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विष से अमरता - लघुकथा

ब्रह्मा बड़ी शांति से इंद्र की बात सुन रहे थे, "पूजनीय, धरती पर आर्यव्रत नामक स्थान सोने की चिड़िया कहलाता है। कई अविष्कार हुए हैं, वेद लिखे गए, महाकाव्य लिखे गए, कितने ही उत्तम शास्त्र भी लिखे गए। सभी नागरिक स्वस्थ, सुखी और संपन्न हैं। श्री कृष्ण ने वेदों का परिष्करण कर अमर-अजर आत्मा की अवधारणा तक दे दी है।"

“सत्य है, लेकिन ईर्ष्या और स्वार्थ के कारण आपसी फूट आत्मा की तरह ही रोग, दुःख और विपन्नता को अमर कर देगी।“ वाणी में भारीपन था|

(मौलिक और अप्रकाशित)

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Comment by Dr. Chandresh Kumar Chhatlani on April 3, 2015 at 5:54pm

हार्दिक आभार आ० सौरभ पांडे जी !!


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on April 3, 2015 at 12:40pm

प्रयासरत रहें, भाई चन्द्रेशजी. सार्थक प्रयास के लिए हार्दिक बधाई.

इस संदर्भ में मुझे पाटलिपुत्र (आजका पटना) को लेकर कहे चाणक्य के अमर वाक्य का स्मरण हो रहा जिसका भावार्थ यही है कि समस्त समृद्धियों के बाद भी यह नगरी सद-सदा आग, पानी तथा आपसी कलह से विपन्न होती रहेगी.

कहना न होगा, पटना को जाननेवाले भलीभाँति जानते हैं कि आजभी पटना की विपन्नता के लिए यही तीनों कारक सबसे अधिक प्रभावी हैं.

शुभेच्छाएँ

Comment by Dr. Chandresh Kumar Chhatlani on April 3, 2015 at 12:14pm

आदरणीय  डॉ. विजय शंकर जी, लघुकथा के इस गहरे विश्लेषण के हृदय से प्रणाम अर्पित करता हूँ|

Comment by Dr. Vijai Shanker on April 3, 2015 at 7:07am
आपकी ब्रह्म-वाणी की अमर कथा बहुत ही गम्भीर चिंतन चाहती है, संक्षेप में , विष एक वास्तविकता है , अमृत एक कल्पना है , वास्तविकता को विजित किया जा सकता है, वह सरल है , व्यवहारिक है , कल्पना को साकार करना एक बड़ी चुनौती है। सम्प्रति वह आज भी , अभी भी एक कल्पना ही है।
आदरणीय चंद्रेश कुमार जी इस प्रस्तुति के लिए बधाई , आपने एक बहुत महत्वपूर्ण बात सामने रखी है , सादर।
Comment by Dr. Chandresh Kumar Chhatlani on April 3, 2015 at 12:33am

आप सभी आदरणीयजनों  का  हार्दिक आभार, इस रचना को पढने समझने के लिये| लघु कथा में मुझे भी कमियां लग रहीं थी, थोड़ा  सा परिवर्तन किया है कृपा कर पुनः नज़र फरमावें!!

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on April 2, 2015 at 12:07pm

आ० छात्लानी जी

 कथा -लेखन के लिए अभी आपको और मेहनत  करने की आवश्यकता है . प्रयास करते रहे .

Comment by somesh kumar on April 2, 2015 at 11:33am

क्या यह लघुकथा है ?

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on April 2, 2015 at 11:28am

सुंदर और  अर्थपूर्ण चिंतन  

Comment by Shyam Narain Verma on April 2, 2015 at 10:51am
बहुत-बहुत बधाई इस शानदार लघु कथा के लिए

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