5)वो चाहती थी मना लूँ उसको है सच मनाता मगर बिज़ी था6)फ़लक से तेरे लिए यक़ीनन मैं चाँद लाता मगर बिज़ी था7) जो साज़ छेड़ा था मेरे दिल ने वो गुनगुनाता मगर बिज़ी थामौलिक अप्रकाशित (अनीस अरमान )See More
yesterday
Md. Anis arman commented on Md. Anis arman's blog post ग़ज़ल
"जनाब लक्ष्मण धामी साहब ग़ज़ल तक आने के लिए बहुत बहुत शुक्रिया "
yesterday
Md. Anis arman commented on Md. Anis arman's blog post ग़ज़ल
"जनाब समर कबीर साहब ग़ज़ल तक आने और अपनी प्रतिक्रिया देने के लिए बहुत बहुत शुक्रिया "
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Md. Anis arman's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई अनीस जी, अच्छी गजल हुई है । हार्दिक बधाई।"
Wednesday
Samar kabeer commented on Md. Anis arman's blog post ग़ज़ल
"जनाब अनीस अरमान जी आदाब, ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है, बधाई स्वीकार करें ।"
Wednesday
Md. Anis arman commented on Md. Anis arman's blog post ग़ज़ल
"चेतन प्रकाश जी ग़ज़ल तक आने और पसंद करने का बहुत बहुत शुक्रिया, आपके सुझाव पर ग़ौर करूँगा "
Tuesday
Md. Anis arman commented on Md. Anis arman's blog post ग़ज़ल
"दीपांजलि दुबे जी ग़ज़ल तक आने और पसंद करने के लिए  बहुत बहुत शुक्रिया "
Tuesday
Chetan Prakash commented on Md. Anis arman's blog post ग़ज़ल
"आदाब, अनीस अमान  कुल ग़ज़ल  अच्छी हुई है, सिवाय,  " वो दुश्मनों  की सबों में हैं और मुकाबिल  हैं",  देखिए   हैं" का दोहराव  हो  रहा  है ! सादर  !"
Monday
Deepanjali Dubey commented on Md. Anis arman's blog post ग़ज़ल
"बेहतरीन ग़ज़ल आदरणीय खूबसूरत अशआर"
Jul 19
Md. Anis arman posted a blog post

ग़ज़ल

1212, 1122, 1212, 221)वो ऐसे लोग जो दुनिया से तेरी ग़ाफ़िल हैं मेरी नज़र में वही आज सबसे आक़िल हैं2)ये उसके सामने इक़रार करना चाहता हूँ रक़ीब सारे मेरी जान मुझसे क़ाबिल हैं3) हमारे मुल्क में है मसअला यही इक बस पढ़े लिखे भी बहुत से यहाँ के जाहिल हैं4)हकीम बेबसी मँहगी दवा सियासतदाँ यही हैं वो जो मेरी ज़िन्दगी के क़ातिल हैं5)मैं जिनके वास्ते दुनिया से लड़ने निकला हूँ वो दुश्मनो की सफ़ो में हैं और मुक़ाबिल हैं6)"अनीस " क्या दें हम इल्ज़ाम इस ज़माने को हम इस के साथ तबाही में अपनी शामिल हैंमौलिक अप्रकाशित (अनीस…See More
Jul 18
Md. Anis arman commented on Md. Anis arman's blog post ग़ज़ल
"जनाब अमीरुद्दीन अमीर साहब ग़ज़ल तक आने के लिए और इतने ध्यान से पढ़ने के लिए बहुत बहुत शुक्रिया "
Jul 18
Md. Anis arman commented on Md. Anis arman's blog post ग़ज़ल
"जनाब समर कबीर साहब ग़ज़ल तक आने के लिए बहुत बहुत शुक्रिया "
Jul 18
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Md. Anis arman's blog post ग़ज़ल
"जनाब अनीस 'अरमान' साहिब आदाब, अच्छी ग़ज़ल हुई है मुबारकबाद पेश करता हूँ। शे'र के बोल्ड शब्दों को देखें- 7)मजनूँ के जैसा हूँ मैं बोलेंगे सारे पत्थर फ़रहाद सा है ये जू //ए शीर बोल उठेगी इस शे'र में शुतरगुर्बा दोष का ज़हूर मालूम होता…"
Jul 17
Samar kabeer commented on Md. Anis arman's blog post ग़ज़ल
"जनाब अनीस अरमान जी आदाब, अच्छी ग़ज़ल हुई है, दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ ।"
Jul 17
Samar kabeer commented on Md. Anis arman's blog post ग़ज़ल
"जनाब अनीस अरमान जी आदाब, अच्छी ग़ज़ल हुई है, बधाई स्वीकार करें ।"
Jul 17

