For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग-1)

साथियों,
"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग -1) अत्यधिक डाटा दबाव के कारण पृष्ठ जम्प आदि की शिकायत प्राप्त हो रही है जिसके कारण "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग -2) तैयार किया गया है, अनुरोध है कि कृपया भाग -1 में केवल टिप्पणियों को पोस्ट करें एवं अपनी ग़ज़ल भाग -2 में पोस्ट करें.....

कृपया मुशायरे सम्बंधित अधिक जानकारी एवं मुशायरा भाग 2 में प्रवेश हेतु नीचे दी गयी लिंक क्लिक करें 

"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग -2)

Views: 22611

Replies are closed for this discussion.

Replies to This Discussion

आद० समर भाई जी आपका बहुत बहुत शुक्रिया ये गज़ल भी सार्थक हुई 

मुहतर्मा राजेश कुमारी साहिबा,

उम्दा पेशकश  बधाई स्वीकारें,,,

आद० अफरोज़ साहब आपका बहुत बहुत शुक्रिया 

आदरणीया राजेश कुमारी जी आदाब,

                        बहुत ही उम्दा ग़ज़ल । एक मुरस्सा ग़ज़ल । दाद के साथ दिली मुबारकबाद कुबूल करें ।

आद० आरिफ जी आपका दिल से बहुत बहुत शुक्रिया 

करके दरिया को पार इक तिनका 
दुनिया दारी सिखा गया है मुझे

क्या कहने हैं आ० राजेश कुमारी जी. यह ग़ज़ल भी क़ाबिल-ए-तारीफ़ हुई है. शेअर दर शेअर मेरी दिली मुबारकबाद स्वीकार करें. 

आद० योगराज जी गज़ल आपको पसंद आई मेरा लेखन सार्थक हुआ दिल से आभारी हूँ 

आदरणीया राजेश कुमारी जी, आपकी दूसरी प्रस्तुति भी आ गयी .. वाह वाह .. 

दिन में तारे दिखा गया है मुझे 
नींद से वो जगा गया है मुझे ..............  ये कुछ ख़तरनाक़ ढंग से जगाने की बात नहीं हो रही है ? ऐसा भी क्या जगाना कि दिन में तारे दिख जाय ... 

कोयला बन सकी न राख हुई 
उसका धोखा जला गया है मुझे ........... वाह .. सुफ़ियाना रंग लिए हुए यह शेर बह्त ही पुराने दोहे की याद करा गया.. 

आसमां छीन कर मेरा अपना   
इस जमीं पर बिठा गया है मुझे ............ शेर कई ज़िदग़ियों के सच्चाई बयान कर रहा है 

मैंने इंसा जिसे बनाया था  
वो ही पत्थर बना गया है मुझे............     ओह ! ... वाह वाह 

करके दरिया को पार इक तिनका 
दुनिया दारी सिखा गया है मुझे ............. ये कबीराना अंदाज़ अच्छा लगा. 

जिंदगी का ख़राब इक लम्हा  
हाशिये से मिटा गया है मुझे ............      ये भी एक सच्चाई है विकास के दौर की 
 

बिन ख़ता के  तेरी अदालत में

जाने क्या-क्या कहा गया है मुझे ............ वाह वाह .. यही तो होता है. शब्दों से चीर-फ़ाड कर डालते हैं वे ज़हीन कालिए 

 

ऐब मुझमे हज़ार कह-कह कर

खत्म पल-पल किया गया है मुझे..........  आप तो परवीन शाकिर हो रही हैं ! .. बहुत ख़ूब 

  

अब खुशी दे या छीन ले मौला 
सब्र करना तो आ गया है मुझे .............   ग़िरह में ख़ूब कसावट है. 

दिल से दाद कह दे रहा हूँ. 

शुभ-शुभ

आद० सौरभ जी शेर दर शेर आपकी विस्तृत समीक्षा से उत्साहित हूँ मेरी गज़ल सार्थक हुई आपका दिल से बहुत बहुत शुक्रिया .

अगली ग़ज़ल में सब सकारात्मक है नेगेटिव कुछ नहीं .

मोहतरमा राजेश कुमारी साहिबा उम्दा ग़ज़ल के 

लिये मुबारक बाद कुबूल करें

बहुत बहुत शुक्रिया सुर्खाब साहब 

आदरणीया राजेश कुमारी जी ..आपकी दूसरी ग़ज़ल भी उम्दा हुई है ..मेरी तरफ से ढेर सारी दाद और मुबारकबाद|

RSS

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Dr. Vijai Shanker commented on Dr. Vijai Shanker's blog post क्षणिकायें 01/23 - डॉ० विजय शंकर
"आदरणीय सुशील सरना जी, आपकी स्वीकृति के लिए हार्दिक आभार, बधाई के लिए धन्यवाद , सादर."
1 hour ago
Sushil Sarna posted a blog post

बेटी दिवस पर दोहा ग़ज़ल. . . .

बेटी दिवस पर दोहा ग़ज़ल ....बेटी घर की आन है, बेटी घर की  शान ।दो दो कुल संवारती, बेटी  की  मुस्कान…See More
10 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 149 in the group चित्र से काव्य तक
"आ. भाई चेतन जी, सादर अभिवादन। अच्छे दोहे हुए हैं। हार्दिक बधाई।  आ. भाई सौरभ जी की बात का…"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 149 in the group चित्र से काव्य तक
"आ. भाई सौरभ जी सादर अभिवादन। दोहों पर उपस्थिति और स्नेह के लिए आभार। आपके सुझाव उत्तम हैं। पुनः आभार"
yesterday
Usha Awasthi commented on Usha Awasthi's blog post कलियुग
"आदरणीय सुशील सरन जी,रचना पसन्द आने हेतु हार्दिक आभार आपका।"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 149 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय चेतन जी,  कुण्डलिया छंद पर आपका प्रयास आश्वस्त कर रहा है।  फिलहाल, और प्रयास की…"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 149 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अजय जी, आपने आज की शिक्षा-पद्धति के उथलेपन को शाब्दिक किया है। हार्दिक बधाई।  एक…"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 149 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी, आपने प्रदत्त चित्र को दोहे में ढाल मुखर कर दिया है। बहुत-बहुत…"
yesterday
Sushil Sarna commented on Usha Awasthi's blog post कलियुग
"वाह यथार्थ की सशक्त अभिव्यक्ति आदरणीया जी"
yesterday
Sushil Sarna commented on Chetan Prakash's blog post एक और ग़जल ः
"वाह आदरणीय जी बेहतरीन 👌 प्रस्तुति सर हार्दिक बधाई सर"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 149 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय चेतन प्रकाश जी, आपकी प्रस्तुति का हार्दिक स्वागत है।  आपके कई दोहे सटीक बन पड़े…"
yesterday
Sushil Sarna commented on Dr. Vijai Shanker's blog post क्षणिकायें 01/23 - डॉ० विजय शंकर
"वाहहहहहह आदरणीय जी भावों की गहन अभिव्यक्ति । हार्दिक बधाई सर"
yesterday

© 2023   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service