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Sheikh Shahzad Usmani
  • Male
  • SHIVPURI M.P.
  • India
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Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-128
"सादर नमस्कार। बहुत-बहुत शुक्रिया रचना पटल पर अमूल्य समय देकर मार्गदर्शक व प्रोत्साहक टिप्पणी हेतु आदरणीय सौरभ पाण्डेय जी। मैंने सातवीं रचना में भी 'उजालों' के उन नकारात्मक रूपों/बहुरूपियों को इंगित करने का प्रयास किया है, जो शब्द…"
Sunday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-128
"भाई आज़ी 'तमाम' जी आपकी पटल पर पाठकीय उपस्थिति ही आपको विधा की.ओर.भी खींच ले जायेगी। प्रोत्साहक प्रतिक्रिया हेतु हार्दिक धन्यवाद आदरणीय।"
Sunday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-128
"चाहतों की ठौर! - [अतुकान्त (दूसरी प्रस्तुति)] : किशोर हो या युवा मनघर-परिवार पर भारीया घर-परिवार उस पर!ज़ाहिर या ग़ैर-ज़ाहिरचाहतों के साथकभी लक्ष्य परतो कभी अनचाहे ही लक्ष्यहीन!चल पड़ता अकेलाकथित या तथाकथित 'उजालों' की ओर!कारवाँ बने, न…"
Sunday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-128
"रचना पटल पर आपका स्वागत है। आपको रचनायें पसंद आयीं। मेरी हौसला अफ़ज़ाई भी हुई। हार्दिक धन्यवाद आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफ़िर' जी।"
Sunday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-128
"रचना पर समय देकर टिप्पणी हेतु शुक्रिया। आपने जो हाइकु पसंद किये, उससे स्वतः प्रमाणित होता है कि छंदबद्ध रचनाओं की सधी लेखनी क्षणिका और हाइकु की भी पारखी है, तो.सृजन भी कर सकती है। हार्दिक धन्यवाद आदरणीया प्रतिभा जोशी  पाण्डेय जी। विसंगति,…"
Sunday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-128
"आदाब। विषयांतर्गत बढ़िया पेशकश हेतु मुबारकबाद जनाब आज़ी 'तमाम' साहिब।"
Sunday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-128
"सादर नमस्कार। विषयांतर्गत बेहतरीन काव्यात्मक भावाव्यक्ति। हार्दिक बधाई मोहतरमा प्रतिभा जोशी पाण्डेय साहिबा। इस बार मैंने भी तात्कालिक ग़ुस्ताख़ सहभागिता की है।"
Sunday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-128
"हाइकु (एक प्रयास प्रतीकों में) : ये अन्तर्जालहै उजालों की ओरचौराहे थामे [1] छात्राभियानकी उजालों की ठोर'नेट' की डोर [2] नाम 'उजाला'ये जाला या वो जालाफँसा के पाला [3] पथ बदलेंवे 'उजालों' के 'मोड़'माया के नाम…"
Sunday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-128
"आदाब। विषयांतर्गत यथार्थ से परिचित कराती, सवालात पेश करती, कड़वी हक़ीकत की ओर इशारे करती बेहतरीन ग़ज़ल के साथ महाउत्सव का आग़ाज़ करने हेतु हार्दिक बधाई जनाब लक्ष्मण धामी 'मुसाफ़िर' साहिब।   माहौल अनलॉक में भी कुछ ठीक नहीं बन पा रहा है।…"
Jun 12
Sheikh Shahzad Usmani commented on Saurabh Pandey's blog post पर्यावरण-दिवस के अवसर पर छ: दोहे // --सौरभ
"आदाब। विशिष्ट संचेतना दिवस पर बहुत सुंदर दोहावली। हार्दिक बधाई आदरणीय सौरभ पाण्डेय जी। /सांत्वना/ में मैं मात्राएँ 2-1-2 समझ पा रहा हूँ और /उदभ्रांत/ 2-2-1। क्या सही समझ सका? एक अन्य इतर जिज्ञासा है  ग्रह /मंगल/  पर। इस शब्द में 2-2 है।…"
Jun 11
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-74 (विषय: अनुभव)
"सादर नमस्कार। बहुत-बहुत शुक्रिया समय देकर टिप्पणी द्वारा अनुमोदन और प्रोत्साहन हेतु आदरणीय ओमप्रकाश क्षत्रिय 'प्रकाश' जी।"
May 31
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-74 (विषय: अनुभव)
"सादर नमस्कार। रचना पटल पर समय देकर मेरी हौसला अफ़जाई हेतु शुक्रिया। यह एक सच्ची घटना है। ख़ुद का अनुभव!"
May 31
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-74 (विषय: अनुभव)
"आदाब। अनुभवों से ही सीख मिलती है और चौकन्ने रहकर सही वक्त पर सही निर्णय लिये जा सकते हैं। विषयांतर्गत महत्वपूर्ण संदेश देती बढ़िया लघुकथा हेतु हार्दिक बधाई आदरणीय विनय कुमार जी।"
May 31
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-74 (विषय: अनुभव)
"आदाब। अनुभव ऐसे ही तो हैं भ्रष्टाचार और घोटालों और पारितोषिक प्रबंधन के। बहुत बढ़िया तंजदार रचना हेतु हार्दिक बधाई आदरणीय चेतन प्रकाश जी। पात्रों के पूरे-पूरे नाम देना मेरे ख़्याल से लघुकथा विधा में ज़रूरी नहीं है।"
May 31
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-74 (विषय: अनुभव)
"सादर नमस्कार। प्रदत्त विषयांतर्गत बेहतरीन तंजदार प्रतीकात्मक लघुकथा हेतु हार्दिक बधाई जनाब मनन कुमार सिंह साहिब। राजा, कौए, पक्षी, आक्रोश की लाठी और आकाश में टँगा घड़ा... इन सब के माध्यम में सांकेतिक कथ्य सम्प्रेषण। "
May 31
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-74 (विषय: अनुभव)
"सादर नमस्कार। इस महत्वपूर्ण गोष्ठी का बढ़िया रचना से आग़ाज़ करने.हेतु हार्दिक बधाई आदरणीया बबीता गुप्ता जी। कहा भी गया है कि 'बोलो कम, सुनो ज़्यादा'। अपने अनुभवों के आधार पर बिन माँगे सलाह देने वाले दोस्त और परिवारजन और अनुभव पर आधारित…"
May 31

