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February 2011 Blog Posts (126)

मेरी दुनिया...

कभी मेरी नज़रों से देखो ,

तब तुम समझोगी शायद ,
कि मेरी दुनिया कितनी हसीन है......
 
बड़ी- बड़ी खिड़कियाँ नहीं हैं ,
पर, एक झरोखा है लटका हुआ 
जिससे हर सवेरे सूरज मुझे आवाज़ लगाता है....
 
कुछ खट्टी- मीठी , चटपटी -सी यादें हैं
जीरा बट्टी की गोलियों -सी
चखते ही आँखों से पानी टपक पड़ता है.....
 
घर में सामान कम है
क्यूंकि जगह नहीं है खाली
सपने…
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Added by Veerendra Jain on February 28, 2011 at 11:30pm — 13 Comments

भूले से भी नहीं !!!



तुम मुझसे ज़िन्दगी के गीत सुनना चाहते हो
चाहते हो मैं सबकुछ भूलकर सहज हो जाऊँ
हंसाऊं ... एक गुनगुनाती शाम ले आऊं ...
तुम्हें पता है
ज़िन्दगी मेरे पास है
गुनगुनाती लहरें…
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Added by rashmi prabha on February 28, 2011 at 7:30pm — 18 Comments

मेरे मन के गलियारे में

वो क्या है जो मेरे मन के गलियारे में
खिलखिलाती हुई
मंडराती हुई तितली सी
कभी टिमटिमाती
कभी ओझल हो जाती
वो रौशनी सी
जिसके करीब हँसते मुस्कुराते
जीवन एक नृत्य लगे
वो कोमल सी पंखुड़ी
हवा के साथ उड़ती
मेरे चहरे पे बरस पड़ी
सब ठहर गया
गर्म सांसों को
मंजिल मिल गयी 
सब भुज गया
हम जल उठे
मेरे मन के गलियारे में..

Added by Bhasker Agrawal on February 28, 2011 at 12:36am — 7 Comments

चक्र..

चक्र..

चैन और बेचैन का, चक्र चले दिन रात,

सुख दुःख के ही भोग में, यह आयी बारात.…

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Added by R N Tiwari on February 27, 2011 at 8:30pm — 7 Comments

ग़ज़ल :- और कुछ इत्मीनान है बाकी

ग़ज़ल :- और कुछ इत्मीनान है बाकी…

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Added by Abhinav Arun on February 27, 2011 at 7:00pm — 4 Comments

विश्वास

पराजय कभी इतनी बड़ी नही होती कि ,

आदमी का मनोबल छीन ले जाये ...

हमेशा नए ख्वाब देखो

नक्षत्रों पर भरोसा रखो

कभी भी ' तथास्तु ' कह सकते हैं ...

इस विश्वास से ये सबक सीखो

बुरी बात कभी मुँह से मत निकालो .

बहुत दबे पाँव चलना होता है

मुसीबतें रास्ता रोके खड़ी होती हैं ,

लक्ष्य - भेद उम्र भर का मसला होता है ......

सारथी का चयन भी…
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Added by rashmi prabha on February 27, 2011 at 4:00pm — 10 Comments

एक ग़ज़ल

ख़त आता था ख़त जाता था
बहुत अनकही कह जाता था
 
बूढ़े बरगद की छाया में 
पूरा कुनबा रह जाता था
 
झगडा मनमुटाव ताने सब 
इक आंसू में बह जाता था
 
कहे सुने को कौन पालता
जो कहना हो कह जाता था
 
तन की मन की सब बीमारी 
माँ का आँचल सह जाता था
 
कई दिनों का बोल अबोला 
मुस्काते ही ढह जाता…
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Added by ASHVANI KUMAR SHARMA on February 27, 2011 at 1:00pm — 5 Comments


सदस्य टीम प्रबंधन
बह्र पहचानिये- 5

 ओ. बी. ओ. परिवार के सम्मानित सदस्यों को सहर्ष सूचित किया जाता है की इस ब्लॉग के जरिये बह्र को सीखने समझने का नव प्रयास किया जा रहा है| इस ब्लॉग के अंतर्गत सप्ताह के प्रत्येक रविवार को प्रातःएक गीत के बोल अथवा गज़ल दी जायेगी, उपलब्ध हुआ तो वीडियो भी लगाया जायेगा, आपको उस गीत अथवा गज़ल की बह्र को पहचानना है और कमेन्ट करना है अगर हो सके तो और जानकारी भी देनी है, यदि उसी बहर पर कोई दूसरा गीत/ग़ज़ल मिले तो वह भी बता सकते है। पाठक एक दुसरे के कमेन्ट से प्रभावित न हो सकें…

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Added by Rana Pratap Singh on February 27, 2011 at 10:30am — 1 Comment

अहमद चाचा

लन्दन के हीथ्रो एअरपोर्ट से जैसे ही विमान ने उड़ान भरी, श्याम का दिल बल्लियों उछलने लगा. बचपन की स्मृतियाँ एक-एक कर मानस पटल पर उभरने लगीं और जैसे-जैसे विमान आसमान की ऊँचाई की ओर बढ़ता गया, वह आस-पास के वातावरण से बेसुध अतीत में मग्न होता चला गया. माँ की ममता, पिताजी का प्यार, मित्रों के साथ मिलकर धमाचौकड़ी करना, गाँव के खेल, नदी का रेता, हरे-भरे खेत, अनाजों से भरे खलिहान और वहां कार्यरत लोगों की अथक उमंग, तीज त्यौहार की चहल-पहल आदि ह्रदय को रससिक्त करते गए.



