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दूर होकर

दूर होकर तुझसे हम दूर कहाँ जाएँगे
दिल में झाँको तो सही पास नज़र आएँगे
दूर होकर तुझसे हम दू ---------------
हम मुहब्बत के पुजारी हैं करो मुझपे यकीं
तुम पुकारोगे जहाँ हमको पाओगे वहीँ
हम तो सांसों हम तो आँखों में ही बस जाएँगे
दिल में झाँको तो सही पास नज़र आएँगे
दूर होकर तुझसे हम दू ---------------
यह हकीकत है मेरे दिल पे हक है तेरा
मैं हूँ 'दीपक' मुझे अंधेरों ने अक्सर घेरा
गीत मेरे तेरे दिल को भी बहलाएँगे
दिल में झाँको तो सही पास नज़र आएँगे
दूर होकर तुझसे हम दू---------------
गम नहीं वक्त का आखिर यह थम जाएगा
ज़ख्म गहरा ही सही आखिर भर जाएगा 
लम्हें अच्छे हो बुरे सब ही गुज़र जाएँगे 
दिल में झाँको तो सही पास नज़र आएँगे
दूर होकर तुझसे हम दू ---------------


दीपक शर्मा 'कुल्लुवी'
09350078399
१८ मई २०१२.

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Comment

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मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on May 22, 2012 at 9:29am

सुन्दर अभिव्यक्ति कुल्लवी साहिब |

Comment by Ashok Kumar Raktale on May 20, 2012 at 8:54am

कुल्लुवी जी,
                    सादर, बहुत सुन्दर गीत. बधाई.

Comment by Nilansh on May 19, 2012 at 12:14pm

sunder  nazm hai bhai

ज़ख्म गहरा ही सही आखिर भर जाएगा 

लम्हें अच्छे हो बुरे सब ही गुज़र जाएँगे 
दिल में झाँको तो सही पास नज़र आएँगे
Comment by MAHIMA SHREE on May 18, 2012 at 9:34pm
ज़ख्म गहरा ही सही आखिर भर जाएगा 
लम्हें अच्छे हो बुरे सब ही गुज़र जाएँगे 
दिल में झाँको तो सही पास नज़र आएँगे

बहुत ही प्यारी अभिवयक्ति .. बधाई स्वीकार करे


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on May 18, 2012 at 9:23pm

दीपक जी बहुत सुन्दर भावपूर्ण रचना के लिए बधाई स्वीकारें 

Comment by Deepak Sharma Kuluvi on May 18, 2012 at 5:36pm
शुक्रिया भाई साहब हौंसला हफ्जाई के लिए 

दीपक शर्मा 'कुल्लुवी'
Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on May 18, 2012 at 5:04pm

आदरणीय दीपक  जी 

मैं हूँ 'दीपक' मुझे अंधेरों ने अक्सर घेरा
गीत मेरे तेरे दिल को भी बहलाएँगे
बहुत बढ़िया भाव के साथ रचना , बधाई. 

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