For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

दोहा दशम. . . . उल्फत

दोहा दशम - ..... उल्फत

अश्कों से जब धो लिए, हमने दिल के दाग ।
तारीकी में जल  उठे, बुझते हुए चिराग ।।

ख्वाब अधूरे कह गए, उल्फत के सब राज ।
अनसुनी वो कर गए, इस दिल की आवाज ।।

आँसू, आहें, हिचकियाँ, उल्फत के  ईनाम ।
नींदों से ली दुश्मनी, और हुए बदनाम ।।

माना उनकी बात का, दिल को नहीं यकीन ।
आयें अगर न ख्वाब है, उल्फत की तौहीन ।।

यादों से हों यारियाँ , तनहाई से प्यार ।
उल्फत का अंजाम बस , इतना सा है यार ।।

मिला इश्क को हुस्न से, अलबेला उपहार ।
चश्मे साहिल हो गया,  अश्कों से गुलजार ।।

तनहा - तनहा दिल जला, तनहा जले चिराग ।
तनहाई के दौर में, छलके  दिल के दाग ।।

बाहुबंध में ख्वाब का, हुआ अजब अहसास ।
और करीबी से बढ़ी, प्यासी- प्यासी प्यास ।।

यादों के हैं जलजले, ख्वाबों के दीवान ।
हासिल  उल्फत में हुए, अश्कों के तूफान ।।

उल्फत की रुख़सार पर, अश्क लिखें तहरीर ।
दर्द भरी तन्हाइयाँ, इसकी है तासीर ।।

सुशील सरना / 10-2-25

मौलिक एवं अप्रकाशित 

Views: 63

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Ravi Shukla on April 29, 2025 at 1:02pm

आदरणीय सुशील जी दोहो की प्रस्तुति के लिये ेबहुत बहुत बधाई 

दोहो में कुछ कल संयोजन पर काम किया जा सकता है उदाहरण के लिये 
आये अगर न ख़्वाब है  को ख़्वाब अगर आये नहीं  में दोहे का प्रचलति विन्यास 33232 लय बढ़ा सकता है 

अंतिम में जहा तक मैं कथ्य समझा हूँ  अश्क रुखसार पर उल्फत की तहरीर लिख रहे हैं  तो इसे ऐसे भी कह सकते है 

अश्क लिखें रुख़सार पर, उल्फ़त की तहरीर ।

एक दोहे मे आपने लिखा है छलके दिल के दाग   दाग का छलकना  कुछ असहज बात लगती है दाग या ज़ख़्म  महकें तो बात अलग होगी ।  सेंकड लास्ट दोहे में जलजले ( भूकंप) के साथ तूफान सही है लेकिन दीवान  से क्या तात्पर्य है ?

इश्क को हुस्न से अलबेला उपहार मिला ठीक है किन्तु   साहिल ( समुद्र या दरिया का किनारा)  की आखों में अश्क क्यूँ आये आसुओं से गुलजार  होने की कैफियत बयां नहीं हो रही दोहे में । 

एक पाठक के रूप मे मेरी सहज जिज्ञासा  है  । प्रस्तुति के लिये पुनः बधाई 

Comment by Sushil Sarna on February 14, 2025 at 4:11pm
आदरणीय निलेश जी सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार आदरणीय
Comment by Nilesh Shevgaonkar on February 14, 2025 at 10:12am

बहुत उत्तम दोहे हुए हैं आ. सुशिल जी 
बधाई 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-129 (विषय मुक्त)
"नववर्ष की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं समस्त ओबीओ परिवार को। प्रयासरत हैं लेखन और सहभागिता हेतु।"
6 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey posted a blog post

नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ

सूर्य के दस्तक लगाना देखना सोया हुआ है व्यक्त होने की जगह क्यों शब्द लुंठित जिस समय जग अर्थ ’नव’…See More
7 hours ago
Admin replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-129 (विषय मुक्त)
"स्वागतम"
Monday
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-186
"बहुत आभार आदरणीय ऋचा जी। "
Monday
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-186
"नमस्कार भाई लक्ष्मण जी, अच्छी ग़ज़ल हुई है।  आग मन में बहुत लिए हों सभी दीप इससे  कोई जला…"
Monday
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-186
"हो गयी है  सुलह सभी से मगरद्वेष मन का अभी मिटा तो नहीं।।अच्छे शेर और अच्छी ग़ज़ल के लिए बधाई आ.…"
Monday
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-186
"रात मुझ पर नशा सा तारी था .....कहने से गेयता और शेरियत बढ़ जाएगी.शेष आपके और अजय जी के संवाद से…"
Monday
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-186
"धन्यवाद आ. ऋचा जी "
Monday
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-186
"धन्यवाद आ. तिलक राज सर "
Monday
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-186
"धन्यवाद आ. लक्ष्मण जी "
Monday
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-186
"धन्यवाद आ. जयहिंद जी.हमारे यहाँ पुनर्जन्म का कांसेप्ट भी है अत: मौत मंजिल हो नहीं सकती..बूंद और…"
Monday
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-186
"इक नशा रात मुझपे तारी था  राज़ ए दिल भी कहीं खुला तो नहीं 2 बारहा मुड़ के हमने ये…"
Sunday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service