गाँव के खेलों की बात ही… Continue

Added by Rajesh Mishra on February 27, 2011 at 5:19am — No Comments

मास्क वाले चेहरे

मैं अक्सर निकल जाता हूँ भीडभाड गलियों से

रौशनी से जगमग दुकाने मुझे परेशान करती हैं

मुझे परेशां करती है उन लोगों की बकबक

जो बोलना नहीं जानते

 

मै भीड़ नहीं बनना चाहता बाज़ार का

मैं ग्लैमर का चापलूस भी नहीं बनना चाहता

मुझे पसंद नहीं विस्फोटक ठहाके

मै दूर रहता हूँ पहले से तय फैसलों से

 

क्योंकि एकदिन गुजरा था मै भी लोगों के चहेते रास्ते से

और यह देखकर ठगा रह गया की

मेरा पसंदीदा व्यक्ति बदल चूका था

बदल चुकी थी उसकी…

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Added by Akhileshwar Pandey on February 27, 2011 at 1:28am — 3 Comments

ghazal

सपने सब रंगीं ऊंची दूकानों में 
सच्चाई बसती है फीके पकवानों में
 
हम ने तो समझा था घर के ही हम भी 
गिनती करवा बैठे लेकिन मेहमानों में
 
बस्ती को साँपों ने सूंघा हो जैसे कि
शंखनाद जारी है लेकिन शमशानों में
 
ज़न्नत कि बातें अब सोचें तो क्या सोचें
रोटी तक शामिल है अपने अरमानों में
 
अपना ये होना भी होने में होना है
'होने' को गिनते वो अपने…
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Added by ASHVANI KUMAR SHARMA on February 26, 2011 at 10:52pm — 3 Comments

आप तो आप थे ........."

आप तो आप थे .........



है दिए जो जख्म आपने दिल को,

भर दे उसे कोई किसी में है ओ प्रीत कहाँ,

बहते मेरे लावारिस अश्को को कोई थामले,

 एक तेरे सिवा दूसरा ओ मन्मित कहाँ, 

आप ने  किये जो घोर अँधेरा मेरे जीवन में,

आक़े अब कोई रोशन करे  है यैसी तक़दीर कहाँ,

जब ह्रदय की आशाएं बंद हो चली…

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Added by Sanjay Rajendraprasad Yadav on February 26, 2011 at 7:00pm — 2 Comments

प्रीतम की गली.........

प्रीतम की गली.........

हर किसी के ज़िन्दगी में बसता है किसी के ख्वाबो का कारवां,

दूरियाँ मित जाती है मीट जाते है सारे शिकवे गीले,

हर किसी के धड़कन में होती है किसी की मुहब्बत जवां,

चाहतो का सैलाब लिए जब दो बदन हो एक मीले,

अपने प्रियवर के ख्वाब,को रोशन करे ऐ दिल की समां

उड़ चला जाता है ये मन इस दुनिया से दूर बहुत,

जहां प्रिय मिलन के मदहोश…

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Added by Sanjay Rajendraprasad Yadav on February 26, 2011 at 6:30pm — 2 Comments

कविता :- छोड़ दूं सच साथ तेरा

कविता :-  छोड़ दूं सच साथ तेरा

हर अनुभव हर चोट के बाद

अक्सर ऐसा सोचता हूँ

छोड़ दूं सच साथ तेरा

चल पडूँ ज़माने की राह

जो चिकनी है और दूर  तक जाती है

जिस राह पर चलकर

किसी को शायद नहीं रहेगी

शिकायत मुझसे

अच्छा…

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Added by Abhinav Arun on February 26, 2011 at 1:30pm — 11 Comments

कालेधन के चक्कर में बुरे फंसे योगगुरू

विदेशों में जमा काला ध न को वापस लाने के लिए देश भर में शंखनाद कर भारत स्वाभिमान यात्रा निकालने वाले योग गुरू अर्थात् बाबा… Continue

Added by rajendra kumar on February 25, 2011 at 11:00pm — 1 Comment

एक ग़ज़ल

अब दागों की ही रवायत हो गई
ज़िन्दगी गोया तवायफ हो गई
 
अब वफ़ा ही शूल सी चुभने लगी 
आप की जब से इनायत हो गई 
 
है मुहब्बत कह दिया चौराहे पर 
जाने किस किस से अदावत हो गई
 
जो हुए गाफिल तो भुगतेंगे जनाब 
आप को कैसे शिकायत हो…
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Added by ASHVANI KUMAR SHARMA on February 25, 2011 at 10:00pm — 3 Comments

गज़ल : झूठ से इसको नफरत सी है

गज़ल : झूठ से इसको नफरत सी है

झूठ से इसको नफरत सी है सच्चाई को प्यार कहे ,

मेरा दिल तो जब भी बोले…

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Added by Abhinav Arun on February 25, 2011 at 9:00pm — 5 Comments

लिफ़ाफ़ा

नाम नहीं कोई पता नहीं है....

कोई भी पहचान नहीं है....
जाने किस एक शख्स ने अपने,

सहमें सहमें जज्बातों को,
बंद लिफाफे में रखकर के,

मेरे नाम से लिख भेजा है....
काश के ऐसा कोई लिफाफा

आज से पंद्रह बरसों पहले,
तुमने मुझको भेजा होता...

Added by Sudhir Sharma on February 24, 2011 at 11:30pm — 1 Comment

मौत सच्ची मनमित

मौत सच्ची मनमित

सुनहरे ख्वाब जो दिखाए जिंदगी ने,
है उसका क्या भरोसा  साथ कब तलक निभाएगी !!


है किये जिंदगी ने वादे बहुत,


मौत का वादा है पक्का एक दिन जरुर  आएगी !!



राहे लम्बी…
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Added by Sanjay Rajendraprasad Yadav on February 24, 2011 at 9:38am — 1 Comment

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