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ग़ज़ल - जादुई बात थी सजाओं में - पूनम शुक्ला

2122. 1212. 22

जाने क्या बात है हवाओं में
मीठी मिश्री घुली सदाओं में

ऐसी वैसी नहीं ये रातें हैं
चाँदनी खोजतीं खलाओं में

शबनमी रात ने कहा कुछ है
कुछ नई बात है सबाओं में

रात का है असर अभी ऐसा
जामुनी रंग है अदाओं में

रोशनी छीन ले जो वो मेरी
ऐसी ताकत नहीं ज़फाओं में

जिन्दगी आज सोचती है ये
जादुई बात थी सजाओं में

पूनम शुक्ला

मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment

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Comment by वीनस केसरी on November 17, 2013 at 3:38am

सरल भाषा के साथ ग़ज़लियत उभर कर सामने आने लगी है आपके प्रयासों के लिए ढेरो बधाईए

Comment by Saarthi Baidyanath on November 15, 2013 at 11:06pm

जाने क्या बात है हवाओं में
मीठी मिश्री घुली सदाओं में

रात का है असर अभी ऐसा
जामुनी रंग है अदाओं में.....बेहतरीन अशआर है श्रीमती जी ...वाह 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on November 15, 2013 at 9:35am

बहुत बढ़िया

Comment by Nilesh Shevgaonkar on November 15, 2013 at 7:24am

बहुत ख़ूब 

Comment by Abhinav Arun on November 14, 2013 at 7:31pm

शबनमी रात ने कहा कुछ है
कुछ नई बात है सबाओं में

रात का है असर अभी ऐसा
 जामुनी रंग है अदाओं में....वाह क्या कहने लाजवाब , शानदार अश'आर हार्दिक बधाई और अनंत शुभकामनायें आ. पूनम जी !

Comment by अरुन 'अनन्त' on November 14, 2013 at 11:44am

आदरणीया पूनम जी सुन्दर ग़ज़ल बधाई

Comment by Sushil.Joshi on November 14, 2013 at 5:15am

बहुत बहुत बधाई इस खूबसूरत गज़ल हेतु आ0 पूनम जी......

Comment by Sarita Bhatia on November 13, 2013 at 5:59pm

बधाई हो पूनम जी खुबसूरत गजल के लिए 

डॉ गोपाल जी ने ठीक कहा आपकी पोस्ट हमेशा दिखती है मंच पर 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on November 13, 2013 at 5:37pm

आदरणीया , !!!!! सुन्दर गज़ल के लियेआपको हार्दिक बधाई !!!!!

Comment by Meena Pathak on November 13, 2013 at 5:15pm

बहुत खूब | बधाई आप को 

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