Profile Information

Gender
Male
City State
Shivpuri M.P.
Native Place
Shivpuri
Profession
Radio Announcer
About me
A Private School- teacher, Freelancer and a Casual Radio Announcer. Simlple living, high thinking, fond of reading and writing.

Sheikh Shahzad Usmani's Blog

मुंगेरीलाल के वैक्सीन सपने (कहानी) /शेख़ शहज़ाद उस्मानी :

मुंगेरीलाल और कोरोनाकाल... सबके बहुत बुरे हालचाल! लॉकडाउन पर लॉकडाउन... घर में क़ैद सब जॉब डाउन, रोज़गार डाउन! बेचारे मुंगेरीलाल ने अपनी कम्पनी की नौकरी छोड़कर बड़ी मुसीबत कर ली थी सात साल पहले। उनका काम और रुझान दिलचस्प और संतोषजनक था, फ़िर भी सपनों और दिवास्वप्नों में खोये रहने और बड़ी-बड़ी बातें फैंकने के कारण दफ़्तर, घर, बाज़ार और ससुराल सभी जगह लोग उनका मज़ाक उड़ा-उड़ा कर मौज-मस्ती कर लिया करते थे। उन सबकी बातों को मुंगेरीलाल कभी हल्के में, तो कभी बहुत गंभीरता से ले लेते थे।

एक बार…

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Posted on November 12, 2020 at 8:30am — 2 Comments

गार्गी की बार्बी (लघुकथा)/शेख़ शहज़ाद उस्मानी

भगवान देता है, तो छप्पर फाड़ कर देता है। लेता है, तो एक झटके में ले लेता है। देकर ले लेता है, तो हँसाने के बाद रुला-रुला कर। राजन, रंजीता और गंगा का ज़िन्दगीनामा भी यही साबित करता रहा; गार्गी और गार्गी की बार्बी का भी! बार्बी के साथ कब, क्या, कैसे और क्यूँ होगा; बार्बी ने कभी सोचा न था। सोचती भी कैसे? उसकी सोच तो उसकी मम्मी पर निर्भर थी। उसकी मम्मी ने भी तो न सोचा था वह सब। यही हाल गार्गी का था। गार्गी के साथ कब, क्या, कैसे और क्यूँ होगा; गार्गी ने कभी सोचा न था। सोचती भी कैसे? उसकी सोच तो…

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Posted on November 10, 2020 at 8:30am — 4 Comments

दिल के हाल सुने दिलवाला (लघुकथा)

"अपनी पैरों से रौंदें, दूजी जो भा जाये!"



"घर की मुर्ग़ी दाल बराबर; नयी पीढ़ी को कौन समझाये!"



