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होली के रंगों से फिर क्यों - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' (गजल)

२२२२/२२२२/२२२२/२२२


जो दुनिया से तन्हा लड़कर प्यार बचाया करते हैं
वो ही  सच्चे  अर्थों  में   सन्सार  बचाया  करते हैं।१।
**
उन लोगों से ही तो  कायम  हर शय की ये रंगत है
जो पत्थर दिल दुनिया में जलधार बचाया करते हैं।२।
**
तुम तो अपने सुख की खातिर खून को पानी करते हो
हम राख  की  ढेरी  में  देखो  अंगार  बचाया  करते हैं।३।
**
जो कहते हैं हम तो डूबे प्यार के रंगो में जीवनभर
होली के रंगों से फिर क्यों रुख़शार बचाया करते हैं।४।
**
दिल को तजकर जो चहरे की खातिरदारी ठान रहे
केेेवल वो तो इस तन का व्यापार बचाया  करते हैं।५।
**
नन्हीं कलियाँ हरदिन यूँ ही अब तो मसली जायेंगी
आज के माली फूलों  से बढ़ खार बचाया करते हैं।६।
**
वो भी दीमक के वंशज  हैं  हमने  इतना जाना बस
आधारों से  जो  बढ़-चढ़  आभार  बचाया करते हैं।७।
**
अधरों पर जिनके रहती है हद से बढ़कर जन सेवा
वो जनता के हित  से  बढ़  दरवार बचाया करते हैं।८।
**
( १७फरवरी)
मौलिक.अप्रकाशित
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

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Comment

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Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on March 11, 2020 at 7:37pm

आ. भाई रवि जी, सादर अभिवादन । गजल पर उपस्थिति और सराहना के लिए हार्दिक धन्यवाद ।

Comment by Samar kabeer on March 6, 2020 at 12:04pm

//होली के रंगों से फिर क्यों बचाया करते हैं//

इस मिसरे में अभी 'रुख़शार' ही

लिखा है,इसे "रुख़सार'' कर लें,बाक़ी मिसरे ठीक हो गए हैं ।

Comment by रवि भसीन 'शाहिद' on March 6, 2020 at 10:35am

आदरणीय लक्ष्मण भाई, इस सुंदर रचना पर आपको बधाई, और होली की अग्रिम शुभकामनाएँ।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on March 6, 2020 at 8:37am

आ. भाई समर जी, सादर अभिवादन , गजल पर उपस्थिति, सराहना और कमियों की ओर ध्यान दिलाने के लिए आभार । इंगित मिसरों को ठीक कर लिया है देखिएगा ।

Comment by Samar kabeer on March 5, 2020 at 6:20pm
जनाब लक्ष्मण धामी 'मुसाफ़िर' जी आदाब, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास हुआ है, बधाई स्वीकार करें ।

'होली के रंगों से फिर क्यों रुखशार बचाया करते हैं'
इस मिसरे में 'रुखशार' को "रुख़सार" कर लें ।

'यारो वो तो केवल तन का व्यापार बचाया करते हैं'
इस मिसरे की बह्र चेक करें ।

'आधारों से जो बढ़-चढ़कर आभार बचाया करते हैं'
इस मिसरे की बह्र चेक करें ।

अधरों पर जिनके रहती है हद से बढ़कर जन सेवा
वो जनता के हित से जादा दरवार बचाया करते हैं'
इस शैर के सानी मिसरे की बह्र चेक करें ।

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