For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

ट्रेन समय की 

छुकछुक दौड़ी

मज़बूरी थी जाना

भूल गया सब

याद रहा बस 

तेरा हाथ हिलाना

तेरे हाथों की मेंहदी में

मेरा नाम नहीं था

केवल तन छूकर मिट जाना

मेरा काम नहीं था

याद रहेगा तुझको

दिल पर

मेरा नाम गुदाना

तेरा तन था भूलभुलैया

तेरी आँखें रहबर

तेरे दिल तक मैं पहुँचा 

पर तेरे पीछे चलकर

दिल का ताला 

दिल की चाबी

दिल से दिल खुल जाना

इक दूजे के सुख-दुख बाँटे

हमने साँझ-सबेरे

अब तेरे आँसू तेरे हैं

मेरे आँसू मेरे

अब मुश्किल है 

और किसी के

सुख-दुख को अपनाना

------------------

(मौलिक एवं अप्रकाशित)

Views: 333

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by धर्मेन्द्र कुमार सिंह on November 3, 2019 at 9:48pm

बहुत बहुत धन्यवाद आदरणीय dandpani nahak जी

Comment by धर्मेन्द्र कुमार सिंह on November 3, 2019 at 9:47pm

बहुत बहुत धन्यवाद आदरणीय सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' जी

Comment by धर्मेन्द्र कुमार सिंह on November 3, 2019 at 9:47pm

इस उत्साहवर्द्धन के लिये हृदयतल से शुक्रगुज़ार हूँ आदरणीय  Saurabh Pandey जी। स्नेह बना रहे।

Comment by धर्मेन्द्र कुमार सिंह on November 3, 2019 at 9:45pm

बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीया Dr. Geeta Chaudhary जी

Comment by धर्मेन्द्र कुमार सिंह on November 3, 2019 at 9:44pm

तह-ए-दिल से शुक्रगुज़ार हूँ जनाब Samar kabeer साहब

Comment by धर्मेन्द्र कुमार सिंह on November 3, 2019 at 9:44pm

बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय Sheikh Shahzad Usmani साहब

Comment by dandpani nahak on November 3, 2019 at 10:31am
आदरणीय धर्मेन्द्र कुमार सिंह जी नमस्कार बहुत ही सुन्दर कविता हुई है हार्दिक बधाई स्वीकार करें! बहुत ही सुन्दर भाव उम्दा शब्द चयन और सुघड़ता आपने मुग्ध कर दिया ! पुनः बधाई
Comment by सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' on November 2, 2019 at 4:50pm

आद0 धर्मेंद्र जी सादर अभिवादन। बेहतरीन भाव पक्ष और विषय को सुघड़ता से शब्दों में बांधने पर आपको कोटिश बधाइयाँ। सादर


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on November 2, 2019 at 11:45am

आदरणीय धर्मेन्द्र जी, मुखड़े से ही आपने भावों को बाँध लिया है जिसका निर्वहन पूरी रचना में बहुत ही ख़ूबसूरती से हुआ है. साथ ही, मुग्ध करता है, विषय और कथ्य का सुगढ़ सम्मिलन ! हार्दिक बधाई स्वीकारें आदरणीय. 

हालाँकि, नवगीत के निकष को लेकर कई अवधारणाएँ गीति-प्रतीति के क्षेत्र में व्यापी हुई हैं. इनके कारण कई रचनाओं को लेकर कइयों के लिए भ्रम की स्थिति बनती जा रही है. यह देख कर बहुत ही अच्छा लग रहा है कि आपने ऐसे किसी भ्रम या ऐसी किसी अवधारणा से अपनी इस रचना को बचाए रखा है और नवगीत का भाव तथा शिल्प पक्ष सशक्तता के साथ उभर पाया है. 
हार्दिक बधाइयाँ.

Comment by Dr. Geeta Chaudhary on November 2, 2019 at 7:03am

आदरणीय धर्मेन्द्र कुमार जी प्रणाम, बहुत भावपूर्ण गीत की रचना हुई, बहुत अच्छा लगाI सुंदर नवगीत के लिए बधाई स्वीकार करेंI

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Nilesh Shevgaonkar commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की- ख़ुद को क़िस्सा-गो समझे है हर क़िरदार कहानी में
"शुक्रिया आ. सालिक गणवीर जी.आपका नम्बर नहीं लग रहा है."
7 minutes ago
सालिक गणवीर commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की- ख़ुद को क़िस्सा-गो समझे है हर क़िरदार कहानी में
"आदरणीय निलेश नूर साहेब सादर अभिवादन आपकी ग़ज़ल वाकई शानदार है. शैर दर शैर दाद और मुबारकबाद क़ुबूल…"
16 minutes ago
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
":( पुछल्ला बेबह्र है... क्षमा करें ... कि को की पढ़ा नहीं जा सकता ..."
46 minutes ago
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"आदरणीय नीलेश जी, संज्ञान हेतु हार्दिक आभार।"
46 minutes ago
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"ये रही लिंक उस बहस…"
48 minutes ago
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"आदरणीय सिंह साहबसादर अभिवादनएक उम्द: तरही ग़ज़ल के लिए ढेरों बधाइयाँ स्वीकार करें. सादर."
50 minutes ago
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"आदरणीय मुनीस तन्हा साहबसादर अभिवादनएक उम्द: तरही ग़ज़ल के लिए ढेरों बधाइयाँ स्वीकार करें. सादर."
51 minutes ago
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"मुहतरमा अंजली गुप्ता जीसादर अभिवादनएक उम्द: तरही ग़ज़ल के लिए ढेरों बधाइयाँ स्वीकार करें. सादर."
54 minutes ago
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"आदरणीय भाई अमित जीसादर अभिवादनएक उम्द: तरही ग़ज़ल के लिए ढेरों बधाइयाँ स्वीकार करें. सादर.…"
56 minutes ago
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"आदरणीय तस्दीक़ अहमद ख़ान जी,उम्द: ग़ज़ल की बधाई। कहीं कही चन्द्र बिन्दु की जगह बिन्दु आ गया है।…"
56 minutes ago
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"आदरणीय योगराज प्रभाकर साहबसादर अभिवादनएक उम्द: तरही ग़ज़ल के लिए ढेरों बधाइयाँ स्वीकार करें. आपको इस…"
58 minutes ago
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"शुक्रिया आ. सालिक गणवीर साहब,इस कूड़ेदानी का क़िस्सा बड़ा दिलचस्प है.. मंच पर किसी ग़ज़ल में मैंने इसे…"
59 minutes ago

© 2020   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service