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मैं ना तेरी बात का कायल

मैं ना तेरी बात का कायल
करता मेरा मन तू घायल

घर का आंगन झूम रहा है
छ्म-छ्म करती तेरी पायल

कांव-कांव है कौवा करता
मीठा-मीठा बोले कोयल

बरसेगा ये बेदम हो कर
आसमान पर उमड़ा बादल

माथे पे तेरे दमके बिंदिया
आंखो में है चमके काजल

"अभिनव"तू क्यूं चिंता करता
हम अच्छे हैं सब में पागल

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मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on October 13, 2010 at 8:43pm
अभिनव भाई, बहुत ही सुंदर कविता, बधाई स्वीकार करे,

कृपया ध्यान दे...

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