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इबादत कर रहा हूँ मैं

इबादत कर रहा हूँ कर रहा हूँ
कर रहा हूँ मैं।
खलल मत डालिये चेहरे की पुस्तक,
पढ़ रहा हूँ मैं।।

अभी मैं रोककर साँसों को,
प्राणायाम में रत हूँ।
विधाता की सुघर कृति के सघन,
अवधान में रत हूँ।
अभी मत बोलिये मन में ये प्रतिमा,
गढ़ रहा हूँ मैं।
खलल मत डालिये चेहरे की पुस्तक,
पढ़ रहा हूँ मैं।।

अभी धड़कन सँवरनी है,
अभी शृंगार करना है।
अभी बेजान से बुत पर,
हृदय का हार चढ़ना है।
नज़र मत डालिये प्रियवर मिलन को,
बढ़ रहा हूँ मैं।
खलल मत डालिये चेहरे की पुस्तक,
पढ़ रहा हूँ मैं।।

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Comment

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Comment by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on December 7, 2015 at 9:42pm
आदरणीय शैख़ शहज़ाद सर सादर आभार
Comment by Sheikh Shahzad Usmani on November 20, 2015 at 4:52pm
सुंदर रचना के लिए हृदयतल से बहुत बहुत बधाई आपको आदरणीय पंकज कुमार मिश्र 'वात्सयायन' जी ।
Comment by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on November 19, 2015 at 4:59pm
आदरणीय रवि सर हार्दिक धन्यवादकौर सादर प्रणाम्
Comment by Ravi Shukla on November 19, 2015 at 2:50pm

आदरणीय पंकज जी सुन्‍दर रचना है बड़ा सुन्‍दर प्रवाह है पढ़ कर आनंद आ गया दिली बधाई स्‍वीकार करें ।

कृपया ध्यान दे...

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