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सुप्रभात दोहे 1.

सुप्रभात दोहों से मैं, करती हूँ आगाज |
अधर पर मुस्कान लिए,सरिता बोले आज||

नई सवेर ले आए ,रोज सुखद सन्देश |
पूरी हो हर कामना ,संकट हरे गणेश||

आये कोई विघ्न ना ,सर पर रखना हाथ|
पूरी करना कामना ,हे नाथों के नाथ||

चूम उठाया भोर ने ,ख़ुशी से झूमा दिल| 
सुबह संदेश आपका ,गया जैसे ही मिल||

बन जायेंगे आपके, सारे बिगड़े काम |
थके बिन बढते रहना, मन में धारे राम||

सुबह सुहानी ले आई बरसात की फुहार |
हर कामना पूरण हो खुशियाँ मिलें अपार||


..........मौलिक व अप्रकाशित ..........

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Comment

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Comment by Ashok Kumar Raktale on July 10, 2013 at 8:16pm

आये कोई विघ्न ना ,सर पर रखना हाथ|
पूरी करना कामना ,हे नाथों के नाथ||.................सुन्दर दोहा छंद.

Comment by बृजेश नीरज on July 4, 2013 at 10:08pm

भाव बहुत सुन्दर हैं। इस प्रयास पर मेरी बधाई स्वीकारें!
सादर!

Comment by Sarita Bhatia on July 4, 2013 at 1:33pm

आदरणीय गुरुवर अरुण जी बहुत बहुत हार्दिक आभार आपने मेरे लिए समय निकाला ,मुझे सुधार के लिए कहा  

दो  जगह तो मुझे पता था गलती है 

और गलतियों की तरफ ध्यान दिलाने के लिए हार्दिक आभार 

सौरभ sir आपने ठीक कहा 

अब मुझे लगने लगा है कि obo पर मेरा आना सफल हो रहा है ,कृपया निसंकोच गलती निकालें |


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on July 4, 2013 at 11:46am

आदरणीया सरिता जी, आपकी प्रस्तुति के लए बधाई. लेकिन छंदगत प्रस्तुतियों के पूर्व प्रयुक्त छंद के विधान को न जानना रचनाकर्म में हुए प्रयास और लगे समय दोनों की बरबादी होती है.

आदरणीय अरुण भाई जी ने बेहतर सुझाव दिये हैं. ये सुझाव दोहा छंद के मूल नियमों की ओर इंगित करते हैं. आप उन्हें मानें.  आप ओबीओ के भारतीय छंद विधान समूह में दोहा छंद पर उपलब्ध लेख भी देख जायँ. रचनाकर्म में बहुत सहुलियत होगी.

शुभेच्छाएँ

Comment by D P Mathur on July 4, 2013 at 7:56am

आदरणीया सरिता जी, सुप्रभात पर अच्छे दोहे, बधाई.

Comment by vandana on July 4, 2013 at 7:36am

बहुत सुन्दर भाव 

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on July 3, 2013 at 10:49pm
आदरणीया..सरिता जी, सुंदर रचना प्रस्तुति पर आपको बधाई

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by अरुण कुमार निगम on July 3, 2013 at 8:42pm

आदरणीया सरिता भाटिया जी, दोहा छंद पर सुंदर प्रयास हुआ है.बधाई......

कहीं कहीं पर ध्यानाकर्षण चाहूंगा ,यथा....

सुप्रभात दोहों से मैं, करती हूँ आगाज |
अधर पर मुस्कान लिए,सरिता बोले आज||

विषम चरण (दोहों से मैं) के अंत में दीर्घ,लघु,दीर्घ या लघु, लघु लघु  या लघु ,दीर्घ आना  चाहिए | सामान्यत: अधरों पर मुस्कान कहा जाता है .यदि अधरों पर मुस्कान धर कहा जाये तो कैसा रहेगा ?

नई सवेर ले आए ,रोज सुखद सन्देश |
पूरी हो हर कामना ,संकट हरे गणेश||

उपरोक्तानुसार विषम चरण के अंत में "ले आए" पर गौर करें,

चूम उठाया भोर ने ,ख़ुशी से झूमा दिल|
सुबह संदेश आपका ,गया जैसे ही मिल||

सम चरण के अंत में "दीर्घ, लघु" अनिवार्य होता है. दिल व मिल में लघु ,लघु आ रहा है.

बन जायेंगे आपके, सारे बिगड़े काम |
थके बिन बढते रहना, मन में धारे राम||

थके बिन बढते रहना में प्रवाह को देख लीजिए. बिना थके बढ़ते रहें भी किया जा सकता है ?

सुबह सुहानी ले आई बरसात की फुहार |
हर कामना पूरण हो खुशियाँ मिलें अपार||

सुबह सुहानी ले आई में एक तो 14 मात्रायें हैं .दूसरा विषम चरण के अंत में दीर्घ, दीर्घ आ रहा है, बरसात की फुहार में प्रवाह बाधित हो रहा है. हर कामना पूरण हो में भी प्रवाह में रुकावट लग रही है, कृपया देख लें. इन्हीं भावों को क्या ऐसे भी व्यक्त किया जा सकता है ?

सुबह सुहानी आ गई, लेकर मस्त फुहार

पूरी हो हर कामना,खुशियाँ मिलें हजार.

Comment by बसंत नेमा on July 3, 2013 at 5:07pm

आदरणीया सरिता जी .....

नई सवेर ले आए ,रोज सुखद सन्देश |
पूरी हो हर कामना ,संकट हरे गणेश| .................. |बहुत सुन्दर दोहे ............शुभकामनाये 

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