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सुप्रभात दोहे 2.

सुबह सुहानी आ गई  ,लेकर शुभ सौगात |
अधर पर मुस्कान लिए, प्यार बसे दिन रात||

पूरे हों सपने सभी ,रहो न उनसे दूर |
गम का ना हो सामना ,ख़ुशी मिले भरपूर||

तारे सारे छुप गए ,आई प्यारी भोर |
आँगन खुशिओं से भरे ,मनवा नाचे मोर||

सुखद सन्देश जो मिले ,अधर आय मुस्कान| 
खुशिओं से हो वास्ता ,मिले हमेशा मान||

पुष्प सी मुस्कान लिए ,रहो हमेशा पास |
होना ना उदास कभी क्योंकि आप हो ख़ास||

रविवार का दिवस अभी ,करलो आज विश्राम| 
बाकी कल सब देखना,रह गय हैं जो काम||

रविवार का दिवस गया, छोड़ो अभी विश्राम| 
पूरे करलो अब सभी, छूट गए जो काम||

भोर सुहानी दे गई ,खुशिओं का पैगाम |
हर दिन ही लाये ख़ुशी ,करलो ऐसे काम ||

         ...........मौलिक व अप्रकाशित ...............

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Comment

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Comment by coontee mukerji on July 5, 2013 at 8:45pm

बहुत सुंदर प्रस्तुति.

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on July 5, 2013 at 7:53pm
आदरणीया..सरिता जी, बिल्कुल सुबह की तरह सुप्रभात दोहे की सुंदरता व सहजता.."".तारे सारेछुप गए ,आई प्यारीभोर | आँगन खुशिओं से भरे ,मनवा नाचे मोर||

सुखदसन्देश जो मिले ,अधरआय मुस्कान| खुशिओं से होवास्ता ,मिले हमेशा मान||

पुष्प सी मुस्कान लिए ,रहो हमेशापास | होना ना उदास कभी क्योंकि आप होभा ख़ास||"".....आदरणीया..भावपूर्ण रचना के लिए हार्दिक बधाई
Comment by बृजेश नीरज on July 5, 2013 at 6:35pm

आपके इस प्रयास पर आपको ढेरों बधाइयां। सादर!


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on July 5, 2013 at 5:32pm

प्रिय  सरिता जी वाह बहुत सुन्दर भाव पूर्ण दोहों पर प्रयास किया है  बाकी प्रिय प्राची जी के कहने के बाद कुछ नहीं रह जाता कहने के लिए ,बहुत बहुत बधाई स्वीकारें 

Comment by Sarita Bhatia on July 5, 2013 at 10:21am

आदरणीय रविकर जी बहुत खूब शुक्रिया sir आपका 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on July 5, 2013 at 10:10am

आ० सरिता भाटिया जी 

बहुत सुन्दर सुकोमल भाव संजोये सुप्रभात के सुन्दर दोहों के लिए बहुत बहुत बधाई 

आपने दोहा छंद के शिल्प का निर्वहन करने का अच्छा प्रयत्न किया है, किन्तु निम्न दोहों पर गौर कीजिये 

सुखद सन्देश जो मिले ,अधर आय मुस्कान|..विषम चरण में गेयता बाधित है इसे यदि (सुखद मिले सन्देश जो)ऐसे किया जाए तो?
खुशिओं से हो वास्ता ,मिले हमेशा मान||.....वास्ता(२२)...विषम चरण का अंत सदैव १२ या १११ से ही किया जाता  है 

रविवार का दिवस अभी ,करलो आज विश्राम|..... विश्राम की गणना =(वि+आधा श् =२)+(रा =२)+(म=१)=५ होगी, आपने इसे ४गिना है...संयुक्त अक्षरों की मात्रा गणना करते वक्त संयुक्त अक्षर से पहले वाले वर्णाक्षर में आधा संयुक्ताक्षर जोड़ दिया जाता है.
बाकी कल सब देखना,रह गय हैं जो काम||

प्रयासरत रहें, गेयता और गणना सभी धीरे धीरे सधते जायेंगे 

बहराल यह बहुत सुंदर प्रयास हुआ है , आपको बहुत बहुत शुभकामनाएं 

सादर

Comment by रविकर on July 5, 2013 at 8:31am

यह परिवर्तन कैसा है आदरेया ?

क्या आदरणीय अजय जी संतुष्ट हैं-

सुबह सुहानी आ गई, लेकर शुभ सौगात |
अधरों पर मुस्कान धर, प्यार बसे दिन रात||

पूरे हों सपने सभी , मत रह उनसे दूर |
गम का ना हो सामना ,ख़ुशी मिले भरपूर||

तारे सारे छुप गए , आई प्यारी भोर |
आँगन खुशियों से भरे, मनवा नाचे मोर||

सुखद मिले सन्देश जो, अधर आय मुस्कान|
खुशिओं से हो वास्ता ,मिले हमेशा मान ||

लिए पुष्प-मुस्कान शुभ, रहो हमेशा पास |

मत उदास होना सखी , हो तुम बेहद ख़ास ||

दिवस आज रविवार का, करो मित्र विश्राम|
बाकी कल सब देखना, बचे रहे जो काम||

बीत चुका रविवार जब, त्याग तुरत विश्राम|
पूरे करलो अब सभी, छूट गए जो काम||
भोर सुहानी दे गई ,खुशिओं का पैगाम |
हर दिन ही लाये ख़ुशी ,करलो ऐसे काम ||

Comment by Sarita Bhatia on July 4, 2013 at 11:33pm

आदरणीय रविकर sir ,हार्दिक आभार 

Comment by Sarita Bhatia on July 4, 2013 at 11:33pm

नमस्कार आदरणीय अजय शर्मा जी 

आपने ज्यादा जो शब्द सुझाये हैं वोह मात्रा गणना को बिगाड़ रहे हैं 

आपने समय दिया इसके लिए शुक्रिया sir 

Comment by ajay sharma on July 4, 2013 at 10:35pm

सुबह सुहानी आ गई  ,लेकर शुभ सौगात |
अधर पर मुस्कान लिए, प्यार बसे दिन रात||       "adharo pe muskan liye" could be more rythemic 

पूरे हों सपने सभी ,रहो न उनसे दूर |
गम का ना हो सामना ,ख़ुशी मिले भरपूर||

तारे सारे छुप गए ,आई प्यारी भोर |
आँगन खुशिओं से भरे ,मनवा नाचे मोर||        " aangan bhar khushiya,n mile" in my opinion  

सुखद सन्देश जो मिले ,अधर आय मुस्कान|     sukhad sandesh"a" jo mile 
खुशिओं से हो वास्ता ,मिले हमेशा मान||

पुष्प सी मुस्कान लिए ,रहो हमेशा पास |          "phulo,n ki muskan liye" 
होना ना उदास कभी क्योंकि आप हो ख़ास||         hona kabhi udaas mat kyonki tum ho khas ------tum ka priyog zyada        

                                                             apnatva padarshit karta hai    

रविवार का दिवस अभी ,करलो आज विश्राम|     ravivaar ka divas hai kar lo tum vishram 
बाकी कल सब देखना,रह गय हैं जो काम||         baaki kal sab dhekhna , rah jaye jo kaam 

भोर सुहानी दे गई ,खुशिओं का पैगाम |    

हर दिन ही लाये ख़ुशी ,करलो ऐसे काम ||     wah wah wah

         ...........मौलिक व अप्रकाशित ...............

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