For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

फेलुन फेलुन फेलुन फेलुन

 

गुपचुप उसपर मन आया है

लगता है सावन आया है

 

महका है हर कोना-कोना

अम्बर से चन्दन आया है

 

देखो नभ पर छाये बादल

दूल्हा ज्यों बनठन आया है 

 

भीग रही है प्यासी धरती

ज्यों बीता यौवन आया है

 

रह-रह नाच रही हैं बूँदें

राधा का मोहन आया है

 

झूला झूल रही हैं सखियाँ

सज रक्षा बंधन आया है

 

कागज़ की नैया ले आओ

याद मुझे बचपन आया है

 

मौलिक/अप्रकाशित.

Views: 639

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by PHOOL SINGH on December 11, 2018 at 5:13pm

सूंदर रचना

Comment by Ashok Kumar Raktale on December 2, 2018 at 10:14am

आदरणीय दयाराम मैथानी साहब सादर, सृजन को मान देने के लिए आपका हृदयतल से आभार । सादर ।

Comment by Ashok Kumar Raktale on December 2, 2018 at 10:12am

आदरणीय श्लेष चंद्राकर जी सादर , प्रस्तुत गजल को सराहने के लिए आपका बहुत- बहुत आभार । सादर । 

Comment by Ashok Kumar Raktale on December 2, 2018 at 10:10am

आदरणीय समर कबीर साहब सादर नमस्कार, मेरे प्रयास को सराहने के लिए आपका बहुत - बहुत आभार । सच है तनाफूर का मुझे ध्यान  नहीं रहा है । एक तो आपने संशोधित कर ही दिया है दूसरे को मैं संशोधित कर लेता हूँ । पुनः आपका हार्दिक आभार । सादर ।

Comment by Dayaram Methani on December 1, 2018 at 10:42pm

आदरणीय अशोक कुमार रक्ताले जी, बहुत सुंदर सृजन। बधाई स्वीकार करें।

Comment by Shlesh Chandrakar on December 1, 2018 at 4:02pm

बहुत बढिया, अशोक जी

Comment by Samar kabeer on December 1, 2018 at 11:00am

जनाब अशोक कुमार रक्ताले जी आदाब,ग़ज़ल का अच्छा प्रयास हुआ है,बधाई स्वीकार करें ।

'  आसमान पर छाये बादल'

ये मिसरा मात्रा के हिसाब से ठीक लगता है,लेकिन फ़ेलुन के अरकान पर तक़ती'अ करने पर रुकावट आ रही है,आप चाहें तो मिसरा यूँ कर सकते हैं:-

'देखो नभ पर छाये बादल''

'  फिर रक्षा बंधन आया है'

इस मिसरे में ऐब-ए-तनाफ़ुर देखें ।

Comment by Ashok Kumar Raktale on December 1, 2018 at 10:39am

आदरणीय मोहम्मद आरिफ़ साहब सादर नमस्कार, प्रस्तुत प्रयास पर उत्साहवर्धन के लिए अतिशय आभार । सादर 

Comment by Mohammed Arif on November 30, 2018 at 1:08pm

आदरणीय अशोक रक्ताले जी आदाब,

  ..                         बहुत ही कठिन बह्र पर बहुत ही सरल-सरस शब्दों में लाजवाब ग़ज़ल । शे'र दर शे'र दाद के साथ दिली मुबारकबाद स्वीकार करें ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-163
"गजल (विषय- पर्यावरण) 2122/ 2122/212 ******* धूप से नित  है  झुलसती जिंदगी नीर को इत उत…"
6 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-163
"सादर अभिवादन।"
6 hours ago
Admin posted discussions
Tuesday
Admin added a discussion to the group चित्र से काव्य तक
Thumbnail

'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 156

आदरणीय काव्य-रसिको !सादर अभिवादन !!  …See More
Tuesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Dr.Prachi Singh commented on मिथिलेश वामनकर's blog post कहूं तो केवल कहूं मैं इतना: मिथिलेश वामनकर
"बहुत सुंदर अभिव्यक्ति हुई है आ. मिथिलेश भाई जी कल्पनाओं की तसल्लियों को नकारते हुए यथार्थ को…"
Jun 7

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on मिथिलेश वामनकर's blog post कहूं तो केवल कहूं मैं इतना: मिथिलेश वामनकर
"आदरणीय मिथिलेश भाई, निवेदन का प्रस्तुत स्वर यथार्थ की चौखट पर नत है। परन्तु, अपनी अस्मिता को नकारता…"
Jun 6
Sushil Sarna posted blog posts
Jun 5
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . .
"आदरणीय मिथिलेश वामनकर जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार ।विलम्ब के लिए क्षमा सर ।"
Jun 5
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post कुंडलिया .... गौरैया
"आदरणीय मिथिलेश वामनकर जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय जी । सहमत एवं संशोधित ।…"
Jun 5
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . .प्रेम
"आदरणीय मिथिलेश वामनकर जी सृजन पर आपकी मनोहारी प्रशंसा का दिल से आभार आदरणीय"
Jun 3
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . . .मजदूर

दोहा पंचक. . . . मजदूरवक्त  बिता कर देखिए, मजदूरों के साथ । गीला रहता स्वेद से , हरदम उनका माथ…See More
Jun 3

सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर commented on मिथिलेश वामनकर's blog post कहूं तो केवल कहूं मैं इतना: मिथिलेश वामनकर
"आदरणीय सुशील सरना जी मेरे प्रयास के अनुमोदन हेतु हार्दिक धन्यवाद आपका। सादर।"
Jun 3

© 2024   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service