Profile Information

Gender
Male
City State
sakti chhattisgarh
Native Place
sakti
Profession
business
About me
i m simple man

Md. Anis arman's Blog

ग़ज़ल

12122, 12122



1)वो मिलने आता मगर बिज़ी था

मैं मिलने जाता मगर बिज़ी था

2)था इश्क़ तुझसे मुझे भी यारा

तुझे बताता मगर बिज़ी था

3)वो कह रहा था मदद को तेरी

ज़रूर आता मगर बिज़ी था

4)मैं दूसरों की तरह जहाँ में

बहुत कमाता मगर बिज़ी था

5)वो चाहती थी मना लूँ उसको

है सच मनाता मगर बिज़ी था

6)फ़लक से तेरे लिए यक़ीनन

मैं चाँद लाता मगर बिज़ी…

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Posted on July 23, 2021 at 8:07pm — 1 Comment

ग़ज़ल

1212, 1122, 1212, 22

1)वो ऐसे लोग जो दुनिया से तेरी ग़ाफ़िल हैं

मेरी नज़र में वही आज सबसे आक़िल हैं

2)ये उसके सामने इक़रार करना चाहता हूँ

रक़ीब सारे मेरी जान मुझसे क़ाबिल हैं

3) हमारे मुल्क में है मसअला यही इक बस

पढ़े लिखे भी बहुत से यहाँ के जाहिल हैं

4)हकीम बेबसी मँहगी दवा सियासतदाँ

यही हैं वो जो मेरी ज़िन्दगी के क़ातिल हैं

5)मैं जिनके वास्ते दुनिया से लड़ने निकला हूँ …

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Posted on July 18, 2021 at 8:00pm — 8 Comments

ग़ज़ल

221, 2122, 221, 2122

1)इन आँसुओं की इक दिन तासीर बोल उठेगी

ग़म देख मेरा तेरी तस्वीर बोल उठेगी

2)जो हाल -ए -दिल हम अपना लिख दें कभी क़लम से

रोने लगेगा काग़ज़ तहरीर बोल उठेगी

3)ईमान पुख़्ता रख और हिम्मत से काम ले तू

फिर देख कैसे तेरी तक़दीर बोल उठेगी

4)पूछोगे प्यार से तुम जब हाल- ए- दिल हमारा

हर ज़ख़्म जी उठेगा हर पीर बोल उठेगी

5) इतना ग़लत भी मत कर ये इल्तिजा है तुझसे

वर्ना तू देख…

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Posted on July 15, 2021 at 10:50am — 4 Comments

ग़ज़ल

1212, 1122, 1212, 22



1)तेरे जमाल के मारों से गुफ़्तगू की है

तमाम रात सितारों से गुफ़्तगू की है

2)है तेरे हुस्न से ख़तरे में हर चमन का वजूद

गुलों ने डर के बहारों से गुफ़्तगू की है

3)उदास टूटे मेरे दिल ने आज सारी रात

मेरे मकाँ की दरारों से गुफ़्तगू की है

4) मुदावा हो गया मेरे सभी ग़मों का आज

ज़माने बाद जो यारों से गुफ़्तगू की है

5)मिला नहीं है हमें अब तलक कोई तुमसा

जहाँ में हमने हज़ारों से गुफ़्तगू की…

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Posted on July 11, 2021 at 1:00pm — 3 Comments

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At 12:34pm on August 24, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय अनीस शैख़ जी आदाब , बहुत बहुत शुक्रिया!
दण्डपाणि नाहक
At 8:34pm on July 27, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय मो. अनीस शैख़ जी आदाब, हौसला बढ़ाने के लिए बहुत बहुत शुक्रिया !
At 7:48am on June 29, 2019, dandpani nahak said…
बहुत शुक्रिया आदरणीय अनिस शेख जी
At 10:33am on May 26, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय मोहम्मद अनीस शेख साहब आदाब हौसला अफजाई का बहुत शुक्रिया
At 12:29pm on March 22, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय मोहम्मद अनीस शेख साहब आदाब
बहुत शुक्रिया हौसला बढ़ने का
At 11:44pm on February 23, 2019, dandpani nahak said…
बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय
At 8:06am on January 27, 2019, dandpani nahak said…
बहुत शुक्रिया आदरणीय
 
 
 

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