For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

अनुष्टुप में एक प्रयोग

चित्र से काव्य तक प्रतियोगिता अंक १०  में आदरणीय सौरभ बड़े भईया द्वारा अनुष्टुप छंद के विषय मे दी गयी बहुमूल्य जानकारी के आधार पर यह व्यंग्य प्रयोग प्रस्तुत है...

|

समय है चुनावों का, गाल सब बजा रहे |

राम युग बसाएंगे, ख्वाब अब दिखा रहे ||

 

भेद भूल गये सारे, कौन जन गरीब हैं |

झोपडियां सभी जाएँ, मिलता जो चबा रहे ||

 

ढोयें सर धमेले भी, खाट पर पड़े रहें |

पैर छाले खिलें भी तो, मंद वो मुसका रहे ||

 

श्रम करें किसानों सा, पौधे रोप रहे अभी |

मौज कर बिताएंगे, पांच वर्ष मना रहे ||

 

‘हबीब’ जानता भी है, कितना कौ गैर है |

सभी यहाँ रियाया को, चूना नित लगा रहे ||


(क्या ऐसा प्रयोग उचित होगा? साथ ही आदरणीय गुरुजनों/सुधीजनों से त्रुटियों को रेखांकित कर इस मनमोहक छंद को समझने में मदद करने का सादर निवेदन )

सादर

संजय मिश्रा 'हबीब'

Views: 387

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Sanjay Mishra 'Habib' on January 26, 2012 at 8:45pm

आदरणीय सौरभ बड़े भईया, अनुष्टुप छंद के सम्बन्ध में आपकी सहज व्याख्या से ही इसके शिल्प की बातें कुछ कुछ साफ़ हुई हैं... अनुज का यह प्रयास आपके अनुमोदन से सम्मान पा गया... स्नेहाधीन बनाए रखकर मार्गदर्शन करते रहें. सादर.

Comment by Sanjay Mishra 'Habib' on January 26, 2012 at 8:39pm

आदरणीय आलोक सर, आप जैसे छंदशाष्त्री की सराहना से मन प्रसन्न हो गया... ओ बी ओ में आकर आप सब गुरुजनों के मार्गदर्शन में कुछ सिखने प्रयासरत हूँ. आपका सादर आभार.... स्नेह बनाएं रखें आदरणीय.

Comment by Sanjay Mishra 'Habib' on January 26, 2012 at 8:36pm

आदरणीया मोहिनी जी, सादर आभार.


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on January 24, 2012 at 1:05pm

छंद की बानगी उम्दा, दीखता है प्रयास भी

कोशिशें रंग लायें यों,  तो मन भी रमा रहे .. .

भाई संजय ’हबीब’जी, आपकी कोशिश एकदम से मुग्ध कर गयी है.  एक तो आपका विषय ही मौजूँ है, दूसरे छंद का निर्वहन भी बहुत ही दुरुस्त ढंग से हुआ है.   छंद के शिल्प के प्रयोग में आपने अपेक्षित सावधानी तो बरती ही है, इसमें व्यंग्यात्मक धार देकर इसे आज के हिसाब से रुचिकर बना दिया है.

आपके इस प्रयास पर मैं हृदय से आपको बधाई देता हूँ.  आपका प्रयास कई-कई लिखने वालों के लिये उत्प्रेरण और उदाहरण होना चाहिये.

हबीब जी, आज हृदय वाकई प्रसन्न है.  हार्दिक शुभकामनाएँ.

 

Comment by Yogendra B. Singh Alok Sitapuri on January 23, 2012 at 4:05pm

लोकतंत्र बचाओ भी, समाज को सिखा रहे.  

अनुष्टुपी प्रयासों से, भाई हबीब गा रहे..

छंदों में निखार आता जा रहा है, बहुत-बहुत बधाई ! 

Comment by mohinichordia on January 23, 2012 at 2:36pm

 राम युग बसायेंगें ख्वाब अब दिखा रहे ..... झोंपडियां सभी जाएँ मिलता जो चबा रहे ...बहुत सटीक रचना |सच  कड़वा ही होता है |

Comment by Sanjay Mishra 'Habib' on January 22, 2012 at 7:53pm

सादर आभार आदरनीय बागी भाई....

सही कहा आपने... छंद मर्मज्ञों का स्नेहिल मार्गदर्शन न केवल रचना का और उसमें सकारातमक सुधार का स्त्रोत होता है बल्कि मुझ जैसे विद्यार्थियों को सही दिशा में चलने हेतु प्रेरित भी करता है...

सादर.


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on January 22, 2012 at 5:13pm

छंद की बात छंद के जानकार करेंगे, पर कथ्य बहुत ही उम्दा है, बात थोड़ी तीखी कही है किन्तु सत्य है, प्रस्तुति शानदार, बधाई स्वीकार करें |

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Admin posted discussions
7 hours ago
Admin added a discussion to the group चित्र से काव्य तक
Thumbnail

'ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव’ अंक 140

आदरणीय काव्य-रसिको !सादर अभिवादन !! ’चित्र से काव्य तक’ छन्दोत्सव का यह एक सौ चालीसवाँ आयोजन है.…See More
7 hours ago
आचार्य शीलक राम posted a blog post

व्यवस्था के नाम पर

कोई रोए, दुःख में हो बेहाल असहाय, असुरक्षित, अभावग्रस्त टोटा संगी-साथी, हो कती कंगाल अत्याचार,…See More
9 hours ago
Anjuman Mansury 'Arzoo' posted a blog post

ग़ज़ल - मैं अँधेरी रात हूंँ और शम्स के अनवर-से आप

2122 2122 2122 212मैं अँधेरी रात हूंँ और शम्स के अनवर-से आप शाम-सी मुझ में उदासी, सुब्ह के मंज़र-से…See More
13 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Anjuman Mansury 'Arzoo''s blog post ग़ज़ल - अभी बस पर ही टूटे हैं अभी अंबर नहीं टूटा
"आ. अंजुमन जी, अभिवादन। गजल का प्रयास अच्छा है हार्दिक बधाई।"
22 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

गीत -६ ( लक्ष्मण धामी "मुसाफिर")

रूठ रही नित गौरय्या  भी, देख प्रदूषण गाँव में।दम घुटता है कह उपवन की, छितरी-छितरी छाँव में।।*बीते…See More
yesterday
Anjuman Mansury 'Arzoo' posted a blog post

ग़ज़ल - अभी बस पर ही टूटे हैं अभी अंबर नहीं टूटा

1222 1222 1222 1222अभी बस पर ही टूटे हैं अभी अंबर नहीं टूटा परिंदा टूटा है बाहर अभी अंदर नहीं टूटा…See More
Tuesday
AMAN SINHA posted a blog post

नर हूँ ना मैं नारी हूँ

नर हूँ ना मैं नारी हूँ, लिंग भेद पर भारी हूँपर समाज का हिस्सा हूँ मैं, और जीने का अधिकारी हूँ जो है…See More
Monday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"मिली मुझे शुभकामना, मिले प्यार के बोलभरा हुआ हूँ स्नेह से,दिन बीता अनमोलतिथि को अति विशिष्ट बनाने…"
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"आ. भाई सौरभ जी को जन्मदिन की ढेरों हार्दिक शुभकामनाएँ ।।"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

तिनका तिनका टूटा मन(गजल) - लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"

२२/२२/२२/२ सोचा था हो बच्चा मन लेकिन पाया  बूढ़ा मन।१। * नीड़  सरीखा  आँधी  में तिनका तिनका…See More
Saturday
आचार्य शीलक राम posted blog posts
Saturday

© 2022   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service