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5 क्षणिकाएं :

१ 

रात 

रोज मरती है

अपने दोस्त 

दिन के 

इंतज़ार में 

................

२ 

तपते सागर का 

दर्द 

लाते हैं मेघ 

भीग जाती हैं 

वसुधा 

...................

३ 

नैनालिंगन 

मौन अभिनन्दन 

अधर समर्पण 

....................

४ 

ज़िद पर आ जाये 

तो 

पाषाणों को चीर 

खिलखिलाये 

नीर 

..................

५ 

गंध 

प्रेमासक्ति की 

शक्लविहीन होती है 

मगर 

हर पल 

होती है

महसूस 

एकांत पलों में 

सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment

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Comment by Sushil Sarna on July 1, 2018 at 4:11pm

आदरणीय समर कबीर साहिब, आदाब ... सृजन आपकी मधुर प्रशंसा का आभारी है।

Comment by Sushil Sarna on July 1, 2018 at 4:09pm

आदरणीय  बृजेश कुमार 'ब्रज'जी सृजन आप की स्नेहिल प्रशंसा का दिल से आभारी है ।

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on June 30, 2018 at 1:48pm

सुन्दर भावों से ओतप्रोत क्षणिकाएं...

Comment by Samar kabeer on June 29, 2018 at 10:10pm

जनाब सुशील सरना जी आदाब,बहुत उम्दा क्षणिकाएँ लिखी हैं आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

कृपया ध्यान दे...

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