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फागुन आया अंगना मेरे ,रंगो की हम जोली है ,

नभ में उड़ते रंग गुलाल,आज सखी री होली है |

 

गाते गीत चौक चौबारे ,मस्तों की ये टोली है,

बाजे ढोल मृदंग मजीरा ,आज सखी री होली है |

 

धानी धानी चुनरी  ओढे,पात बजाते ताली है

एक रंग में रंगे सभी है, आज सखी री होली है |

 

बिन ठिठोली होली कैसी ,बात सभी ने बोली है ,

भंग का रंग चढा सभी को , आज सखी री होली है |

 

धरती पर रंगो की नदियाँ ,अम्बर पर रंगोली है ,

आँगन आँगन मगन सभी है ,आज सखी री होली है |

 

सात सुरों से महका मन है ,कानो में रस घोली है ,

भीग गए तन मन ही दोनों, आज सखी री होली है |

***********

मौलिक /अप्रकाशित

महेश्वरी कनेरी 

Views: 27

Comment

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Comment by vijay nikore on March 22, 2019 at 10:49pm

होली पर यह रचना बहुत ही अच्छी बनी है। बधाई, आ० महेश्वरी जी।

Comment by Samar kabeer on March 21, 2019 at 12:05pm

मुहतरमा महेश्वरी कनेरी जी आदाब,होली पर्व पर अच्छी रचना हुई,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

धानी धानी चुनरी  ओढे,पात बजाते ताली है

एक रंग में रंगे सभी है, आज सखी री होली है' 

इस पद की तुकांतता उचित नहीं,देखियेगा ।

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