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हिज्र में भी उसकी याद ……

हिज्र में भी उसकी याद ……

आज वो रहगुज़र ..हमें बेगानी सी लगती है
उनके वादों पे यकीं इक नादानी सी लगती है

इक वाद-ऐ-फ़र्दा के साथ उनका यूँ ज़ुदा होना
फिर इंतज़ार उनका इक कहानी सी लगती है

जिनकी आमद से ख़ल्वत जलवत हो जाती थी
दीद-ओ-दिल में वही मूरत .पुरानी सी लगती है

दम भरती थी जो सदा जन्नत तक साथ देने का
तसव्वुर में उसकी तस्वीर .अंजानी सी लगती है

आज मेरे ख्वाब में वो इक शरर बनके चमकी है
हिज्र में भी उसकी याद मुझे सुहानी सी लगती है


सुशील सरना

'' मौलिक एवं अप्रकाशित ''

Views: 489

Comment

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Comment by Sushil Sarna on April 17, 2014 at 5:07pm

 आदरणीय भुवन निस्तेज  जी  ग़ज़ल पर आपकी स्नेहिल प्रशंसा का हार्दिक आभार -प्रतिक्रिया पर आभार में विलम्ब हेतु क्षमा 

Comment by Sushil Sarna on April 17, 2014 at 5:06pm

 आदरणीया अनीता मौर्य   जी  ग़ज़ल पर आपकी स्नेहिल प्रशंसा का हार्दिक आभार -प्रतिक्रिया पर आभार में विलम्ब हेतु क्षमा 

Comment by Sushil Sarna on April 17, 2014 at 5:05pm

 आदरणीया राजेश कुमारी   जी  ग़ज़ल पर आपकी स्नेहिल प्रशंसा का हार्दिक आभार -प्रतिक्रिया पर आभार में विलम्ब हेतु क्षमा 

Comment by Sushil Sarna on April 17, 2014 at 5:04pm

 आदरणीया मीना पाठक  जी  ग़ज़ल पर आपकी स्नेहिल प्रशंसा का हार्दिक आभार -प्रतिक्रिया पर आभार में विलम्ब हेतु क्षमा 

Comment by Sushil Sarna on April 17, 2014 at 5:03pm

 आदरणीय गिरिराज  भंडारी जी  ग़ज़ल पर आपकी स्नेहिल प्रशंसा का हार्दिक आभार -प्रतिक्रिया पर आभार में विलम्ब हेतु क्षमा 

Comment by भुवन निस्तेज on April 15, 2014 at 2:02pm

ढेरों बधाइयाँ.....

Comment by Anita Maurya on April 15, 2014 at 11:31am

क्या बात है !! बहुत ही सुन्दर ग़ज़ल. 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on April 15, 2014 at 10:27am

बहुत सुन्दर भाव बढ़िया प्रस्तुति 

Comment by Meena Pathak on April 14, 2014 at 3:05pm

क्या बात ...... बहुत खूब ... बधाई | सादर 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on April 14, 2014 at 11:56am

आदरणीय सुशील सरन भाई , उम्दा गज़ल कही है , आपको हार्दिक बधाइयाँ !!

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