अपनापन त्याग कर ख़ुदग़र्ज़ी, मनमर्ज़ी, दोगलापन, पागलपन, बचकानापन दिखाती अपने मुल्क की नई पीढ़ी की सोच और पलायन-गतिविधियों पर दो बुजुर्गों ने अपनी-अपनी राय यूं ज़ाहिर की।



"... 'ओल्ड इज़ गोल्ड' कहावत को छोड़ो जी; ओल्ड इज़ सोल्ड! नई पीढ़ी है सो बोल्ड! उन्हें ज़मीनी स्टोरीज़ टोल्ड हों या अनटोल्ड! हम बुड्ढे तो हुए क्लीन-बोल्ड!" उनमें से एक ने दूसरे से कहा, लेकिन ख़ुद के…

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Posted on March 10, 2020 at 2:34pm — 4 Comments

हिताय और सुखाय (संस्मरण)

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Posted on November 23, 2019 at 1:00pm — 7 Comments

Comment Wall (13 comments)

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At 12:50am on October 5, 2018, mirza javed baig said…

आली जनाब शहज़ाद उस्मानी साहिब आदाब, 

मुझे अपनी दोस्तों की फ़ेहरिस्त में जोड़ने का शुक्रिया 

At 6:43am on July 2, 2018, राज़ नवादवी said…

"आदरणीय Sheikh Usmani साहब, तरही मुशायरे में मेरी ग़ज़ल में शिरकत का दिल से शुक्रिया. समयाभाव था, कमेंट बॉक्स बंद हो चुका है. इसलिए यहाँ से आभार प्रकट कर रहूँ हूँ.सादर "

At 11:59am on April 12, 2018, MD SHAFIQUE ASHRAF said…

जी बहूत  बहुत शुक्रिया जनाब ... नया हूँ .... थोड़ा सीखने का मौका दीजिये  

At 10:23am on January 8, 2017, Dr Ashutosh Mishra said…
आदरणीय शेख भाई जी आपके मित्रों की सूची में खुद को शामिल पाकर मैं सुखद अनुभूति कर रहा हूँ आपकी लघु कथाएं इस मंच पर मेरे बिशेष आकर्षण का केंद्र है आपकी हर लघु कथा मैं पढता हूँ आपकी कलम सृजन के नए आयाम स्थापित करती रहे ऐसी अपनी शुभकामनाओं के साथ सादर
At 8:23pm on August 5, 2016, pratibha pande said…

आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ  आदरणीय उस्मानी जी  ,आपका रचनाकर्म हर दिन नई बुलंदियां छुएँ ,ये कामना करती हूँ 

At 7:30am on June 20, 2016, सुरेश कुमार 'कल्याण' said…
श्रद्धेय शेख शहजाद उस्मानी साहब ये सब तो आप जैसे मित्रों के सहयोग से ही हुआ है और आशा करता हूं कि भविष्य में भी मेरा मार्गदर्शन करते रहेंगे। हृदय की गहराईयों से धन्यवाद ।
At 8:42am on May 24, 2016, महिमा वर्मा said…

आभार आपका आ.शेख उस्मानी सर जी,अभी जानकारी  पूरी नहीं है ,तो आपको जवाब देने में देर हो गई.पुनः आभार आपका .

At 2:11pm on May 1, 2016, pratibha pande said…

मित्रता के लिए आभार 

At 8:41am on November 18, 2015, pratibha pande said…

हार्दिक आभार आपका आदरणीय 

At 9:27am on November 4, 2015, kanta roy said…

देखी वफ़ा-ए-फ़ुरसत-ए-रंज-ओ-निशात-ए-दहर

ख़मियाज़ा यक दराज़ी-ए-उमर-ए-ख़ुमार था---- 

मिर्ज़ा ग़ालिब साहब का ये शेर आज आपके लिए
असीम शुभकामनाएँ आपको आदरणीय शहजाद जी।

 

 
 
 

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"आ. भाई नीलेश जी, सादर अभिवादन । गजल पर उपस्थिति व स्नेह के लिए आभार।"
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गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post कहता था हम से देश को आया सँभालने-लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"बहुत बढ़िया  सृजन "
23 hours ago
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post कम है-लक्ष्मण धामी "मुसाफिर" (गजल)
"बहुत खूबसूरत "
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"Aazi Tamaam  साहेब आपकी हौसला आफ़जाई के लिए बहुत बहुत शुक्रिया एवं सादर नमन | "
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Aazi Tamaam commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post ज़ुबान कुछ शिकायती भी कीजिए कभी कभी (133 )
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