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झिझको नहीं ठिठको नहीं
लो पकड़ लो मेरा हाथ
मैं तुम्हे ले चलता हूँ
तम से प्रकाश की ओर

प्रकाश तुम्हें दिखाएगा
जीवन के अनंत आयाम
तुम कसौटी पर परखना
औऱ चुन लेना कोई एक

वो एक ही पर्याप्त है
जीवन को दिशा देने के लिए
अन्य के जीवन में
प्रकाश फ़ैलाने के लिए॥

- प्रदीप देवीशरण भट्ट - मौलिक व अप्रकाशित

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Comment by vijay nikore on September 12, 2019 at 6:35am

सुन्दर रचना के लिए बधाई, आदरणीय प्रदीप जी

Comment by Samar kabeer on September 7, 2019 at 3:07pm

जनब प्रदीप जी आदाब,सुंदर प्रस्तुति हेतु बधाई स्वीकार करें ।

Comment by प्रदीप देवीशरण भट्ट on September 6, 2019 at 6:19pm

शुक्रिया तेजवीर सिंह् जी

Comment by TEJ VEER SINGH on September 5, 2019 at 8:03pm

हार्दिक बधाई आदरणीय प्रदीप देवी शरण भट्ट जी।बहुत सुंदर प्रस्तुति।

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