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**एन पासांत**(लघुकथा)राहिला

"सर ! बलात्कार का केस और ये नार्कोटेस्ट ..ये सीबीआई जाँच की खुद माँग करना !!!
ये तो ख़ुदकुशी करना हुआ ।"
शतरंज की बिसात पर अकेले बैठे खेल रहे मंत्री जी से मुँह लगे सेक्रेटरी ने चिंतित होकर कहा।
" सुरेश बाबू ! इतनी चिंता क्यों करते हो ? इससे तो आपका बीपी बढ़ जाएगा । शान्ति पकड़ो जरा । देखे नहीं का..., जनता की सवालिया चितावन को ? लेकिन हम जरा दम भरे नहीं , कि गेट के बाहर भीड़ छटी नही। "
"लेकिन...!!!
"अच्छा यह सब छोड़ो..., जरा यहाँ आओ और बताओ तो सरी इस पारी को कौन जीतेगा?"

"जी...!!! "

"जी-जी क्या ?? बोलो ...,चलो मत बोलो... आज हम ही तुमको एक ठो पते की बात बताते हैं। जानते हो..., ये सत्ता और शतरंज का खेल खेलने में कब मज़ा आता ?? "
वह मोहरों पर नजर गड़ाये हुए बोले।
".....?"

"ये देखो...., ये चली प्रतिद्वंद्वी की ओर से चाल और फिर ये हमारी ओर से इस गेम की विशेष चाल ..., हा... हा ...हा... और तुम खामखाँ टेंशन लिए जा रहे हो ?"
उस विद्रूपी हँसी पर बिसात पर बिछे मोहरे कसमसा कर रह गये।

मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment by Samar kabeer on April 21, 2018 at 10:37am

मोहतरमा राहिला जी आदाब, बहुत उम्दा लघुकथा लिखी आपने, इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

Comment by Neelam Upadhyaya on April 20, 2018 at 2:43pm

आदरणीया राहिला जी, बहुत ही बढ़िया लघुकथा। बधाई स्वीकार करें।

Comment by Nilesh Shevgaonkar on April 20, 2018 at 1:47pm

क्या ख़ूब.. बहुत शानदार लघुकथा हुई है ..
ढेरों बधाइयाँ..

Comment by Dr Ashutosh Mishra on April 20, 2018 at 11:59am

आदरणीया राहिला जी इस रचना पर हार्दिक बधाई स्वीकार करें सादर 

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