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ग़ज़ल -- " कहूँ कुछ और कुछ निकले ज़ुबाँ से "

1222-1222-122

'कहूँ कुछ और कुछ निकले ज़ुबाँ से'
बहुत आजिज़ मैं अपने जिस्म-ओ-जाँ से

उठी आवाज़ शब की रूह-ए-खाँ से
दिनेश अब झाँक बामे आसमाँ से

निखरती शख़्सियत है इम्तिहाँ से
कहे ये रहगुज़र हर कारवाँ से

मुक़र्रर आपका जब फ़ैसला है
तो फिर क्या फ़ाइदा मेरे बयाँ से

सरे महफ़िल तुम्हें रुसवा करेगा
नहीं करना अदावत राज़दाँ से

सितारे चाँद सूरज और जुगनू
सभी का नूर उस नूरेजहाँ से

अँधेरा फिर न टिकता एक पल भी
सहर का तीर जब छूटे कमाँ से

मैं शायर हूँ हमेशा सच कहूँगा
मेरी पहचान केवल क़द्रदाँ से

ग़मों से हार मेरी रूह चीखी
छुड़ाओ मुझको कोई क़ैद-ए-जाँ से

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मौलिक व अप्रकाशित © दिनेश कुमार
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Comment by दिनेश कुमार on March 26, 2015 at 9:44pm
हौसला अफ़्जाई के लिए बहुत बहुत शुक्रिया जनाब krishna mishra 'jaan'gorakhpuri साहब। हार्दिक आभार।
Comment by दिनेश कुमार on March 26, 2015 at 9:42pm
हौसला अफ़्जाई के लिए बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय गिरिराज सर जी। हार्दिक आभार। आशीर्वाद बनाए रखिएगा।
Comment by Hari Prakash Dubey on March 26, 2015 at 9:44am

आदरणीय दिनेश जी, सुन्दर ग़ज़ल ,  हार्दिक बधाई !

Comment by Krish mishra 'jaan' gorakhpuri on March 25, 2015 at 11:32pm

हर एक शेर लाजव़ाब सर!बहुत ही लाजव़ाब गज़ल!

सितारे चाँद सूरज और जुगनू
सभी का नूर उस नूरेजहाँ से       इस शेर पर तो दिल फ़िदा हो गया!

ग़मों से हार मेरी रूह चीखी
छुड़ाओ मुझको कोई क़ैद-ए-जाँ से    बेहद उम्दा! बेहद उम्दा!

हार्दिक बधाईयां आ० दिनेश सर!


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on March 25, 2015 at 10:55pm

आदरणीय दिनेश भाई , सभी अशआर अच्छे कहे हैं , हार्दिक बधाई स्वीकार करें ॥

Comment by दिनेश कुमार on March 25, 2015 at 7:32pm
हौसला अफ़्जाई के लिए बहुत बहुत शुक्रिया भाई मिथिलेश जी। हार्दिक आभार। स्नेह बनाए रखिएगा। अगर कहीं ज़रा सी भी गलती या चूक लगे, बता ज़रूर देना भाई।

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on March 25, 2015 at 7:25pm

आदरणीय दिनेश भाई जी बेहतरीन और उम्दा ग़ज़ल हुई शेर दर शेर दाद हाज़िर है .... हार्दिक बधाई 

Comment by दिनेश कुमार on March 25, 2015 at 7:12pm
हौसला अफ़्जाई के लिए बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय समर कबीर सर जी। स्नेह और आशीर्वाद बनाए रखिएगा सर जी।
Comment by Samar kabeer on March 25, 2015 at 6:34pm
जनाब दिनेश कुमार जी,आदाब,लाजवाब ग़ज़ल हुई है दिनेश जी,सुन कर दिल बाग़ बाग़ हो गया,शैर दर शैर दाद के साथ ढेरों मुबारकबाद क़ुबूल फ़रमाऐं |

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