दौड़ती हुई तट पे इतनी दूर निकल आयी
लंबी है डगर जीवन की कांटो भरे हैं रास्ते
पग पग पे कहीं लगे न ठोकर चलना तुम आस्ते
चुन लूंगा मैं ये कांटे सारे तेरा जीवन संवार लूं
ओ नन्ही परी मासूम कली आ गोद उठा लूं
हँसता रहे बचपन तेरा लग जाए मेरी दुआ
मासूम सी कली है तू गर्म थपेडों ने है छुआ
शीतल पवन का झोंका दे तुझे जी भर निहार लूं
Comment
आदरणीय भ्रमर जी, सादर
मैं जानता था कि आपका कवि ह्रदय जरूर गुनगुनाएगा. आभार
आदरणीय बाली जी, सादर
आपका स्नेह मेरा सहारा है
धन्यवाद.
आदरणीय अलबेला खत्री जी, सादर
स्नेह हेतु आभार
आदरणीय योगी जी, सादर
स्नेह हेतु आभार.
आदरणीय उमा शंकर जी, सादर
आभार.
आपका विशाल अनुभव झलकता है
आपका ह्रदय कोमल प्यार छलकता है
प्रिय कुमार जी, सस्नेह
सर्द गरम ठोस नरम का तुझे न है अभी अहसास
लंबी है डगर जीवन की कांटो भरे हैं रास्ते
आदरणीय कुशवाहा जी ...बहुत सुन्दर ....मै भी गुनगुनाने लगा ...ओ नन्ही परी .....काश इनकी राहों में कांटे कभी न आयें फूल खिल जाएँ
वाह वाह वाह वाह
क्या बात है प्रदीप जी........
बहुत खूब !
पग पग पे कहीं लगे न ठोकर चलना तुम आस्ते
चुन लूंगा मैं ये कांटे सारे तेरा जीवन संवार लूं
ओ नन्ही परी मासूम कली आ गोद उठा लू
___बधाई इस अनुपम कविता के लिए
हँसता रहे बचपन तेरा लग जाए मेरी दुआ
मासूम सी कली है तू गर्म थपेडों ने है छुआ
शीतल पवन का झोंका दे तुझे जी भर निहार लूं
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