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मेरा इक छोटा सा सपना

मेरा इक छोटा सा सपना
कब होगा वो पूरा अपना

देखो ये बरसाती मौसम
छत का मेरी टप-टप करना

बचपन की सब बातें मुझको
लगती मुझको जैसे सपना

राही भटका राहों में है
कोइ घट न जाए घटना

लम्बी तानू सोना चाहूं
मेरा इक छोटा सा सपना

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प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on September 28, 2010 at 6:53pm
बहुत सुंदर कविता कही है अभिवन भाई, बहुत खूब !

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on September 28, 2010 at 6:50pm
वाह वाह अभिनव भाई, बहुत खूब लिखा आपने,
मेरा इक छोटा सा सपना
कब होगा वो पूरा अपना
अभिनव भाई जब सपना देखे है तो पूरा भी जरूर होगा, वैसे सही कहूँ अभिनव भाई तो आप की लेखनी मे अब निखार आ रहा है, ईश्वर से प्रार्थना है कि अभिनव भाई के सपने पूरे हो ...........

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