For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")


राह तकती है तुम्हारी,
आज यह सूनी कलाई....

स्मृति बस स्मृति ही ,
शेष है सूने नयन में
बिम्ब दिखता है तुम्हारा,
आज मधु मंजुल सुमन में
यूँ लगा कि द्वार खुलते
ही मुझे दोगी दिखाई
राह तकती है तुम्हारी
आज यह सूनी कलाई.........................

आरती की थाल कर में
दीप आशा का जलाये
इस धरा पर कौन है जो
नेह की सरिता लुटाये
श्रावणी वर्षा हृदय में
आज मेरे है समाई
राह तकती है तुम्हारी
आज यह सूनी कलाई.........................

रेशमी धागों की अब भी
इस कलाई पर छुअन है
हो रहा अहसास कि
नजदीक ही मेरी बहन है
वह प्रतीक्षा कर रही है
हाथ में थामे मिठाई
राह तकती है तुम्हारी
आज यह सूनी कलाई........................

अरुण कुमार निगम
आदित्य नगर , दुर्ग (छत्तीसगढ़)
विजय नगर, जबलपुर (म.प्र.)

Views: 1747

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Ashok Kumar Raktale on August 4, 2012 at 11:35pm

निगम साहब

                 सादर,

रेशमी धागों की अब भी
इस कलाई पर छुअन है
हो रहा अहसास कि
नजदीक ही मेरी बहन है
वह प्रतीक्षा कर रही है
हाथ में थामे मिठाई
राह तकती है तुम्हारी
आज यह सूनी कलाई........................

बहुत भावुक करती काव्य पंक्तियाँ. वाह! बहुत ही सुंदरता से रचा है. बधाई.

Comment by SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR on August 4, 2012 at 12:05am

आदरणीय और प्रिय अरुण निगम जी ..हार्दिक शुभ कामनाएं जन्म दिन मुबारक हो ...प्रभु आप के सारे प्यारे सपने पूर्ण करें आप समाज को यों ही रोशन करते रहें 

अरुण अरुणिमा ले कर निकले 
चारों ओर उजाला हो 
हर कर जोरे स्वागत करते 
मन देखे  मतवाला हो 

जय श्री राधे 

भ्रमर ५ 
Comment by अरुन 'अनन्त' on August 3, 2012 at 11:34am

वाह आदरणीय अरुण जी तहे दिल से बधाई स्वीकार करें.....

Comment by satish mapatpuri on August 3, 2012 at 2:18am

राह तकती है तुम्हारी, आज यह सूनी कलाई.... ..... छक्का तो यहीं मार दिया आपने निगम साहेब . बहुत सुन्दर ख्याल .

रेशमी धागों की अब भी इस कलाई पर छुअन है हो रहा अहसास कि नजदीक ही मेरी बहन है वह प्रतीक्षा कर रही है हाथ में थामे मिठाई राह तकती है तुम्हारी आज यह सूनी कलाई

वाह ... वाह .... क्या बात है ... दिल से दाद दे रहा हूँ मित्र

Comment by Er. Ambarish Srivastava on August 3, 2012 at 12:40am

आँसू आँखों से  बहे, गीले अपने कांध. 

सही एक ही वेदना, गया सब्र का बांध.

आदरणीय अरुण जी,  आ० सौरभ जी, डॉ० प्राची जी व आ० अलबेला जी, आह से ही गीत उपजता है .........वस्तुतः यही सच है ...आप सभी के प्रति हार्दिक आभार ! सादर

Comment by Albela Khatri on August 2, 2012 at 11:26pm

सच कहा  आदरणीय  अरुण निगम जी.........कविता लिखी नहीं जाती, जन्म लेती है  और जन्म भी तब लेती है जब  संबंधों के संयोग से  वेदना गर्भवती होती है ...........

