For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

राज़ नवादवी: एक अंजान शायर का कलाम- ९२

२२१ २१२१ १२२१ २१२

मिलना नहीं जवाब तो करना सवाल क्यों
मेरी ख़मोशियों पे है इतना मलाल क्यों //१

दामाने इंतज़ार में कटनी है ज़िंदगी
मरने तलक है हिज्र तो होगा विसाल क्यों //२ 

यारों को कब पता नहीं कैसे हैं दिन मेरे
है जो नहीं वो ग़ैर तो पूछेगा हाल क्यों //३ 

जब है ज़रीआ कस्ब का कोई नहीं मेरा
आसाईशों की चाह की फिर हो मज़ाल क्यों //४ 

मैंने क़सीदा जब कोई लिक्खा न उसके नाम
देगा उधारी में मुझे साहू भी माल क्यों //५ 

करती नहीं है अब मुझे सोज़ाँ तेरी नज़र 
आएगा ठंढे ख़ून में मेरे उबाल क्यों//६ 

परहेज मेरे क़ुर्ब से इतना है जब तुझे
आता है मेरे फ़िक़्र में तेरा ख़याल क्यों //७ 

ग़र जो नहीं हो राज़ के लिक्खे के तुम मुरीद
देते हो उसके शेर की सबको मिसाल क्यों //८

~राज़ नवादवी

"मौलिक एवं अप्रकाशित"

मलाल- वैमनस्य, पश्चाताप; मज़ाल- हिम्मत, शक्ति, सामर्थ्य; कस्ब- कमाई; आसाईश- सुख, समृद्धि; क़ुर्ब- सामीप्य; विसाल- मिलन;


Views: 467

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on February 5, 2019 at 5:59am

आ. भाई राज नवादवी जी, सुंदर गजल हुयी है । हार्दिक बधाई ।

मिसरे को यूँ करने से भाव स्पष्ट हो जायेगा

' वो ग़ैर सा हुआ है तो पूछेगा हाल क्यों '

Comment by Samar kabeer on February 4, 2019 at 9:14pm

जनाब राज़ नवादवी साहिब आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें ।

'है जो नहीं वो ग़ैर तो पूछेगा हाल क्यों '

ये मिसरा स्पष्ट नहीं लगता ।

'आसाईशों की चाह की फिर हो मज़ाल क्यों'

इस मिसरे में 'मज़ाल' को "मजाल" करें ।

'आएगा ठंढे ख़ून में मेरे उबाल क्यों'

इस मिसरे में 'ठंढे' को "ठंडे" कर लें । 

'परहेज मेरे क़ुर्ब से इतना है जब तुझे 
आता है मेरे फ़िक़्र में तेरा ख़याल क्यों '

इस शैर के ऊला में 'परहेज' को "परहेज़" करें और सानी में 'मेरे' को "मेरी" करें,'फ़िक्र' स्त्रीलिंग है ।

'

तुम 'राज़' के कलाम के ग़र हो नहीं मुरीद

देते हो उसके शेर की सबको मिसाल क्यों'

इस शैर के ऊला में 'ग़र' को "गर" करें ।

Comment by राज़ नवादवी on February 3, 2019 at 3:52pm

कृपया मक़ते को इस प्रकार पढ़ें- 

तुम 'राज़' के कलाम के ग़र हो नहीं मुरीद

देते हो उसके शेर की सबको मिसाल क्यों //८

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-107 (विषय: इंसानियत)
"आ. भाई शेख शहजाद जी, अभिवादन। अच्छी लघुकथा हुई है। हार्दिक बधाई।"
23 hours ago
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-107 (विषय: इंसानियत)
"तब इसे थोड़ी दूसरी तरह अथवा अधिक स्पष्टता से कहें क्योंकि सफ़ेद चीज़ों में सिर्फ़ ड्रग्स ही नहीं आते…"
yesterday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-107 (विषय: इंसानियत)
"आदाब। बहुत-बहुत धन्यवाद उपस्थिति और प्रतिक्रिया हेतु।  सफ़ेद चीज़' विभिन्न सांचों/आकारों…"
yesterday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-107 (विषय: इंसानियत)
"रचना पटल पर आप दोनों की उपस्थिति व प्रोत्साहन हेतु शुक्रिया आदरणीय तेजवीर सिंह जी और आदरणीया…"
yesterday
TEJ VEER SINGH replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-107 (विषय: इंसानियत)
"हार्दिक बधाई आदरणीय शेख़ शहज़ाद जी।"
yesterday
TEJ VEER SINGH replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-107 (विषय: इंसानियत)
"हार्दिक आभार आदरणीय प्रतिभा जी।"
yesterday
TEJ VEER SINGH replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-107 (विषय: इंसानियत)
"हार्दिक आभार आदरणीय महेन्द्र कुमार जी।"
yesterday
pratibha pande replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-107 (विषय: इंसानियत)
"समाज मे पनप रही असुरक्षा की भावना के चलते सामान्य मानवीय भावनाएँ भी शक के दायरे में आ जाती हैं कभी…"
yesterday
pratibha pande replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-107 (विषय: इंसानियत)
"हार्दिक बधाई इस लघुकथा के लिए आदरणीय तेजवीर जी।विस्तार को लेकर लघुकथाकार मित्रों ने जो कहा है मैं…"
yesterday
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-107 (विषय: इंसानियत)
"//"पार्क में‌ 'सफ़ेद‌ चीज़' किसी से नहीं लेना चाहिए। पता नहीं…"
yesterday
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-107 (विषय: इंसानियत)
"अच्छी लघुकथा है आदरणीय तेजवीर सिंह जी। अनावश्यक विस्तार के सम्बन्ध में आ. शेख़ शहज़ाद उस्मानी जी से…"
yesterday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-107 (विषय: इंसानियत)
"टुकड़े (लघुकथा): पार्क में लकवा पीड़ित पत्नी के साथ वह शिक्षक एक बैंच की तरफ़ पहुंचा ही था कि उसने…"
yesterday

© 2024   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service