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अहसास की ग़ज़ल : मनोज अहसास

1222    1222    122

खबर झूठी उड़ाना चाहता हूँ,
तेरी यादें छुपाना चाहता हूँ।

तुम्हारे पास थोड़ा वक्त हो तो,
मैं हाले दिल सुनाना चाहता हूँ।

रकीबों की गली में आ गया हूँ,
तेरे घर में ठिकाना चाहता हूँ।

जो मेरी जान के दुश्मन बने हैं,
उन्हीं के हाथ आना चाहता हूँ।

बवंडर क्यों उठा है सरहदों पर,
मैं सबको सच बताना चाहता हूँ।

सियासत ,घर के झगड़े, दिल की बातें
मैं सब से दूर जाना चाहता हूँ।

अदब भी बेअदब अब हो गया है,
ग़ज़ल का दिल बचाना चाहता हूँ।

मौलिक और अप्रकाशित

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Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on July 13, 2021 at 9:18am

आ. भाई मनोज जी ,अच्छी गजल हुई है । हार्दिक बधाई।

Comment by Rahul Dangi Panchal on July 9, 2021 at 9:04pm

सुन्दर 

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