रात न ढले तो कभी
भोर नहीं होती बन्धु
सांझ न ढले तो कभी तम नहीं होता है

लोहू तो निकाल सकता है
तेरे पाँव में से
कांच से मगर घाव कम नहीं होता है

जीने की जो चाह है तो
मौत से भी नेह कर
डरने वालों में कभी दम नहीं होता है

सच मानो जब तक
पीर का काग़ज़ न हो
कवि की कलम का जनम नहीं होता है 


____सादर

Comment by UMASHANKER MISHRA on August 2, 2012 at 10:01pm

यहाँ  तो टिप्पणियों ने भी सजल कर दिया है

दर्द में डूबा ह्रदय तो  , डूबता संसार लगता

दिल के हालत की कहानी गीत की यह धार कहता

मै अकेले में ह्रदय को, रोकता  रह गया मगर क्यों

कवि ह्रदय भावों का साथी कविता की ले  धार बहता

Comment by UMASHANKER MISHRA on August 2, 2012 at 9:25pm
प्रिय अरुण भाई आपको इस सजल करती, मन के तार को सप्नदित करती कविता के लिए आभार आपने अपनी व्यथा के साथ उन तमाम भाइयो का दर्द उकेर कर रख दिया है जिनकी बहनों के बिना कलाई सुनी है|आपकी कविता पढ़ कर तो मेरे नैन भर आये|यादों के झरोखों से झाकती आखो का सूनापन| द्वार में बहन की उपस्थिति का मार्मिक दृश्य| श्रावणी वर्षा का ह्रदय में,ह्रदय के रुदन का सुन्दर चित्रण..रेशमी धागों की अब भी
इस कलाई पर छुअन है
हो रहा अहसास कि
नजदीक ही मेरी बहन है इस लाईन में आँख डबडबा गयी
अत्यंत नाजुक एवं मार्मिक चित्रण
आपके इस गीत पर आदरणीय सौरभ जी ,अम्बरीश जी,सुरेन्द्र जी, प्राची एवं प्रिय अलबेला जी की टिप्पणी से
आपके इस मर्म पर आपके साथ हो कर इस बात का परिचय दिया है की हमारे घर परिवार से भी बढ़कर एक और
हमारा घर परिवार है जिसका नाम है ओपन बुक ऑन लाईन| जिसके रिश्तों को आपके द्वारा सुन्दर परिभाषित किया गया है
सौरभ जी की गोद है, अम्बरीष के काँध |

प्राची अलबेला रहे , मुझको ढाढस बाँध ||

मुझको ढाढस बाँध, यही परिवार कहाये |

सुख दुख में दे साथ, वही रिश्ता कहलाये ||धन्य है हम गर्व है हमें ओ. बी.ओ. परिवार पर
Comment by Sanjay Mishra 'Habib' on August 2, 2012 at 6:44pm

कितना सुन्दर गीत रचा है आदरणीय अरुण भईया...

सादर बधाई और रक्षाबंधन की शुभकानाएं स्वीकारें...

Comment by SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR on August 2, 2012 at 5:12pm

रेशमी धागों की अब भी
इस कलाई पर छुअन है
हो रहा अहसास कि
नजदीक ही मेरी बहन है

आदरणीय अरुण निगम जी ..ये अहसास सदा यों ही बना रहे खुशियाँ सजी रहें बहनों के घर ...और भाई बहन का प्रेम यों ही अमर रहें ...सुन्दर रचना 

जय श्री राधे 
भ्रमर ५ 

 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' shared their blog post on Facebook
4 hours ago
धर्मेन्द्र कुमार सिंह commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post देश की बदक़िस्मती थी चार व्यापारी मिले (ग़ज़ल)
"बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय Ravi Shukla जी"
4 hours ago
धर्मेन्द्र कुमार सिंह commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post देवता चिल्लाने लगे हैं (कविता)
"बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय Ashok Kumar Raktale जी"
4 hours ago
Awanish Dhar Dvivedi posted a blog post

माँ

माँ यह शब्द नहींं केवलइस जग की माँ से काया है। हम सबकी खातिर अतिपावन माँ के आँचल की छाया है।१।माँ…See More
Tuesday
Dayaram Methani replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"अगर आप यों घबरा कर मैदान छोड़ देंगे तो जिन्होने एक जुट होकर षड़यन्त्र किया है वे अपनी जीत मानेंगे।…"
Tuesday
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"अब, जबकि यह लगभग स्पष्ट हो ही चुका है कि OBO की आगे चलने की संभावना नगण्य है और प्रबंधन इसे ऑफलाइन…"
May 18
amita tiwari posted a blog post

बहुत सोचती हैं क्यों ये औरतें

बहुत सोचती हैं क्यों ये औरतें बेगुनाही और इन्साफ की बात क्यों सोचती हैं ये औरतें चुपचाप अहिल्या बन…See More
May 15
amita tiwari commented on amita tiwari's blog post गर्भनाल कब कट पाती है किसी की
" मान्य,सौरभ पांडे जीआशीष यादव जी , , ह्रदय से आभारी हूँ. स्नेह बनाए रखियगा | सौरभ जी ने एक…"
May 14

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on amita tiwari's blog post बहुत सोचती हैं क्यों ये औरतें
"आदरणीया अमिताजी, तार्किकता को शाब्दिक कर तटस्थ सवालों की तर्ज में बाँधा जाना प्रस्तुति को रुचिकर…"
May 14

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post हरकत हमें तो वैद की रखती तनाव में -लक्ष्मण धामी 'मुसफिर'
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी, आपकी प्रस्तुति निखर कर सामने आयी है. सभी शेर के कथ्य सशक्त हैं और बरबस…"
May 14

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"आदरणीय नीलेश भाई, आपका स्वागत है.     करेला हो अथवा नीम, लाख कड़वे सही, लेकिन रुधिर…"
May 14
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"आदरणीय बाग़ी जी एवं कार्यकारिणी के सभी सदस्यगण !बहुत दुखद है कि स्थिथि बंद करने तक आ गयी है. आगे…"
May 13

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service