For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

हम भी मुस्कुराएंगे

तुम जो कहते थे दोस्ती है,
हमने सोचा था आजमाएंगे;

तुम हमेशा आसरा दिखाते थे,
सोचा हम भी आशियाँ लुटाएंगे;

तुम किनारे पर मगर कैसे पहुंचे,
हमने सोचा था, दोनों डूब जायेंगे;

तुम जिस गली में रहते हो,
हम वहां अब गश्त न लगायेंगे;

तुम्हारा दामन पाक रहे हरदम,
हम गुनाहों का खाम्याज़ा पायेंगे;

तुमने तोड़े थे जो पेड़ों के पत्ते,
सूख गए हैं, हम उन्हें जलाएंगे;

तुम्हारी जिंदगी, जिंदगी रहे 'नीरज',
अज़ल से पर हम भी न मात खायेंगे;

तुम तबस्सुम को सदा सजाए रखना,
अरमां रहा तो हम भी मुस्कुराएंगे;



Views: 177

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by neeraj tripathi on June 20, 2011 at 5:56pm
dhanyavaad bagi ji

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on June 19, 2011 at 8:21pm

तुम्हारा दामन पाक रहे हरदम,
हम गुनाहों का खाम्याज़ा पायेंगे;

 

खुबसूरत नज्म , बेहतरीन ख्याल , बहुत खूब नीरज जी , दाद कुबूल करे | आपकी और भी रचना तथा अन्य साथियों की रचनाओं पर आपके विचारों का इन्तजार रहेगा |

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Usha Awasthi shared their blog post on Facebook
33 minutes ago
Usha Awasthi shared their blog post on Facebook
34 minutes ago
Usha Awasthi shared their blog post on MySpace
35 minutes ago
Usha Awasthi posted a blog post

कुछ उक्तियाँ

कैसी फ़ितरत के लोग होते हैं ?दूसरे की आँखों में धूल झोंकने हेतुनम्बर वही मोबाइल परनाम कुछ और जोड़…See More
36 minutes ago
Aazi Tamaam commented on Aazi Tamaam's blog post ग़ज़ल: जैसे जैसे ही ग़ज़ल रुदाद ए कहानी पड़ेगी
"सहृदय शुक्रिया आदरणीय ब्रज जी हौसला अफ़ज़ाई के लिये दिल से आभार सादर"
2 hours ago
Admin posted a discussion

"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-130

परम आत्मीय स्वजन,ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरे के 130वें अंक में आपका हार्दिक स्वागत है| इस बार का मिसरा…See More
4 hours ago
Aazi Tamaam commented on Aazi Tamaam's blog post नग़मा: इक रोज़ लहू जम जायेगा इक रोज़ क़लम थम जायेगी
"आदरणीय अमीर जी एक मिसरा कोई22  भटकाता222  है1 सफ़र12  याँ2  पूछो22 …"
4 hours ago
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-मेरी  उदासी  मुझे अकेला  न छोड़  देना
"ग़ज़ल पे आपकी शिरक़त के लिए बहुत बहुत शुक्रिया भी तमाम जी..."
5 hours ago
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल : मनोज अहसास
"बढ़िया कहा भाई मनोज जी...बधाई कुबूल करें..."
5 hours ago
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Aazi Tamaam's blog post ग़ज़ल: जैसे जैसे ही ग़ज़ल रुदाद ए कहानी पड़ेगी
"अच्छी लगीं आपकी कोशिशें भाई तमाम जी...बाकी इस्लाह तो गुणीजन ही कर सकते हैं।"
5 hours ago
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on सालिक गणवीर's blog post ( बेजान था मैं फिर भी तो मारा गया मुझे......(ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)
"क्या कहने वाह बेहतरीन ग़ज़ल हुई आदरणीय...हरिक शे'र लाजबाब"
5 hours ago
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post हमने कहीं पे लौट आ बचपन क्या लिख दिया-लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"बड़ी ही खूबसूरत ग़ज़ल कही है आदरणीय..."
5 hours ago

© 2021   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service