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ग़ज़ल-नूर ज़ुल्फों को जंजीर लिखेगा,

22/22/22/22 (सभी संभावित कॉम्बिनेशन्स)
ज़ुल्फों को जंजीर लिखेगा, 
तो कैसे तकदीर लिखेगा.
.

जंग पे जाता हुआ सिपाही,
हुस्न नहीं शमशीर लिखेगा.
.

राज सभा में मर्द थे कितने,  
पांचाली का चीर लिखेगा. 
.

ईमां आज बिका है उसका,
अब वो छाछ को खीर लिखेगा.
.

कोई राँझा अपनें खूँ से, 
जब भी लिखेगा, हीर लिखेगा.

.

शेर कहे हैं जिसने कुल दो,
वो भी खुद को मीर लिखेगा.
.

नहीं जलेगा वो ख़त तुझसे, 
जो आँखों का नीर लिखेगा. 
.

‘नूर’ की बातें नूर ही समझे,
कब्र को भी जागीर लिखेगा.  
.
नूर 
मौलिक / अप्रकाशित 

Views: 450

Comment

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Comment by Nilesh Shevgaonkar on May 2, 2015 at 4:37pm

शुक्रिया आ. शिज्जू भाई 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on May 2, 2015 at 8:41am

आदरणीय निलेश भैया बेहतरीन ग़ज़ल है हर शेर पुरअसर है दिली दाद कुबूल फरमायें

Comment by Nilesh Shevgaonkar on May 2, 2015 at 7:55am

शुक्रिया आ. सौरभ सर ..

Comment by Nilesh Shevgaonkar on May 2, 2015 at 7:54am

शुक्रिया आ. महिमा श्री जी 

Comment by Nilesh Shevgaonkar on May 2, 2015 at 7:54am

शुक्रिया आ. मुकेश जी 

Comment by Nilesh Shevgaonkar on May 2, 2015 at 7:54am

शुक्रिया आ.मिथिलेश जी 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on May 2, 2015 at 12:48am

वाद कर ऐ नूर ! तू ऐसा आगे भी मंत्रमुग्ध करता हुआ तहरीर लिखेगा ..

बहुत बढिया, भाईजी !


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on May 1, 2015 at 6:34pm
सभी संभावित कॉम्बिनेशन कमाल के हुए है।
बेहतरीन ग़ज़ल
दिल से दाद हाज़िर है।
Comment by MAHIMA SHREE on May 1, 2015 at 6:13pm

राज सभा में मर्द थे कितने,  
पांचाली का चीर लिखेगा. 
.

ईमां आज बिका है उसका,
अब वो छाछ को खीर लिखेगा.

वाह क्या खूब कहा आपने...बधाई

Comment by MUKESH SRIVASTAVA on May 1, 2015 at 5:11pm

 

वाह ! बहुत खूब लिखा है, बहुत बहुत बधाई आदरणीय नीलेश नूर जी , सादर।

कृपया ध्यान दे...

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